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औसत वर्षा फसलों के लिए संजीवनी, धान के नुकसान का होगा डैमेज कंट्रोल
सार
इस वर्ष कृषि व फसल उत्पादन के लिए जरूरी औसत वर्षा से बारिश कम हुई है, जिससे धान के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत तक नुकसान की संभावना कृषि विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही थी। किसानों का कहना है कि धान की फसल में फूल आने के समय हुई इस बारिश का काफी अनुकूल असर होगा। लगातार कई घंटों तक बारिश होने के चलते शहर की कई सड़कें पानी से सराबोर हो गई, जिससे लोगों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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खीरी में गुरुवार को दिन भर होती रही रिमझिम बरसात।
विस्तार
मौसम विभाग का अनुमान, अभी दो दिनों तक और होगी बारिश
गर्मी का असर होगा कम, सुबह और शाम को हल्की ठंडक रहेगी
लखीमपुर खीरी। बृहस्पतिवार की सुबह से बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसके बाद शाम तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। बरसात के आखिरी दिनों में हुई बारिश से फसलों को संजीवनी मिली है। सूखे के हालात से प्रभावित हुई धान की फसल को होने वाले नुकसान में यह बारिश डैमेज कंट्रोल का काम करेगी। वहीं कई दिनों तक होने वाली इस बारिश से गर्मी का असर कम होगा और सुबह-शाम हल्की ठंडक असर दिखाएगी।
इस वर्ष कृषि व फसल उत्पादन के लिए जरूरी औसत वर्षा से बारिश कम हुई है, जिससे धान के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत तक नुकसान की संभावना कृषि विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही थी। मुख्य फसल धान की इस वर्ष 1.78 लाख हेक्टेअर एरिया में बुवाई की गई है। अब सक्रिय हुए मानसून से हो रही बारिश से धान उत्पादन में संभावित नुकसान का डैमेज कंट्रोल हो सकेगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में धान की फसल में बालियां निकल रहीं हैं या फिर कुछ स्थानों पर निकल चुकी हैं। इससे धान की सिंचाई करने की आवश्यकता भी थी। बारिश होने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए श्रम व पैसे की बचत हुई है। दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए भी यह बारिश अच्छी मानी जा रही है। हालांकि तेज हवा चलने पर गन्ने की फसल को नुकसान हो सकता है। हालांकि पहले दिन ज्यादा तेज हवा नहीं चली, जिससे किसान राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं जिन किसानों ने हाल में तोरिया (लाही) की बोवाई की है या कर रहे हैं, उनके लिए यह बारिश नुकसानदेह हो सकती है, क्योंकि खेतों में पानी भरने से बीजों का जमाव प्रभावित होगा। इससे फसल कमजोर रह सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि आगामी तीन-चार दिनों तक बादल छाए रह सकते हैं और शुक्रवार व शनिवार को अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।
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धान समेत सभी फसलों के लिए बारिश फायदेमंद है। फसलों में सिंचाई की आवश्यकता भी थी। इससे किसानों को भी फायदा हुआ है। मानसून सत्र के दौरान औसत से कम बारिश होने के कारण धान के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान में कमी आएगी और डैमेज कंट्रोल होगा।
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
19 अगस्त के बाद अब अच्छी बारिश हुई है। फसलों के लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद है। तेज हवा न चलती तो और फायदा होता। तेज हवा चलने के कारण कई स्थानों पर तिल की फसल गिरी है। अधिकांश खेतों में धान की बालियां निकल आई हैं। इससे बड़े लॉग वाली धान की फसल तेज हवा से गिर सकती है। बारिश से हवा में नमी की कमी दूर होगी।
- डॉ. पीके बिसेन, कृषि वैज्ञानिक
रिमझिम बारिश से फसल लहराई, सड़कों पर आफत छाई
बांकेगंज। कस्बा समेत क्षेत्र में बुधवार रात से शुरू हुई बारिश से एक ओर जहां फसलें लहरा उठी हैं, वहीं सड़कों पर गड्ढों में जलभराव से राहगीरों के लिए आफत बन आई है। गोला-बांकेगंज और कुकरा रोड पर जलभराव हो गया। गड्ढों में कीचड़ और पानी के चलते सड़क नजर नहीं आ रही, जिससे लोगों को आवागमन में मुसीबतें उठानी पड़ी। कमोबेश यही हाल अन्य सड़कों का भी हुआ। उधर, इस बारिश से सूखे की मार से बेहाल किसानों के चेहरे खिल उठे। उनकी मुरझा रही धान, गन्ने और केले की फसल को संजीवनी मिल गई। रिमझिम बारिश से खेतों में जलभराव तो नहीं हुआ, लेकिन मिट्टी तरबतर हो गई, जिससे फसलों में हरियाली आ गई।
किसानों का कहना है कि धान की फसल में फूल आने के समय हुई इस बारिश का काफी अनुकूल असर होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे तमाम रोग दूर हो जाएंगे और फूल से दाने बनने की प्रक्रिया तेज होगी। किसानों को अब तक खेत में नमी बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल, पंपिंग सेट आदि का सहारा लेना पड़ रहा था, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ रही थी।
तेज हवा से गिरी गन्ने की फसल, बारिश से सड़क जलमग्न
