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Lakhimpur Kheri News: शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने के लिए पगडंडी ही सहारा
Sun, 14 Dec 2025 12:24 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 14 Dec 2025 12:24 AM IST
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प्राथमिक विद्यालय में खेतों से होकर पगडंडी पर पढ़ने जाते हुए बच्चे, अध्यापक और रसोइया। संवाद
भीखमपुर। कस्बे के प्राथमिक विद्यालय में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। विद्यार्थियों को भविष्य गढ़ने के लिए पगडंडी से दूसरे के खेतों में होकर गंदगी से गुजरना पड़ता है। इस कारण विद्यार्थियों के साथ शिक्षक और अभिभावक भी परेशान हैं। जिम्मेदार समाधान खोजने में नाकाम हैं।
कई वर्ष पहले कस्बे के पूरब नहर के किनारे सुनसान जगह पर प्राथमिक विद्यालय बनवा दिया गया था। इसके बाद आज तक स्कूल तक लगभग 500 मीटर के बीच में कोई रास्ता नहीं है। खेतों से निकलकर ही स्कूल पहुंचा जा सकता है। इधर, किसानों ने अपनी फसल की रखवाली के लिए कटीले तार खेतों के चारों ओर लगा रखे हैं। पगडंडी पर गंदगी और झाड़ियां हैं। इस पर हर समय सांप समेत अन्य जहरीले जीव-जंतु घूमते नजर आ जाते हैं।
कई अभिभावक अपने विद्यार्थियों को सरकारी स्कूल भेजना चाहते हैं, लेकिन रास्ता नहीं होने से निजी विद्यालयों में महंगी शिक्षा दिलाने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, क्योंकि चारों तरफ पानी और कीचड़ भरा रहता है।
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प्रधानाध्यापक जय कुमार का कहना है कि सभी अभिभावकों को इस बारे में बैठक कर सोचना होगा, तभी कोई हल निकल सकता है। प्रधान के पति मनोज कुमार ने बताया कि विद्यालय जाने के लिए कोई चकमार्ग खसरा-खतौनी में दर्ज नहीं है। हम रास्ता बनवाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन हमसे पूर्व के जनप्रतिनिधियों को इसके बारे में सोचना चाहिए था।
अभिभावक सौरभ, अवनीश कुमार, पंकज, रामगोपाल, विश्वप्रकाश और रामपाल समेत कई लोगों ने बच्चों का भविष्य ध्यान में रखते हुए रास्ता बनवाने की मांग की है।
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कई वर्ष पहले कस्बे के पूरब नहर के किनारे सुनसान जगह पर प्राथमिक विद्यालय बनवा दिया गया था। इसके बाद आज तक स्कूल तक लगभग 500 मीटर के बीच में कोई रास्ता नहीं है। खेतों से निकलकर ही स्कूल पहुंचा जा सकता है। इधर, किसानों ने अपनी फसल की रखवाली के लिए कटीले तार खेतों के चारों ओर लगा रखे हैं। पगडंडी पर गंदगी और झाड़ियां हैं। इस पर हर समय सांप समेत अन्य जहरीले जीव-जंतु घूमते नजर आ जाते हैं।
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कई अभिभावक अपने विद्यार्थियों को सरकारी स्कूल भेजना चाहते हैं, लेकिन रास्ता नहीं होने से निजी विद्यालयों में महंगी शिक्षा दिलाने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, क्योंकि चारों तरफ पानी और कीचड़ भरा रहता है।
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प्रधानाध्यापक जय कुमार का कहना है कि सभी अभिभावकों को इस बारे में बैठक कर सोचना होगा, तभी कोई हल निकल सकता है। प्रधान के पति मनोज कुमार ने बताया कि विद्यालय जाने के लिए कोई चकमार्ग खसरा-खतौनी में दर्ज नहीं है। हम रास्ता बनवाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन हमसे पूर्व के जनप्रतिनिधियों को इसके बारे में सोचना चाहिए था।
अभिभावक सौरभ, अवनीश कुमार, पंकज, रामगोपाल, विश्वप्रकाश और रामपाल समेत कई लोगों ने बच्चों का भविष्य ध्यान में रखते हुए रास्ता बनवाने की मांग की है।