{"_id":"668ef23b049c850ef10575f5","slug":"troublevegetables-become-expensive-children-crying-for-milk-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1004-124329-2024-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: मुसीबत... सब्जी हुई महंगी, दूध के लिए बिलख रहे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: मुसीबत... सब्जी हुई महंगी, दूध के लिए बिलख रहे बच्चे
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी/ पलियाकलां। शारदा और सुहेली नदियों की बाढ़ ने पलिया को टापू बना दिया। बिजुआ, संपूर्णानगर और फूलबेहड़ के भी कई गांवों में पानी भर गया। जिला मुख्यालय से संपर्क कटा तो पलिया में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत बढ़ गई। मालवाहक वाहनों के न आने से नगर में पेट्रोल की किल्लत हो गई। सब्जी भी महंगी हुई है। बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट तो मिल रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा। संपूर्णानगर, बिजुआ, फूलबेहड़ और धौरहरा इलाके के बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।
शारदा नदी की बाढ़ से पलिया-निघासन मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। मालवाहक वाहन पलिया नहीं आ पा रहे हैं। मालवाहक वाहनों के न पहुंचने के कारण बाजार में सब्जी के भाव आसमान छूने लगे हैं। इसके अलावा पेट्रोल की भी किल्लत हो गई है। इसकी वजह तीन दिनों से यातायात का बंद होना है।
पेट्रोल और डीजल के टैंकर भीरा में खड़े हैं। पलिया नहीं पहुंच पा रहे। निघासन क्षेत्र से रास्ता बंद होने के कारण कोई भी मालवाहक वाहन पलिया नहीं पहुंच पा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दूध तक ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रहा है और मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर बांधकर ग्रामीण खुद की जान बचाने में जुटे हुए हैं। संपूर्णानगर में भी यही हाल है। संपूर्णानगर-खजुरिया मार्ग पर आवागमन अभी पूरी तरह से बहाल नहीं हुआ है। घरों की छतों और ट्रॉलियों में शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को आवश्यक वस्तुओं की कमी भी रुला रही है।
विज्ञापन
-- --
दूध न मिलने से बच्चे परेशान
बिजुआ ब्लॉक के कुंवरपुर, बझेड़ा, नरायनपुर आदि गांव बाढ़ प्रभावित हैं। यहां ग्रामीणों को लंच पैकेट तो मिला, लेकिन छोटे बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है। बच्चे बिलख रहे हैं। कुंवरपुर के मुकेश कुमार, पिंकू व सूरज ने बताया कि अब तक एक-एक पैकेट बिस्कुट ही मिला है। दूध और दवा का तो पूछिए ही मत। बझेड़ा के शिवपूजन, कमलेश कुमार, अरविंद, संत कुमार आदि ने बताया कि उन्हें लंच पैकेट मिला है। मगर दूध न मिलने से बच्चे परेशान हैं। सब्जी भी नहीं मिल रही है। नरायनपुर के ग्रामीणों को भी राहत सामग्री का इंतजार है।
-- -- --
दवा तो दूर, कोई पूछने तक नहीं पहुंचा
जिले के कई बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग राहत सामग्री के नाम पर सिर्फ लंच पैकेट ही मिला है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तो दूर बीमारी की हालत में दवा तक नहीं मिल पा रही। हालत यह है कि स्वास्थ्यकर्मी गांव तक पहुंच ही नहीं पा रहे। बिजुआ ब्लॉक के नरायनपुर के मुकेश, मलिकराम, भगवानदास, वेदराम आदि ने बताया कि दूध, दवा, सब्जी कुछ भी नहीं मिला। निघासन, फूलबेहड़ के कई गांवों का हाल भी ऐसा ही है।
विज्ञापन
शारदा नदी की बाढ़ से पलिया-निघासन मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। मालवाहक वाहन पलिया नहीं आ पा रहे हैं। मालवाहक वाहनों के न पहुंचने के कारण बाजार में सब्जी के भाव आसमान छूने लगे हैं। इसके अलावा पेट्रोल की भी किल्लत हो गई है। इसकी वजह तीन दिनों से यातायात का बंद होना है।
विज्ञापन
पेट्रोल और डीजल के टैंकर भीरा में खड़े हैं। पलिया नहीं पहुंच पा रहे। निघासन क्षेत्र से रास्ता बंद होने के कारण कोई भी मालवाहक वाहन पलिया नहीं पहुंच पा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दूध तक ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रहा है और मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर बांधकर ग्रामीण खुद की जान बचाने में जुटे हुए हैं। संपूर्णानगर में भी यही हाल है। संपूर्णानगर-खजुरिया मार्ग पर आवागमन अभी पूरी तरह से बहाल नहीं हुआ है। घरों की छतों और ट्रॉलियों में शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को आवश्यक वस्तुओं की कमी भी रुला रही है।
विज्ञापन
दूध न मिलने से बच्चे परेशान
बिजुआ ब्लॉक के कुंवरपुर, बझेड़ा, नरायनपुर आदि गांव बाढ़ प्रभावित हैं। यहां ग्रामीणों को लंच पैकेट तो मिला, लेकिन छोटे बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है। बच्चे बिलख रहे हैं। कुंवरपुर के मुकेश कुमार, पिंकू व सूरज ने बताया कि अब तक एक-एक पैकेट बिस्कुट ही मिला है। दूध और दवा का तो पूछिए ही मत। बझेड़ा के शिवपूजन, कमलेश कुमार, अरविंद, संत कुमार आदि ने बताया कि उन्हें लंच पैकेट मिला है। मगर दूध न मिलने से बच्चे परेशान हैं। सब्जी भी नहीं मिल रही है। नरायनपुर के ग्रामीणों को भी राहत सामग्री का इंतजार है।
दवा तो दूर, कोई पूछने तक नहीं पहुंचा
जिले के कई बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग राहत सामग्री के नाम पर सिर्फ लंच पैकेट ही मिला है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तो दूर बीमारी की हालत में दवा तक नहीं मिल पा रही। हालत यह है कि स्वास्थ्यकर्मी गांव तक पहुंच ही नहीं पा रहे। बिजुआ ब्लॉक के नरायनपुर के मुकेश, मलिकराम, भगवानदास, वेदराम आदि ने बताया कि दूध, दवा, सब्जी कुछ भी नहीं मिला। निघासन, फूलबेहड़ के कई गांवों का हाल भी ऐसा ही है।