{"_id":"60f077d68ebc3eec6e294440","slug":"there-is-no-urea-in-cooperatives-buffer-warehouse-is-also-nil-lakhimpur-news-bly453167598","type":"story","status":"publish","title_hn":"सहकारी समितियों में यूरिया नहीं, बफर गोदाम भी निल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहकारी समितियों में यूरिया नहीं, बफर गोदाम भी निल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूरिया लेने के लिए राजापुर मंडी स्थित इफको सेवा केंद्र पर जुट रही किसानों की भीड़
बारिश के शुरू होते ही किसानों में यूरिया के लिए मच सकती है मारामारी
266.50 रुपये वाली यूरिया निजी दुकानों पर 350 से 370 में बिक रही
लखीमपुर खीरी। जिले में मानसूनी बारिश कभी भी शुरू हो सकती है। ऐसे में किसान यूरिया पाने के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां यूरिया नहीं है। वहीं बफर गोदाम भी खाली पड़े हैं। मजबूरी में किसान राजापुर मंडी स्थित इफको सेवा केंद्र पर लाइन लगा रहे हैं। वहीं निजी दुकानों पर 266.50 रुपये वाली यूरिया की बोरी 350 से 370 रुपये में बिक रही है। आशंका है कि बारिश शुरू होते ही यूरिया के लिए मारामारी शुरू हो जाएगी, जो पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो सकती है।
जनपद में 132 पैक्स समितियों सहित कुल 151 बिक्री केंद्र संचालित हैं, जिन पर खाद के लिए अधिकांश किसानों की निर्भरता है। खरीफ सीजन में मुख्यता धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है। धान की रोपाई जोरों पर हैं। हालांकि 15 दिनों से बारिश न होने के कारण कहीं-कहीं धान की रोपाई पिछड़ गई है। इससे किसानों में यूरिया की अभी डिमांड कम है, क्योंकि 60 से 70 प्रतिशत किसान बारिश से सिंचाई पर निर्भर हैं।
ऐसे हालात में बारिश होने पर धान की फसल में यूरिया डालने के लिए किसानों में यूरिया की डिमांड बढ़ना स्वाभाविक है। समितियों पर यूरिया न होने से किसानों को प्राइवेट दुकानों की शरण लेने की मजबूरी होगी, जहां पर निर्धारित मूल्य से करीब 100 रुपये अधिक देने पड़ेंगे। प्राइवेट दुकानदारों पर शिकंजा कसने में कृषि विभाग पूरी तरह सफल नहीं हो सका है। लिहाजा सहकारी समितियों पर किसानों का मूवमेंट सबसे अधिक रहेगा, जिससे पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। पिछले महीने जून में भी यूरिया वितरण के लिए सहकारी समितियों में पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी। मितौली तहसील मुख्यालय स्थित किसान सेवा सहकारी समिति में दो दिन से यूरिया नहीं है। सचिव शिव विनोद सिंह ने बताया कि 600 बोरी यूरिया के लिए ड्राफ्ट लगा चुके हैं, जहां अधिकारियों ने बताया है कि रैक लगने पर यूरिया मिलेगी।
विज्ञापन
समितियों पर 28 हजार मीट्रिक टन यूरिया वितरित
सहकारी समितियों के माध्यम से खरीफ सीजन में 38101 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किए जाने का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अभी तक 28 हजार मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। पांच रैक यूरिया की डिमांड की जा चुकी है, जिसमें से 60 प्रतिशत यूरिया खीरी को मिलेगी। शेष 40 प्रतिशत यूरिया सीतापुर को मिलेगी।
समिति पर नहीं मिली खाद
14 किलोमीटर दूर गिन्हौना गांव से राजापुर मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर यूरिया लेने आए किसान संदीप कुमार ने बताया कि सैदापुर समिति में यूरिया उपलब्ध नहीं है। आसपास की अन्य समितियों में भी यूरिया नहीं है। धान की रोपाई के बाद यूरिया डालना जरूरी है। इसलिए राजापुर मंडी में किसान सेवा केंद्र पर यूरिया लेने आए हैं।
21 किलोमीटर दूर दाउदपुर गांव से यूरिया लेने के लिए जिला मुख्यालय आए किसान धीरेश कुमार ने बताया कि दाउदपुर समिति में कई दिनों से यूरिया स्टॉक में नहीं है। कब तक आएगी, इसकी भी सही जानकारी समिति के सचिव नहीं दे रहे हैं। इसलिए मजबूरन यूरिया लेने के लिए राजापुर मंडी आना पड़ा।
