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हत्या के मामले में चार भाइयों को उम्रकैद की सजा
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life imprisonment
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लखीमपुर खीरी। पांच साल पहले बकरी चराने के मामूली विवाद में महमदपुर नगरा के अच्छेलाल की हत्या करने के जुर्म में चार सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही सब पर सत्रह-सत्रह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जिला जज मुकेश मिश्र ने बरामद हुए अवैध तमंचे को अपील की मियाद खत्म होने के बाद नष्ट करने का भी आदेश दिया है।
अब भी नौ जुलाई 2015 को याद करके मितौली थाना क्षेत्र के ग्राम महमदपुर नगरा के ग्रामीण सिहरन उठते हैं, जब कातिलों ने एक शिकायत से नाराज होकर अच्छेलाल पर जानलेवा हमला कर दिया था। बचाने आए भाई बलवीर और भतीजे रूपराम को भी बुरी तरह जख्मी कर दिया था। बांका, लाठी और तमंचे से किए गए हमले से अच्छेलाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। ग्रामीण बताते हैं कि हत्यारोपी राकेश, बलधारी, जसवंत और कैलाश के आरोपियों के पक्ष में पैरवी के कारण शुरुआत से ही पुलिस ने रिपोर्ट अज्ञात के रूप में लिखाने की बात कही, लेकिन जब बात नहीं बनी तो मजबूरन नामजद तहरीर पर मामला दर्ज करना पड़ा। जघन्य घटना के बाद भी सियासी दखल से सुलह के लिए दबाव बनाते हुए क्रास केस दर्ज कराने का भी प्रयास हुआ, लेकिन हकीकत के सामने बनावटी कहानी टिक नहीं सकी। आला अफसरों के संज्ञान में लेने के बाद पुलिस ने हत्या में कई दिनों बाद 14 जुलाई को बलधारी और जसवंत के पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचे तो बरामद किए लेकिन एफएसएल जांच की रिपोर्ट नहीं दाखिल की।
इधर, आरोपियों ने चार्ज बनवाने में फाइल अटकाए रखी तो कहीं जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बहाने मूूल सुनवाई टाली गई। अदालती सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई बार स्थगन प्रार्थना पत्र देते हुए फाइल की असल सुनवाई को टाला। कई बार अभियोजन से जुडे़ वकीलों को भी प्रभावित करने की कोशिश हुई, लेकिन हत्यारोपियों के सारे प्रयास नाकाम रह गए।
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मृतक अच्छेलाल के सगे भाई बलवीर और मौके पर चोटिल रूपराम को जब चारों हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की जानकारी लगी उनकी आंखें नम हो गईं।
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अब भी नौ जुलाई 2015 को याद करके मितौली थाना क्षेत्र के ग्राम महमदपुर नगरा के ग्रामीण सिहरन उठते हैं, जब कातिलों ने एक शिकायत से नाराज होकर अच्छेलाल पर जानलेवा हमला कर दिया था। बचाने आए भाई बलवीर और भतीजे रूपराम को भी बुरी तरह जख्मी कर दिया था। बांका, लाठी और तमंचे से किए गए हमले से अच्छेलाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। ग्रामीण बताते हैं कि हत्यारोपी राकेश, बलधारी, जसवंत और कैलाश के आरोपियों के पक्ष में पैरवी के कारण शुरुआत से ही पुलिस ने रिपोर्ट अज्ञात के रूप में लिखाने की बात कही, लेकिन जब बात नहीं बनी तो मजबूरन नामजद तहरीर पर मामला दर्ज करना पड़ा। जघन्य घटना के बाद भी सियासी दखल से सुलह के लिए दबाव बनाते हुए क्रास केस दर्ज कराने का भी प्रयास हुआ, लेकिन हकीकत के सामने बनावटी कहानी टिक नहीं सकी। आला अफसरों के संज्ञान में लेने के बाद पुलिस ने हत्या में कई दिनों बाद 14 जुलाई को बलधारी और जसवंत के पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचे तो बरामद किए लेकिन एफएसएल जांच की रिपोर्ट नहीं दाखिल की।
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इधर, आरोपियों ने चार्ज बनवाने में फाइल अटकाए रखी तो कहीं जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बहाने मूूल सुनवाई टाली गई। अदालती सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई बार स्थगन प्रार्थना पत्र देते हुए फाइल की असल सुनवाई को टाला। कई बार अभियोजन से जुडे़ वकीलों को भी प्रभावित करने की कोशिश हुई, लेकिन हत्यारोपियों के सारे प्रयास नाकाम रह गए।
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मृतक अच्छेलाल के सगे भाई बलवीर और मौके पर चोटिल रूपराम को जब चारों हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की जानकारी लगी उनकी आंखें नम हो गईं।