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मजहब से बड़ा राखी का बंधन, रूपरानी को नाज है अपने मुस्लिम भाई पर
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रूपरानी।
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज। भाई-बहन के रिश्ते में जाति, धर्म और मजहब मायने नहीं रखता। बांकेगंज कस्बे से सटे कुकरा गांव निवासी जकीउल्ला बरकाती अपनी मुंहबोली बहन पसियाना मोहल्ला निवासी रूपरानी से पिछले 10 सालों से राखी बंधवाते आ रहे हैं। रक्षाबंधन हो या भइया दूज दोनों ही मौकों पर जब तक रूपरानी अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर या माथे पर मंगल तिलक नहीं लगा देतीं, तब तक अन्न का दाना मुंह में नहीं डालतीं। दोनों एक दूसरे को सगे भाई-बहन से बढ़कर प्यार और सम्मान करते हैं।
जकीउल्ला भी चाहे जहां हों लेकिन रक्षाबंधन और भइया दूज के दिन अपनी मुंहबोली बहन के पास पहुंच ही जाते हैं। यही नहीं वह उपहार में गाय, तुलसी के पौधे, सुहाग का सामान, कपड़े आदि देते हैं।
रूपरानी कहती हैं कि भाई जकीउल्ला बरकाती हर सुख-दुख में साथ निभाते हैं। बरकाती जिस तरह फर्ज निभा रहे हैं शायद मेरा सगा भाई भी उस तरह से फर्ज नहीं निभा पाता।
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जकीउल्ला बरकाती कहते हैं कि रूपरानी उनकी मुंहबोली बहन हैं। उनके रहते उस पर कोई मुसीबत नहीं आ सकती। उनका कहना है कि रूपरानी के हमारे घर आने पर पत्नी उसका स्वागत सत्कार अपनी सगी ननद की तरह करती हैं। बच्चे भी रूपरानी को अपनी सगी बुआ की तरह लाड़ प्यार करते हैं। संवाद
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जकीउल्ला भी चाहे जहां हों लेकिन रक्षाबंधन और भइया दूज के दिन अपनी मुंहबोली बहन के पास पहुंच ही जाते हैं। यही नहीं वह उपहार में गाय, तुलसी के पौधे, सुहाग का सामान, कपड़े आदि देते हैं।
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रूपरानी कहती हैं कि भाई जकीउल्ला बरकाती हर सुख-दुख में साथ निभाते हैं। बरकाती जिस तरह फर्ज निभा रहे हैं शायद मेरा सगा भाई भी उस तरह से फर्ज नहीं निभा पाता।
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जकीउल्ला बरकाती कहते हैं कि रूपरानी उनकी मुंहबोली बहन हैं। उनके रहते उस पर कोई मुसीबत नहीं आ सकती। उनका कहना है कि रूपरानी के हमारे घर आने पर पत्नी उसका स्वागत सत्कार अपनी सगी ननद की तरह करती हैं। बच्चे भी रूपरानी को अपनी सगी बुआ की तरह लाड़ प्यार करते हैं। संवाद

जकीउल्ला बरकाती।- फोटो : LAKHIMPUR