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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में फिर आबाद होगी जंगली जल भैंसों की दुनिया
Sat, 04 Jul 2026 11:25 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:25 PM IST
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असम के जंगल में विचरण करती जंगली जल भैंस। स्रोत : वन विभाग
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में जंगली जल भैंसों की उजड़ी दुनिया फिर जल्द ही आबाद होगी। टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से पुनर्वासन के लिए बनाई गई इस योजना को उप्र राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड की बैठक में मंजूरी मिल गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वन सचिव वी हेकाली झिमोमी समेत वरिष्ठ वनाधिकारियों ने प्रस्ताव पर मुहर लगाई।
तराई के जंगलों में 130 साल पहले कभी गैंडों की तरह जंगली जल भैंसों का बसेरा हुआ करता था। यह कब और कैसे विलुप्त हुईं, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन और दुधवा के उपनिदेशक जगदीश आर की पहल पर पुनर्वासन की संभावनाओं को तलाशने की योजना पर शुरू काम हुआ।
बीते अप्रैल में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. बिवास पांडव और डॉ. सम्राट मंडल ने दुधवा पहुंचकर जल भैंसों के लिए जल स्रोत, भोजन, सुरक्षा और अन्य पहलुओं का अध्ययन किया था।
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अध्ययन में पाया गया कि दुधवा में इनके लिए अनुकूल सुरक्षित प्राकृतवास और पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध है। इसमें जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन के लिए दक्षिण सोनारीपुर रेंज सबसे अनुकूल प्राकृतवास पाया गया।
इस योजना के अमल में आने के बाद दुधवा के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ जाएगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वन सचिव वी हेकाली झिमोमी समेत वरिष्ठ वनाधिकारियों ने प्रस्ताव पर मुहर लगाई।
तराई के जंगलों में 130 साल पहले कभी गैंडों की तरह जंगली जल भैंसों का बसेरा हुआ करता था। यह कब और कैसे विलुप्त हुईं, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन और दुधवा के उपनिदेशक जगदीश आर की पहल पर पुनर्वासन की संभावनाओं को तलाशने की योजना पर शुरू काम हुआ।
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बीते अप्रैल में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. बिवास पांडव और डॉ. सम्राट मंडल ने दुधवा पहुंचकर जल भैंसों के लिए जल स्रोत, भोजन, सुरक्षा और अन्य पहलुओं का अध्ययन किया था।
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अध्ययन में पाया गया कि दुधवा में इनके लिए अनुकूल सुरक्षित प्राकृतवास और पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध है। इसमें जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन के लिए दक्षिण सोनारीपुर रेंज सबसे अनुकूल प्राकृतवास पाया गया।
इस योजना के अमल में आने के बाद दुधवा के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ जाएगा।

असम के जंगल में विचरण करती जंगली जल भैंस। स्रोत : वन विभाग