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Lakhimpur Kheri News: स्टैंड शून्य, ई-रिक्शे 14,780... सड़क पर ही सवारी तलाश रहे चालक
Sat, 29 Aug 2026 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:59 PM IST
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रजा मोहम्मद
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लखीमपुर खीरी। शहर में ई-रिक्शों के लिए स्टैंड शून्य हैं, जबकि परिवहन विभाग में 14,780 ई-रिक्शे पंजीकृत हैं। इनमें करीब सात हजार शहर में संचालित हो रहे हैं।
स्थिति ये है कि सवारी के इंतजार में चालक सड़क किनारे, बाजारों और चौराहों पर ही ई-रिक्शे खड़े कर रहे हैं। जहां सवारी दिखी, वहीं वाहन रोककर सवारियां बैठाई जा रही हैं। इससे प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है और व्यस्त समय में जाम की स्थिति बन रही है।
पांच वर्षों में शहर में ई-रिक्शों की संख्या करीब तीन गुना तक बढ़ गई है। इसके बावजूद इनके खड़े होने के लिए स्टैंड की व्यवस्था नहीं हो सकी। तत्कालीन डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने नगर पालिका को ई-रिक्शों के रूट प्लान और स्टैंड बनाने के निर्देश दिए थे। करीब एक साल पहले नगर पालिका ने नौ मार्ग भी तय किए, लेकिन व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी।
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करीब एक साल पहले नगर पालिका ने ई-रिक्शों के लिए नौ मार्ग तय किए थे। इनमें अलग-अलग रंग की पट्टियों के आधार पर रूट बनाए गए। पीले रंग वाले ई-रिक्शों को एलआरपी चौराहे से संकटा देवी चौकी होते हुए मेला मैदान तक, लाल रंग वालों को संकटा देवी चौराहे से कृष्णा टॉकीज, रेलवे क्रॉसिंग होते हुए लालपुर बैरियर तक और नारंगी रंग वालों को मेला मैदान से निघासन रोड होते हुए महेवागंज पुल तक चलना था।
नीले रंग वालों का रूट एसएसबी कैंप गढ़ी रोड से निघासन रोड, मेला मैदान, इमली चौराहा होते हुए पुराना एसपी बंगला तक, हरे रंग वालों का पुराना एसपी बंगला से नौरंगाबाद चौराहा और नगर सीमा ऐरा रोड तक तथा सफेद रंग वालों का नहर पटरी से नौरंगाबाद चौराहा, शाहपुरा कोठी होते हुए विलोबी तक तय किया गया था।
गुलाबी रंग वाले रेलवे स्टेशन से बस स्टेशन, सौजन्या चौक और राजापुर चौराहा तक, आसमानी रंग वाले सीतापुर रोड ओवरब्रिज के नीचे से ईदगाह, बेहजम रोड, नहरिया होते हुए छाउछ चौराहा तक और भूरे रंग वाले पुराना एसपी बंगला, शाहपुरा कोठी होते हुए गुरु गोविंद सिंह चौक तक संचालित होने थे, लेकिन स्टैंड नहीं बन सके। रूट प्लान भी जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो सका।
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मुख्य मार्ग से स्टेशन तक सड़क पर ही बन जाता है ठिकाना
स्टैंड नहीं होने का असर शहर के प्रमुख इलाकों में दिखाई देता है। मुख्य मार्ग, संकटा देवी चौराहा, रेलवे स्टेशन, धर्मशाला चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, मेला चौराहा, बस स्टैंड, फ्लाईओवर, मुख्य बाजार और अस्पताल के आसपास ई-रिक्शे सड़क किनारे खड़े रहते हैं। सवारी मिलने पर चालक वहीं से वाहन भरते हैं। इससे सड़क की जगह कम होती है और दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
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दुकान के सामने दिनभर ई-रिक्शे खड़े रहते हैं। एक ई-रिक्शा हटता है तो दूसरा आकर खड़ा हो जाता है। इससे दुकान के सामने का रास्ता घिरा रहता है और कारोबार भी प्रभावित होता है।
-रजा मोहम्मद, दुकानदार, सदर तहसील रोड
ई-रिक्शों की वजह से अक्सर अव्यवस्था बनी रहती है। दुकानों के सामने वाहन खड़े होने से ग्राहकों को रुकने की जगह नहीं मिलती। कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
-मंदीप सिंह, दुकानदार, आर्यकन्या चौराहा
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जब ई-रिक्शों का रूट प्लान बनाया गया था, उस समय रेलवे स्टेशन के सामने, मेडिकल कॉलेज के कॉर्नर समेत कई जगहों पर स्टैंड चिह्नित किए गए थे। बाद में वहां निर्माण होने से प्लान प्रभावित हो गया। अब फिर से जगह चिह्नित की जा रही है।
-संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका
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लखनऊ में भी ई-रिक्शों की संख्या पर हाईकोर्ट चिंतित
