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Lakhimpur Kheri News: लाइफस्टाइल में बदलाव दे रहा मस्तिष्क विकार

Sat, 22 Jul 2023 12:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jul 2023 12:11 AM IST
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lifestyle changing brain disorde
ओपीडी में महिला का इलाज।करते मनोचिकित्सक
लखीमपुर खीरी। इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल और देर रात तक जागना दिमाग को बीमार कर रहा है। मोबाइल का अत्यधिक उपयोग दिमाग का दुश्मन बन गया है। जिला अस्पताल में 30-40 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। डॉक्टर आठ घंटे की नींद ब्रेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण टॉनिक बताते हैं लेकिन, बढ़ते मोबाइल के चलन से पर्याप्त नींद न हो पाने से मानव मस्तिष्क दिन भर थका रहता है।
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जिला अस्पताल की नैदानिक मनोचिकित्सक स्तुति कक्कड़ बताती हैं कि मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए ही हर साल 22 जुलाई को वर्ल्ड ब्रेन डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को मस्तिष्क स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के बारे में जागरूक करना है। क्योंकि लोगों का लाइफस्टाइल बदल रहा है। इसी वजह से लोग तमाम मस्तिष्क विकारों की चपेट में आकर अस्पताल आते है।
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सबसे ज्यादा मरीज नींद न आना, सिर में दर्द रहना, दिमाग में तरह तरह के नकारात्मक विचार आने की शिकायत करते हैं। इस तरह के 30 से 40 मरीज रोजाना ओपीडी में आते हैं, जिनको दवाई देने के साथ काउंसलिंग कर पर्याप्त नींद और मोबाइल आदि का प्रयोग कम से कम करने के लिए कहा जाता है। लंबे समय तक मस्तिष्क संबंधी समस्याएं मानसिक विकलांगता का कारण बन सकती हैं, जिनका इलाज मुश्किल हो जाता है।
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इस तरह दिमाग को रखें स्वस्थ
1. दिमाग को स्वस्थ और एक्टिव रखने के लिए प्रतिदिन 15-20 मिनट का व्यायाम करें।
2. पर्याप्त नींद लें, क्योकि नींद हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है। इसकी कमी से हार्ट प्रॉब्लम, वजन बढ़ना, डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
3. स्मोकिंग न करें, क्योंकि सिगरेट पीने से दिमाग का कॉर्टेक्स वाला हिस्सा पतला होने लगता है। कॉर्टेक्स दिमाग की बाहरी सतह बनाता है। इसके पतला होने से सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है।
4. अकेले न रहकर दोस्तों और परिवार के साथ वक्त बिताएं। उनसे वार्तालाप करें। इससे मन हल्का रहता है और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है।
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टहलने से ब्रेन को न्यूरॉन्स बनाने में मिलती है मदद
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि ब्रेन को हेल्दी रखने का फ्री उपाय है टहलना और ध्यान लगाना। इससे दिमाग की कार्यक्षमता के साथ याददाश्त भी बढ़ती है। नियमित रूप से टहलने से 80 प्रतिशत मसल्स की एक्सरसाइज होती है। इस दौरान मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह भी बढ़ता है। इससे ब्रेन को न्यूरॉन्स बनाने में मदद मिलती है। यह वह कोशिकाएं हैं, जो ब्रेन को सिग्नल भेजने का काम करती है. जिससे दर्द, दुखन, जलन, पीड़ा, सिक्स सेंस, अटैक इत्यादि का आभास और अहसास हो पाता है।


ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए मोबाइल का कम करें प्रयोग
नैदानिक मनोचिकित्सक स्तुति कक्कड बताती है कि दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए फोन का इस्तेमाल सीमित करें। या फिर हैंड फ्री के जरिए बातचीत करें। इस तरह मस्तिष्क को फोन के रेडिएशन से दूर रखा जा सकता है। दूसरी, तीसरी और चौथी पीढ़ी के 2जी, 3जी व 4जी फोन 0.7 से 2.7 गीगा हर्ट्ज की रेडिएशन उत्सर्जित करते हैं, जबकि 5जी फोन की फ्रीक्वेंसी 80 गीगा हर्ट्ज तक होती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को क्षति पहुंचती है।
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