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Lakhimpur Kheri News: दिल्ली, हिसार व हल्द्वानी तक जिले में पैदा होने वाले केले की धाक

Tue, 09 Sep 2025 12:02 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Tue, 09 Sep 2025 12:02 AM IST
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The fame of bananas grown in the district reaches Delhi, Hisar and Haldwani
केला की फसल देखने पहुंचे डीडी कृ​षि गिरीश चंद्र। स्रोत : विभाग
लखीमपुर खीरी। किसानों के लिए सबसे अच्छी केला की खेती साबित हो रही है। इसकी खेती से दो गुना फायदा है। इस वजह से किसान धीरे-धीरे इसकी खेती से जुड़ रहे है। जिले में पैदा होने वाला केला जिले में ही नहीं बल्कि दिल्ली, हिसार, हल्द्वानी तक अपनी छाप छोड़े हुए है।
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जिले में सबसे पहले केला की खेती करने वाले मोहम्मदी के रोरवा के किसान नत्थू लाल शुक्ला हैं। नत्थू अपने साथी स्व. खेमकरन के साथ वर्ष 2002 में गुजरात से 1000 पौधे लाए थे। दोनों ने 500-500 पौधे अपने-अपने खेतों लगाए थे। फायदा होने पर नत्थू 23 सालों खेती करते आ रहे है। आज तीन एकड़ में खेती करते हैं। इधर, केले में अच्छा मुनाफा देख सैकड़ों किसान इससे जुड़ चुके हैं।
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जिले का रकबा भी चार हजार हेक्टेयर तक बढ़ गया। मोहम्मदी के अलावा निघासन, धौरहरा, रमियाबेहड़, पलिया में खेती काफी बढ़ी है। 13 माह में होने वाली केला की पौध जुलाई लगती है, जो अगले साल अक्टूबर तक तैयार हो जाती है। इधर, डीडी कृषि गिरीश चंद्र केले की फसल को देखने के लिए नत्थूलाल के गांव पहुंचे। डीडी कृषि ने अन्य किसानों से अपील कि केला की खेती से अच्छा फायदा उठाया जा सकता है।
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प्रति एकड़ दो से ढाई लाख का सीधा फायदा
नत्थू लाल ने बताया कि एक एकड़ में 1250 केला के पौधे लगते हैं। एक पौध में औसतन 30 किलो फल होता है। एक एकड़ में लगभग 50 पौधे खराब हो जाते हैं। करीब 1200 पौधे से 36,000 किलो फसल होती है। इन दिनों एक हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक एकड़ में 3.36 लाख रुपये रिटर्न आता है। प्रति एकड़ 1.25 लाख रुपये की लागत घटाने पर सीधा 2.25 लाख का लाभ है। पिछले वर्षों में केला का रेट 1500 से दो हजार रुपये तक था, तब चार चार लाख रुपये तक फायदा उठा चुके हैं। नत्थू लाल ड्रैगन फ्रूट, तेजपत्ता, गन्ना, धान, गेहूं आदि फसलों की खेती भी करते हैं। शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद अब पूरी तरह खेती से जुड़ चुके हैं।

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सरकारी मदद मिले तो और हो फायदा
किसान नत्थू लाल ने बताया कि अभी कृषि विभाग से कोई भी मदद नहीं मिली। अगर कोई सरकारी मदद मिल जाए तो और अच्छा फायदा हो सकता है। नत्थू लाल ने यह भी बताया कि इन दिनों केला में फफूंदी रोग तेजी से फैल रहा, जिसे कभी-कभी नुकसान भी होता है।
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