लखनऊ में ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या और पार्किंग की समस्या पर हाईकोर्ट ने भी चिंता जताई है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हर सड़क पर वाहनों को संभालने की एक तय क्षमता होती है। क्षमता से ज्यादा वाहन होने पर ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ती है। कोर्ट ने सरकार को ई-रिक्शों की बिक्री और संचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीति बनाने के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
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स्थिति ये है कि सवारी के इंतजार में चालक सड़क किनारे, बाजारों और चौराहों पर ही ई-रिक्शे खड़े कर रहे हैं। जहां सवारी दिखी, वहीं वाहन रोककर सवारियां बैठाई जा रही हैं। इससे प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है और व्यस्त समय में जाम की स्थिति बन रही है।
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पांच वर्षों में शहर में ई-रिक्शों की संख्या करीब तीन गुना तक बढ़ गई है। इसके बावजूद इनके खड़े होने के लिए स्टैंड की व्यवस्था नहीं हो सकी। तत्कालीन डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने नगर पालिका को ई-रिक्शों के रूट प्लान और स्टैंड बनाने के निर्देश दिए थे। करीब एक साल पहले नगर पालिका ने नौ मार्ग भी तय किए, लेकिन व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी।
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करीब एक साल पहले नगर पालिका ने ई-रिक्शों के लिए नौ मार्ग तय किए थे। इनमें अलग-अलग रंग की पट्टियों के आधार पर रूट बनाए गए। पीले रंग वाले ई-रिक्शों को एलआरपी चौराहे से संकटा देवी चौकी होते हुए मेला मैदान तक, लाल रंग वालों को संकटा देवी चौराहे से कृष्णा टॉकीज, रेलवे क्रॉसिंग होते हुए लालपुर बैरियर तक और नारंगी रंग वालों को मेला मैदान से निघासन रोड होते हुए महेवागंज पुल तक चलना था।
नीले रंग वालों का रूट एसएसबी कैंप गढ़ी रोड से निघासन रोड, मेला मैदान, इमली चौराहा होते हुए पुराना एसपी बंगला तक, हरे रंग वालों का पुराना एसपी बंगला से नौरंगाबाद चौराहा और नगर सीमा ऐरा रोड तक तथा सफेद रंग वालों का नहर पटरी से नौरंगाबाद चौराहा, शाहपुरा कोठी होते हुए विलोबी तक तय किया गया था।
गुलाबी रंग वाले रेलवे स्टेशन से बस स्टेशन, सौजन्या चौक और राजापुर चौराहा तक, आसमानी रंग वाले सीतापुर रोड ओवरब्रिज के नीचे से ईदगाह, बेहजम रोड, नहरिया होते हुए छाउछ चौराहा तक और भूरे रंग वाले पुराना एसपी बंगला, शाहपुरा कोठी होते हुए गुरु गोविंद सिंह चौक तक संचालित होने थे, लेकिन स्टैंड नहीं बन सके। रूट प्लान भी जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो सका।
मुख्य मार्ग से स्टेशन तक सड़क पर ही बन जाता है ठिकाना
स्टैंड नहीं होने का असर शहर के प्रमुख इलाकों में दिखाई देता है। मुख्य मार्ग, संकटा देवी चौराहा, रेलवे स्टेशन, धर्मशाला चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, मेला चौराहा, बस स्टैंड, फ्लाईओवर, मुख्य बाजार और अस्पताल के आसपास ई-रिक्शे सड़क किनारे खड़े रहते हैं। सवारी मिलने पर चालक वहीं से वाहन भरते हैं। इससे सड़क की जगह कम होती है और दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
दुकान के सामने दिनभर ई-रिक्शे खड़े रहते हैं। एक ई-रिक्शा हटता है तो दूसरा आकर खड़ा हो जाता है। इससे दुकान के सामने का रास्ता घिरा रहता है और कारोबार भी प्रभावित होता है।
-रजा मोहम्मद, दुकानदार, सदर तहसील रोड
ई-रिक्शों की वजह से अक्सर अव्यवस्था बनी रहती है। दुकानों के सामने वाहन खड़े होने से ग्राहकों को रुकने की जगह नहीं मिलती। कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
-मंदीप सिंह, दुकानदार, आर्यकन्या चौराहा
जब ई-रिक्शों का रूट प्लान बनाया गया था, उस समय रेलवे स्टेशन के सामने, मेडिकल कॉलेज के कॉर्नर समेत कई जगहों पर स्टैंड चिह्नित किए गए थे। बाद में वहां निर्माण होने से प्लान प्रभावित हो गया। अब फिर से जगह चिह्नित की जा रही है।
-संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका
लखनऊ में भी ई-रिक्शों की संख्या पर हाईकोर्ट चिंतित
लखनऊ में ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या और पार्किंग की समस्या पर हाईकोर्ट ने भी चिंता जताई है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हर सड़क पर वाहनों को संभालने की एक तय क्षमता होती है। क्षमता से ज्यादा वाहन होने पर ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ती है। कोर्ट ने सरकार को ई-रिक्शों की बिक्री और संचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीति बनाने के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

रजा मोहम्मद

रजा मोहम्मद