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बाघ-भालुओं का कुनबा बढ़ा मगर गैंडों का नहीं
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गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टूः जंगल में घूमता गैंडा। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ और भालुओं का कुनबा लगातार बढ़ रहा है लेकिन गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू में गैंडा परिवार की संख्या में इजाफा न होने से वन अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है। 20 माह के अंदर फेज टू की एक भी मादा गैंडा ने न तो किसी बच्चे को जन्म दिया है और न ही वह गर्भवती हुई है। इसके चलते पार्क में गैंडों की संख्या बढ़ाने को लेकर विशेषज्ञ नई योजना बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
दुधवा पार्क प्रशासन के मुताबिक वर्तमान समय में दुधवा में 100 के करीब भालू हैं। जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या 70 के आसपास थी। इसी प्रकार इससे पहले यहां सन 2014 में 60 बाघ थे जो बाद में हुई गणना में 118 हो गए।
सन 1984 में करीब 30 वर्ग किलोमीटर के एरिया को विद्युत चालित तारों की बाड़ से घेरकर गैंडों का नया घर तैयार किया गया था। असम से तीन मादा के अलावा दो नर और नेपाल से चार मादा गैंडा लाकर शुरू की गई इस परियोजना में अब तक गैंडों की संख्या कुल 42 हुई है। गैंडों की बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्रफल को देखते हुए दो साल पहले बेलरायां रेंज के भादीताल में 14 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गैंडों का एक नया घर तैयार किया गया था, जिसे गैंडा पुनर्वास योजना फेज टू नाम दिया गया। अप्रैल 2018 में फेज वन से तीन मादा और एक नर गैंडे को लाकर इसमें रखा गया था। उस वक्त इन तीन मादा गैंडों में एक गर्भवती बतायी जा रही थी। लेकिन फेज टू योजना के शुरू होने के 20 माह गुजर जाने के बाद भी इस नए घर में न तो कोई किलकारी गूंजी है और न ही कोई मादा गर्भवती है जबकि तीनों मादा और नर गैंडे पूरी तरह वयस्क हैं। ऐसी स्थिति में अब तक कम से कम शिशु का जन्म और दो मादा गैंडों को गर्भवती होना चाहिए। ऐसा न होने से दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ चिंता में हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि गैंडा पुनर्वासन योजना में गैंडा परिवार की बढ़ोतरी के अब तक कोई आसार नजर न आने से चिंता बढ़ रही है। इस संबंध में विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। जल्दी ही विशेषज्ञ गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू का अध्ययन करेंगे। साथ ही गैंडों की चिकित्सकीय जांच भी कराई जाएगी ताकि आबादी बढ़ने में आ रही बाधाओं को पता लगाकर दूर किया जा सके। संवाद
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दुधवा पार्क प्रशासन के मुताबिक वर्तमान समय में दुधवा में 100 के करीब भालू हैं। जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या 70 के आसपास थी। इसी प्रकार इससे पहले यहां सन 2014 में 60 बाघ थे जो बाद में हुई गणना में 118 हो गए।
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सन 1984 में करीब 30 वर्ग किलोमीटर के एरिया को विद्युत चालित तारों की बाड़ से घेरकर गैंडों का नया घर तैयार किया गया था। असम से तीन मादा के अलावा दो नर और नेपाल से चार मादा गैंडा लाकर शुरू की गई इस परियोजना में अब तक गैंडों की संख्या कुल 42 हुई है। गैंडों की बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्रफल को देखते हुए दो साल पहले बेलरायां रेंज के भादीताल में 14 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गैंडों का एक नया घर तैयार किया गया था, जिसे गैंडा पुनर्वास योजना फेज टू नाम दिया गया। अप्रैल 2018 में फेज वन से तीन मादा और एक नर गैंडे को लाकर इसमें रखा गया था। उस वक्त इन तीन मादा गैंडों में एक गर्भवती बतायी जा रही थी। लेकिन फेज टू योजना के शुरू होने के 20 माह गुजर जाने के बाद भी इस नए घर में न तो कोई किलकारी गूंजी है और न ही कोई मादा गर्भवती है जबकि तीनों मादा और नर गैंडे पूरी तरह वयस्क हैं। ऐसी स्थिति में अब तक कम से कम शिशु का जन्म और दो मादा गैंडों को गर्भवती होना चाहिए। ऐसा न होने से दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ चिंता में हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि गैंडा पुनर्वासन योजना में गैंडा परिवार की बढ़ोतरी के अब तक कोई आसार नजर न आने से चिंता बढ़ रही है। इस संबंध में विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। जल्दी ही विशेषज्ञ गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू का अध्ययन करेंगे। साथ ही गैंडों की चिकित्सकीय जांच भी कराई जाएगी ताकि आबादी बढ़ने में आ रही बाधाओं को पता लगाकर दूर किया जा सके। संवाद