अभी यूरिया की किल्लत नहीं है। एक जून से आठ जुलाई तक सीतापुर रैक प्वाइंट पर 12 रैक यूरिया आ चुकी है। पांच रैक यूरिया की डिमांड की गई है। एक-दो दिन में एक रैक लगने वाली है। जिन समितियों में यूरिया नहीं है, उनमें रैक लगने पर पहले यूरिया भेजी जाएगी।
- सूर्य नरायण मिश्रा, सहायक निबंधक सहकारिता
विज्ञापन
बारिश के शुरू होते ही किसानों में यूरिया के लिए मच सकती है मारामारी
266.50 रुपये वाली यूरिया निजी दुकानों पर 350 से 370 में बिक रही
लखीमपुर खीरी। जिले में मानसूनी बारिश कभी भी शुरू हो सकती है। ऐसे में किसान यूरिया पाने के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां यूरिया नहीं है। वहीं बफर गोदाम भी खाली पड़े हैं। मजबूरी में किसान राजापुर मंडी स्थित इफको सेवा केंद्र पर लाइन लगा रहे हैं। वहीं निजी दुकानों पर 266.50 रुपये वाली यूरिया की बोरी 350 से 370 रुपये में बिक रही है। आशंका है कि बारिश शुरू होते ही यूरिया के लिए मारामारी शुरू हो जाएगी, जो पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो सकती है।
जनपद में 132 पैक्स समितियों सहित कुल 151 बिक्री केंद्र संचालित हैं, जिन पर खाद के लिए अधिकांश किसानों की निर्भरता है। खरीफ सीजन में मुख्यता धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है। धान की रोपाई जोरों पर हैं। हालांकि 15 दिनों से बारिश न होने के कारण कहीं-कहीं धान की रोपाई पिछड़ गई है। इससे किसानों में यूरिया की अभी डिमांड कम है, क्योंकि 60 से 70 प्रतिशत किसान बारिश से सिंचाई पर निर्भर हैं।
विज्ञापन
ऐसे हालात में बारिश होने पर धान की फसल में यूरिया डालने के लिए किसानों में यूरिया की डिमांड बढ़ना स्वाभाविक है। समितियों पर यूरिया न होने से किसानों को प्राइवेट दुकानों की शरण लेने की मजबूरी होगी, जहां पर निर्धारित मूल्य से करीब 100 रुपये अधिक देने पड़ेंगे। प्राइवेट दुकानदारों पर शिकंजा कसने में कृषि विभाग पूरी तरह सफल नहीं हो सका है। लिहाजा सहकारी समितियों पर किसानों का मूवमेंट सबसे अधिक रहेगा, जिससे पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। पिछले महीने जून में भी यूरिया वितरण के लिए सहकारी समितियों में पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी। मितौली तहसील मुख्यालय स्थित किसान सेवा सहकारी समिति में दो दिन से यूरिया नहीं है। सचिव शिव विनोद सिंह ने बताया कि 600 बोरी यूरिया के लिए ड्राफ्ट लगा चुके हैं, जहां अधिकारियों ने बताया है कि रैक लगने पर यूरिया मिलेगी।
विज्ञापन
समितियों पर 28 हजार मीट्रिक टन यूरिया वितरित
सहकारी समितियों के माध्यम से खरीफ सीजन में 38101 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किए जाने का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अभी तक 28 हजार मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। पांच रैक यूरिया की डिमांड की जा चुकी है, जिसमें से 60 प्रतिशत यूरिया खीरी को मिलेगी। शेष 40 प्रतिशत यूरिया सीतापुर को मिलेगी।
समिति पर नहीं मिली खाद
14 किलोमीटर दूर गिन्हौना गांव से राजापुर मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर यूरिया लेने आए किसान संदीप कुमार ने बताया कि सैदापुर समिति में यूरिया उपलब्ध नहीं है। आसपास की अन्य समितियों में भी यूरिया नहीं है। धान की रोपाई के बाद यूरिया डालना जरूरी है। इसलिए राजापुर मंडी में किसान सेवा केंद्र पर यूरिया लेने आए हैं।
21 किलोमीटर दूर दाउदपुर गांव से यूरिया लेने के लिए जिला मुख्यालय आए किसान धीरेश कुमार ने बताया कि दाउदपुर समिति में कई दिनों से यूरिया स्टॉक में नहीं है। कब तक आएगी, इसकी भी सही जानकारी समिति के सचिव नहीं दे रहे हैं। इसलिए मजबूरन यूरिया लेने के लिए राजापुर मंडी आना पड़ा।
अभी यूरिया की किल्लत नहीं है। एक जून से आठ जुलाई तक सीतापुर रैक प्वाइंट पर 12 रैक यूरिया आ चुकी है। पांच रैक यूरिया की डिमांड की गई है। एक-दो दिन में एक रैक लगने वाली है। जिन समितियों में यूरिया नहीं है, उनमें रैक लगने पर पहले यूरिया भेजी जाएगी।
- सूर्य नरायण मिश्रा, सहायक निबंधक सहकारिता