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Lakhimpur Kheri News: 15 करोड़ के पुल की एप्रोच सड़क छह महीने में धंसी
Sun, 27 Sep 2026 11:40 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:40 PM IST
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छः माह में बने पुल की टूटी हुई नाली। संवाद
मैगलगंज। मढ़िया घाट पर गोमती नदी के ऊपर करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुल की एप्रोच सड़क आमजन के लिए शुरू होने के महज छह महीने में जगह-जगह से दरक गई है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कम समय में सड़क की हालत खराब होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। सेतु निगम ने मरम्मत शुरू करा दी है।
मढ़िया घाट का यह पुल उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से करीब 14.97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कराया गया है। परियोजना की कुल लंबाई करीब 500 मीटर है। गोमती नदी के ऊपर मुख्य पुल की लंबाई 120.68 मीटर है। पुल के दोनों ओर करीब 200-200 मीटर पहुंच मार्ग का भी निर्माण कराया गया है। निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू हुआ था।
मार्च 2026 में सेतु निगम ने पुल का 70 से 75 प्रतिशत काम पूरा होने और सितंबर तक निर्माण पूरा करने की बात कही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में छह महीने में ही एप्रोच सड़क टूटने लगे तो तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के साथ निर्माण गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और बेस की मजबूती की जांच कराने की मांग की है।
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राज्य सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर कैसर अंसारी ने बताया कि पुल की सड़क टूटने की जानकारी मिली है। दो साल तक ठेकेदार ही इसकी मरम्मत करवाता है। बारिश के चलते मिट्टी धंसने से सड़क बैठ गई है। ठेकेदार ने मरम्मत शुरू कर दी है। आवागमन बाधित नहीं है। जल्द ही एप्रोच सड़क सही करा दी जाएगी।
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मढ़िया घाट का यह पुल उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से करीब 14.97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कराया गया है। परियोजना की कुल लंबाई करीब 500 मीटर है। गोमती नदी के ऊपर मुख्य पुल की लंबाई 120.68 मीटर है। पुल के दोनों ओर करीब 200-200 मीटर पहुंच मार्ग का भी निर्माण कराया गया है। निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू हुआ था।
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मार्च 2026 में सेतु निगम ने पुल का 70 से 75 प्रतिशत काम पूरा होने और सितंबर तक निर्माण पूरा करने की बात कही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में छह महीने में ही एप्रोच सड़क टूटने लगे तो तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के साथ निर्माण गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और बेस की मजबूती की जांच कराने की मांग की है।
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राज्य सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर कैसर अंसारी ने बताया कि पुल की सड़क टूटने की जानकारी मिली है। दो साल तक ठेकेदार ही इसकी मरम्मत करवाता है। बारिश के चलते मिट्टी धंसने से सड़क बैठ गई है। ठेकेदार ने मरम्मत शुरू कर दी है। आवागमन बाधित नहीं है। जल्द ही एप्रोच सड़क सही करा दी जाएगी।