पलियाकलां। सुबह से बारिश का सिलसिला शुरू होकर पूरे दिन चलता रहा। रुक-रुककर होने वाली बारिश के साथ तेज हवाओं के चलते फसलों को भी नुकसान हुआ है। लगातार कई घंटों तक बारिश होने के चलते शहर की कई सड़कें पानी से सराबोर हो गई, जिससे लोगों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बारिश के चलते बाजारों में पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा। तहसील में भी बहुत कम संख्या में फरियादी और वकील दिखाई दिए। तहसील परिसर में पानी भर गया, जबकि इकरामनगर समेत अन्य निचले मोहल्लों में जलभराव हो गया। तेज हवाओं से गन्ना, केला व धान की फसल को नुकसान हुआ है। संवाद
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गर्मी का असर होगा कम, सुबह और शाम को हल्की ठंडक रहेगी
लखीमपुर खीरी। बृहस्पतिवार की सुबह से बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसके बाद शाम तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। बरसात के आखिरी दिनों में हुई बारिश से फसलों को संजीवनी मिली है। सूखे के हालात से प्रभावित हुई धान की फसल को होने वाले नुकसान में यह बारिश डैमेज कंट्रोल का काम करेगी। वहीं कई दिनों तक होने वाली इस बारिश से गर्मी का असर कम होगा और सुबह-शाम हल्की ठंडक असर दिखाएगी।
इस वर्ष कृषि व फसल उत्पादन के लिए जरूरी औसत वर्षा से बारिश कम हुई है, जिससे धान के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत तक नुकसान की संभावना कृषि विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही थी। मुख्य फसल धान की इस वर्ष 1.78 लाख हेक्टेअर एरिया में बुवाई की गई है। अब सक्रिय हुए मानसून से हो रही बारिश से धान उत्पादन में संभावित नुकसान का डैमेज कंट्रोल हो सकेगा।
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में धान की फसल में बालियां निकल रहीं हैं या फिर कुछ स्थानों पर निकल चुकी हैं। इससे धान की सिंचाई करने की आवश्यकता भी थी। बारिश होने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए श्रम व पैसे की बचत हुई है। दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए भी यह बारिश अच्छी मानी जा रही है। हालांकि तेज हवा चलने पर गन्ने की फसल को नुकसान हो सकता है। हालांकि पहले दिन ज्यादा तेज हवा नहीं चली, जिससे किसान राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं जिन किसानों ने हाल में तोरिया (लाही) की बोवाई की है या कर रहे हैं, उनके लिए यह बारिश नुकसानदेह हो सकती है, क्योंकि खेतों में पानी भरने से बीजों का जमाव प्रभावित होगा। इससे फसल कमजोर रह सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि आगामी तीन-चार दिनों तक बादल छाए रह सकते हैं और शुक्रवार व शनिवार को अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।
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धान समेत सभी फसलों के लिए बारिश फायदेमंद है। फसलों में सिंचाई की आवश्यकता भी थी। इससे किसानों को भी फायदा हुआ है। मानसून सत्र के दौरान औसत से कम बारिश होने के कारण धान के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान में कमी आएगी और डैमेज कंट्रोल होगा।
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
19 अगस्त के बाद अब अच्छी बारिश हुई है। फसलों के लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद है। तेज हवा न चलती तो और फायदा होता। तेज हवा चलने के कारण कई स्थानों पर तिल की फसल गिरी है। अधिकांश खेतों में धान की बालियां निकल आई हैं। इससे बड़े लॉग वाली धान की फसल तेज हवा से गिर सकती है। बारिश से हवा में नमी की कमी दूर होगी।
- डॉ. पीके बिसेन, कृषि वैज्ञानिक
रिमझिम बारिश से फसल लहराई, सड़कों पर आफत छाई
बांकेगंज। कस्बा समेत क्षेत्र में बुधवार रात से शुरू हुई बारिश से एक ओर जहां फसलें लहरा उठी हैं, वहीं सड़कों पर गड्ढों में जलभराव से राहगीरों के लिए आफत बन आई है। गोला-बांकेगंज और कुकरा रोड पर जलभराव हो गया। गड्ढों में कीचड़ और पानी के चलते सड़क नजर नहीं आ रही, जिससे लोगों को आवागमन में मुसीबतें उठानी पड़ी। कमोबेश यही हाल अन्य सड़कों का भी हुआ। उधर, इस बारिश से सूखे की मार से बेहाल किसानों के चेहरे खिल उठे। उनकी मुरझा रही धान, गन्ने और केले की फसल को संजीवनी मिल गई। रिमझिम बारिश से खेतों में जलभराव तो नहीं हुआ, लेकिन मिट्टी तरबतर हो गई, जिससे फसलों में हरियाली आ गई।
किसानों का कहना है कि धान की फसल में फूल आने के समय हुई इस बारिश का काफी अनुकूल असर होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे तमाम रोग दूर हो जाएंगे और फूल से दाने बनने की प्रक्रिया तेज होगी। किसानों को अब तक खेत में नमी बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल, पंपिंग सेट आदि का सहारा लेना पड़ रहा था, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ रही थी।
तेज हवा से गिरी गन्ने की फसल, बारिश से सड़क जलमग्न
पलियाकलां। सुबह से बारिश का सिलसिला शुरू होकर पूरे दिन चलता रहा। रुक-रुककर होने वाली बारिश के साथ तेज हवाओं के चलते फसलों को भी नुकसान हुआ है। लगातार कई घंटों तक बारिश होने के चलते शहर की कई सड़कें पानी से सराबोर हो गई, जिससे लोगों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बारिश के चलते बाजारों में पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा। तहसील में भी बहुत कम संख्या में फरियादी और वकील दिखाई दिए। तहसील परिसर में पानी भर गया, जबकि इकरामनगर समेत अन्य निचले मोहल्लों में जलभराव हो गया। तेज हवाओं से गन्ना, केला व धान की फसल को नुकसान हुआ है। संवाद