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अब दुधवा में जल भैंसों के पुनर्वासन की तलाशी जा रही संभावनाएं

Fri, 13 May 2022 12:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 12:16 AM IST
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Now possibilities are being explored for rehabilitation of water buffalo in Dudhwa
जल भैस - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन के बाद अब जल भैंस के पुनर्वासन की संभावनाओं की तलाश शुरू हो गई है। तराई के जंगलों में गैंडों की तरह कभी जल भैंसों (वाटर बफेलो) का बसेरा हुआ करता था। यह कब और कैसे लुप्त हुए इसकी खोज की जा रही है। शोध के दौरान यह बात सामने आई है कि गैंडों का जो प्राकृतवास है, वही प्राकृतवास जल भैंसों का भी है। इसी को देखते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन योजना की तरह जल भैंस पुनर्वास योजना शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
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तराई के जंगल कभी जल भैंस और गैंडों का सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतवास हुआ करते थे, लेकिन करीब 125 साल पहले यहां से गैंडे लुप्त हो गए। इससे पहले जल भैंस की प्रजाति यहां से लुप्त हो चुकी थी। 1984 में यहां गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुई थी। गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता के बाद अब जल भैंस के पुनर्वासन पर जीव वैज्ञानिकों का ध्यान गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि जल भैंस और गैंडों का प्राकृतवास लगभग एक है। जल भैंस असम और पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं। इन दोनों राज्यों के जंगल में गैंडे भी बड़ी संख्या में हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डाइरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने वर्ष 2018-19 में दुधवा टाइगर रिजर्व में जल भैंस पुनर्वासन योजना शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश को भेजा था। इस प्रस्ताव पर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू हुआ। यह पता लगाया जा रहा है कि जल भैंस के आहार के रूप में कौन-कौन घासें दुधवा टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं और कितनी मात्रा में हैं। इनके लिए अनुकूल वेटलैंड दुधवा टाइगर रिजर्व में कहां-कहां है। जल भैंसों के लिए अनुकूल वातावरण और जलवायु का भी अध्ययन किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसे कौन से कारण रहे जिनकी वजह से तराई की धरती से जल भैंस विलुप्त हुई हैं। अध्ययन के बाद ही दुधवा में जल भैंसों के पुनर्वासन पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।
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पुराणों के अनुसार जल भैंस से जन्मा था महिषासुर
पुराणों के जानकार और प्रसिद्घ ज्योतिषी गोला के पंडित रामदेव मिश्र शास्त्री का कहना है कि जल भैंस का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर का पिता रंभ असुरों का प्रमुख था जो किसी जल भैंस से प्रेम कर बैठा और इसके महिषासुर का जन्म हुआ। महिषासुर दो शब्दों से बना है एक महिष यानी भैंस और दूसरा असुर। जिसका वध मां दुर्गा ने किया था, इसलिए मां दुर्गा को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। इस पौराणिक कथा से यह बात स्पष्ट है कि कि जल भैंस का अस्तित्व हजारों साल से धरती पर है।

जलभैंस और गैंडों का प्राकृतवास एक ही है। दुधवा टाइगर रिजर्व में जिस तरह गैंडों का पुनर्वासन सफल हुआ है उसी तरह जलभैंसों का पुनर्वासन भी सफल हो सकता है। करीब तीन साल पहले दुधवा टाइगर रिजर्व से जलभैंस के पुनर्वासन के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
- संजय पाठक, फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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