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Lakhimpur Kheri News: एक माह पहले नदी में कटा था घर, अब तक नहीं मिला ठिकाना
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खाम्भी से श्रीनगर तटबंध पर नाव से जाते हुए बाढ़ पीड़ित
लखीमपुर खीरी/ महेवागंज। मंगलवार को औचक निरीक्षण पर पहुंची कमिश्नर रौशन जैकब ने बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा कर हकीकत जानी। इस दौरान उन्होंने कटान पीड़ितों की भी परेशानी सुनी।
कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब, डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी गणेश प्रसाद साहा के साथ तहसील सदर के ब्लॉक फूलबेहड़ के मिलपुरवा बंधे पर पहुंचीं, जहां उन्होंने मौजूद ग्रामीणों से बातचीत की। निरीक्षण के दौरान अहिराना के 97, नरहर-तीन, गूम में दो घर कट जाने की सूचना मिली। कमिश्नर ने सभी 22 विस्थापित परिवारों को जमीन देकर बसाए जाने के निर्देश दिए। इस दौरान कमिश्नर ने जब तटबंध किनारे विस्थापित जिंदगी जी रहीं लक्ष्मी देवी, नंदा देवी, फूलमती और राधिका देवी से रहने के लिए जगह के बारे में पूछा तो इन महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। बताया कि एक महीना पहले नदी में घर कट गया। अधिकारियों ने कुछ लोगों को मौलापुरवा में बसने के लिए जगह दी, लेकिन अधिकतर को जमीन नहीं मिली।
महिलाओं ने कहा कि जमीन न मिलने से तटबंध किनारे दूसरे की जगह में झोंपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहे हैं। खेत कट जाने से खाने के भी लाले हैं। इस पर कमिश्नर ने एसडीएम को हर हाल में वंचित परिवारों को जल्द बसाने के निर्देश दिए। उधर, एसडीएम श्रद्धा सिंह ने बताया कि 60 लोगों को बसाया गया है। शेष लोगो के लिए भूमि तलाश की जा रही है।
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कमिश्नर ने कहा कि गांव में छिड़काव कराए व स्वास्थ्य टीमें परीक्षण करते हुए दवाएं वितरित करें। एसडीएम को निर्देश दिए कि भविष्य में बाढ़ की संभावनाओं के दृष्टिगत सभी मुकम्मल तैयारियां पूरी करें। आयुक्त ने डीएम, एसपी के साथ ग्राम श्रीनगर में विस्थापित परिवारों को बसाए गए स्थल पहुंची, जहां स्थलीय निरीक्षण कर विस्थापित परिवारों से बात की। इस दौरान ईई बाढ़ खंड राजीव कुमार, ईई खंड शारदानगर जेपी सिंह, बीडीओ फूलबेहड़ पीयूष सिंह, सीओ गोला प्रवीण यादव आदि मौजूद रहे।
दर्जनों गांव में बाढ़ के हालात, निजी नाव बनी सहारा
महेवागंज/ सुंदरवल। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से फूलबेहड़ क्षेत्र में तटबंध के अंदर बसे करीब 24 गांवों में बाढ़ के हालात हैं। मिलपुरवा-गूम मार्ग पर एक फुट पानी चल रहा है। खांभी से श्रीनगर मार्ग के रपटा पुल पर दो फीट तेज धार में पानी बह रहा है। खेत में खड़ी फ़सलें और कई संपर्क मार्ग पानी से डूब गए हैं। इस सीजन भी बाढ़ के पानी ने एक मासूम की बलि ले ली।
बनबसा बैराज से छोड़े गये पानी से शारदा उफना गई है। निचले इलाके खगई पुरवा, खाम्भी, बड़ागांव, बसहा भूड़, खमरिया, लगड़ीपुर, कुचिल्हा, गूम, टॉपरपुरवा, बाबापुरवा, बहालीपुरवा, मेहंदी सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसे हालात हैं। खगईपुरवा गांव में पानी भरने से आवागमन बंद हो गया है। ग्रामीण छतों या तटबंध पर रहने लगे हैं। गांव में पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। संवाद
कमिश्नर ने नाव की संख्या बढ़ाने के दिए निर्देश, आपातरोधी कटाव निरोधक कार्य देखे
बक्शीपुरवा गांव के पास मार्ग कटने से भुलभुलिया और टॉपरपुरवा सहित कई गांवों का आवागमन बाधित हो गया है। खगईपुरवा में आवागमन ठप हो गया है। नाव ही आवागमन का साधन बचा है। नावें भी पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ लोगों की निजी नाव है। वहीं सहारा बनी है। इस पर मंडलायुक्त ने डीएम से मौके पर नाव बढ़ाने के लिए कहा। इसके बाद कमिश्नर, डीएम, एसपी, सीडीओ के साथ तहसील गोला, ब्लॉक बिजुआ के ग्राम बझेड़ा पहुंचीं। उन्होंने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा कराए आपातरोधी कार्य का निरीक्षण किया। कमिश्नर को ईई बाढ़खंड राजीव ने बताया कि बझेड़ा में फ्लड फाइटिंग, इरोजन वर्क, कटावरोधी कार्य करते हुए गांव सुरक्षित किया। वर्तमान में ग्राम समूह की आबादी कटान से पूर्ण रूप से सुरक्षित है। संवाद
