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जिला अस्पताल में सांस के मरीजों की संख्या घटी

Fri, 14 May 2021 12:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 12:12 AM IST
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Number of respiratory patients decreased in district hospital
चंद दिन पहले रोजाना 100 से 125 तक आते थे मरीज
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अब बमुश्किल 15 से 20 इमरजेंसी में पहुंच रहे मरीज
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में सांस के मरीजों की संख्या में अब कमी आई है, जिसकी गवाही जिला अस्पताल की इमरजेंसी ओपीडी एवं वार्ड दे रहे हैं। चंद दिन पहले जिस इमरजेंसी में पैर रखने की जगह नहीं होती थी आज वहां सन्नाटा है। अब न तो ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर मारामारी है और न ही वार्डों में बेड पाने के लिए हायतौबा मची है।
15 अप्रैल के बाद जिले में बढ़े कोरोना संक्रमण के बीच सांस के मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ने लगी। पांच मई तक जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्डों के हालात इस कदर बदतर रहे कि एक अदद बेड पाने के लिए मरीजों में आपाधापी मची रही। ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एक सिलिंडर से कई-कई मरीजों की जान बचाने में स्टाफ के लोग लगे रहे। तमाम तीमारदार ऑक्सीजन के अभाव में मरीज की मौत होने का आरोप लगाते हैं। मगर पिछले तीन दिन से हालात अब काबू में हैं। न तो वार्डों में मारामारी है और न ही इमरजेंसी ओपीडी में।
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बृहस्पतिवार को इमरजेंसी की ओपीडी के सारे ऑक्सीजन सिलिंडर खाली रखे रहे। इमरजेंसी स्टाफ का कहना था कि ऊपर वाले का शुक्र का है कि अब राहत है। इसी तरह भगवान लोगों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखे।
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पिछले दिनों की अपेक्षा अब मरीजों की संख्या में बेहद कमी आई है। न तो बेड को लेकर मारामारी है और न ही ऑक्सीजन सिलिंडेर को लेकर। लोग जागरूक रहें बीमारियों से बचा जा सकता है।

- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
बहू हो तो ऐसी
हर सास का सपना होता है कि बहू ऐसी मिले जो उसकी सेवा करे। कुछ इसी तरह का नजारा बृहस्पतिवार को आयुष्मान वार्ड में देखने को मिला। ढखेरवा चौराहा निवासी नीलम सिंह को सांस लेने में दिक्कत होने पर जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। पुत्र राजन सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन स्तर कम होने पर आयुष्मान वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। उधर, छोटी बहू सास के पैर दबाकर सेवा कर रही थी, जो लोगों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों का कहना था कि इस मॉडर्न जमाने में ऐसी बहुएं कम ही होती हैं। जब से नीलम सिंह भर्ती हैं तब से बहू निरंतर उनकी खिदमत में लगी है। संवाद
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