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स्थानांतरण: एक बार फिर खलेगी शिक्षकों की कमी
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लखीमपुर खीरी। जिले के परिषदीय स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में अंतरजनपदीय तबादला होने की खबर मिलने के बाद गृह जनपद जाने वाले शिक्षकों की होड़ लग गई है। सैकड़ों की संख्या में आए हुए आवेदनों को स्वीकृति मिलती है तो एक बार फिर से शिक्षकों का संकट गहराएगा।
जिले में अभी कई विद्यालय शिक्षामित्र और अनुदेशक ही संभालते आए हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस बार भी छह से सात सौ के आसपास शिक्षक गृह जनपदों के लिए रवाना हो जाएंगे, जबकि आने वाले शिक्षकों की संख्या के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। यदि पिछले आंकड़ों पर नजर डाले तो इस बार भी कम ही शिक्षक आएंगे। शिक्षक कम होने की वजह से शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा।
प्राथमिक स्कूल में 30 बच्चों पर होना चाहिए एक शिक्षक
पूरे जिले में 1973 प्राथमिक स्कूल, 406 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। नियमों की बात करें तो प्राथमिक स्कूल में अध्ययनरत हर तीस बच्चे पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए। उच्च प्राथमिक स्कूलों में हर 35 बच्चों पर एक शिक्षक को तैनाती दिए जाने का नियम है। फिलहाल जिले के किसी भी विद्यालय में इन नियमों का पालन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के स्कूलों में सौ सौ बच्चों पर महज एक शिक्षामित्र की तैनाती है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता में कैसे सुधार होगा यह खुद में सोचनीय प्रश्न है।
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जिले से गए थे 1035 शिक्षक, आए थे महज 42
लखीमपुर खीरी। कोरोना काल से पहले हुए अंतरजनपदीय तबादले के दौरान 1035 शिक्षक-शिक्षिकाएं चली गई थीं। जबकि महज 42 शिक्षक शिक्षिकाएं ही आ सकी थीं। तबादला नीति ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दो साल पहले भी तबादले में एक हजार से ज्यादा शिक्षक गृह जनपद रवाना हो गये थे। वहीं आने वाले शिक्षकों की संख्या 42 रह गयी थी।
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जिले में अभी कई विद्यालय शिक्षामित्र और अनुदेशक ही संभालते आए हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस बार भी छह से सात सौ के आसपास शिक्षक गृह जनपदों के लिए रवाना हो जाएंगे, जबकि आने वाले शिक्षकों की संख्या के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। यदि पिछले आंकड़ों पर नजर डाले तो इस बार भी कम ही शिक्षक आएंगे। शिक्षक कम होने की वजह से शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा।
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प्राथमिक स्कूल में 30 बच्चों पर होना चाहिए एक शिक्षक
पूरे जिले में 1973 प्राथमिक स्कूल, 406 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। नियमों की बात करें तो प्राथमिक स्कूल में अध्ययनरत हर तीस बच्चे पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए। उच्च प्राथमिक स्कूलों में हर 35 बच्चों पर एक शिक्षक को तैनाती दिए जाने का नियम है। फिलहाल जिले के किसी भी विद्यालय में इन नियमों का पालन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के स्कूलों में सौ सौ बच्चों पर महज एक शिक्षामित्र की तैनाती है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता में कैसे सुधार होगा यह खुद में सोचनीय प्रश्न है।
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जिले से गए थे 1035 शिक्षक, आए थे महज 42
लखीमपुर खीरी। कोरोना काल से पहले हुए अंतरजनपदीय तबादले के दौरान 1035 शिक्षक-शिक्षिकाएं चली गई थीं। जबकि महज 42 शिक्षक शिक्षिकाएं ही आ सकी थीं। तबादला नीति ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दो साल पहले भी तबादले में एक हजार से ज्यादा शिक्षक गृह जनपद रवाना हो गये थे। वहीं आने वाले शिक्षकों की संख्या 42 रह गयी थी।