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कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब, डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी गणेश प्रसाद साहा के साथ तहसील सदर के ब्लॉक फूलबेहड़ के मिलपुरवा बंधे पर पहुंचीं, जहां उन्होंने मौजूद ग्रामीणों से बातचीत की। निरीक्षण के दौरान अहिराना के 97, नरहर-तीन, गूम में दो घर कट जाने की सूचना मिली। कमिश्नर ने सभी 22 विस्थापित परिवारों को जमीन देकर बसाए जाने के निर्देश दिए। इस दौरान कमिश्नर ने जब तटबंध किनारे विस्थापित जिंदगी जी रहीं लक्ष्मी देवी, नंदा देवी, फूलमती और राधिका देवी से रहने के लिए जगह के बारे में पूछा तो इन महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। बताया कि एक महीना पहले नदी में घर कट गया। अधिकारियों ने कुछ लोगों को मौलापुरवा में बसने के लिए जगह दी, लेकिन अधिकतर को जमीन नहीं मिली।
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महिलाओं ने कहा कि जमीन न मिलने से तटबंध किनारे दूसरे की जगह में झोंपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहे हैं। खेत कट जाने से खाने के भी लाले हैं। इस पर कमिश्नर ने एसडीएम को हर हाल में वंचित परिवारों को जल्द बसाने के निर्देश दिए। उधर, एसडीएम श्रद्धा सिंह ने बताया कि 60 लोगों को बसाया गया है। शेष लोगो के लिए भूमि तलाश की जा रही है।
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कमिश्नर ने कहा कि गांव में छिड़काव कराए व स्वास्थ्य टीमें परीक्षण करते हुए दवाएं वितरित करें। एसडीएम को निर्देश दिए कि भविष्य में बाढ़ की संभावनाओं के दृष्टिगत सभी मुकम्मल तैयारियां पूरी करें। आयुक्त ने डीएम, एसपी के साथ ग्राम श्रीनगर में विस्थापित परिवारों को बसाए गए स्थल पहुंची, जहां स्थलीय निरीक्षण कर विस्थापित परिवारों से बात की। इस दौरान ईई बाढ़ खंड राजीव कुमार, ईई खंड शारदानगर जेपी सिंह, बीडीओ फूलबेहड़ पीयूष सिंह, सीओ गोला प्रवीण यादव आदि मौजूद रहे।
दर्जनों गांव में बाढ़ के हालात, निजी नाव बनी सहारा
महेवागंज/ सुंदरवल। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से फूलबेहड़ क्षेत्र में तटबंध के अंदर बसे करीब 24 गांवों में बाढ़ के हालात हैं। मिलपुरवा-गूम मार्ग पर एक फुट पानी चल रहा है। खांभी से श्रीनगर मार्ग के रपटा पुल पर दो फीट तेज धार में पानी बह रहा है। खेत में खड़ी फ़सलें और कई संपर्क मार्ग पानी से डूब गए हैं। इस सीजन भी बाढ़ के पानी ने एक मासूम की बलि ले ली।
बनबसा बैराज से छोड़े गये पानी से शारदा उफना गई है। निचले इलाके खगई पुरवा, खाम्भी, बड़ागांव, बसहा भूड़, खमरिया, लगड़ीपुर, कुचिल्हा, गूम, टॉपरपुरवा, बाबापुरवा, बहालीपुरवा, मेहंदी सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसे हालात हैं। खगईपुरवा गांव में पानी भरने से आवागमन बंद हो गया है। ग्रामीण छतों या तटबंध पर रहने लगे हैं। गांव में पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। संवाद
कमिश्नर ने नाव की संख्या बढ़ाने के दिए निर्देश, आपातरोधी कटाव निरोधक कार्य देखे
बक्शीपुरवा गांव के पास मार्ग कटने से भुलभुलिया और टॉपरपुरवा सहित कई गांवों का आवागमन बाधित हो गया है। खगईपुरवा में आवागमन ठप हो गया है। नाव ही आवागमन का साधन बचा है। नावें भी पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ लोगों की निजी नाव है। वहीं सहारा बनी है। इस पर मंडलायुक्त ने डीएम से मौके पर नाव बढ़ाने के लिए कहा। इसके बाद कमिश्नर, डीएम, एसपी, सीडीओ के साथ तहसील गोला, ब्लॉक बिजुआ के ग्राम बझेड़ा पहुंचीं। उन्होंने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा कराए आपातरोधी कार्य का निरीक्षण किया। कमिश्नर को ईई बाढ़खंड राजीव ने बताया कि बझेड़ा में फ्लड फाइटिंग, इरोजन वर्क, कटावरोधी कार्य करते हुए गांव सुरक्षित किया। वर्तमान में ग्राम समूह की आबादी कटान से पूर्ण रूप से सुरक्षित है। संवाद

खाम्भी से श्रीनगर तटबंध पर नाव से जाते हुए बाढ़ पीड़ित