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नेपाल में गैंडों की मौत से दुधवा में अलर्ट
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धनगढ़ी-नेपाल में मृत मिला दस वर्षीय मादा गैंडा का शव।
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। नेपाल में गैंडों की मौत के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल में पिछले दो सालों में 37 गैंडों की मौत हो चुकी है। वहां गैंडों को मारने के आरोप में बुधवार को आठ शिकारी गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार हुए शिकारियों के तार लखीमपुर खीरी में दुधवा तक जुड़े हो सकते हैं। इसी के मद्देनजर दुधवा टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है। करीब दस साल पहले भी नेपाल में गैंडा शिकारियों का गिरोह पकड़ा गया था।
फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में अब तक कभी गैंडा शिकार की कोई घटना नहीं हुई है। न ही गैंडों के अंग तस्करी का कोई मामला सामने आया है। दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन परियोजना दो फेज में चल रही है। इसमें पहले फेज में 42 और दूसरे में चार वयस्क और दो शिशु यानी कुल छह गैंडे हैं। दोनों फेज में गैंडों की निगरानी हाथियों और ड्रोन के जरिये की जा रही है।
उन्होंने बताया कि वन्यजीव अंग तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए वर्ष 2011-12 में गैंडों के सींग की प्रतिकृति लकड़ी से बनाकर एक स्थान पर रखी गई थी। फिर उस स्थान पर गैंडों के सींग बिक्री के लिए रखे होने के बारे में प्रचारित किया गया था। तब गैंडों के सींग के लालच में फंसाकर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अंग तस्करों का गिरोह पकड़ा गया था, जिसका बड़ा होने नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
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नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में गैंडा का शव मिला
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल के प्रमुख चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में बुधवार सुबह 10 वर्षीय मादा गैंडा का शव पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि धान की फसल खाने से गुस्साए ग्रामीणों ने गैंडा को पीटकर मौत के घाट उतार दिया। गैंडा की मौत का पता लगने के बाद पार्क प्रशासन में खलबली मची है।
नेपाल के सबसे बड़े चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में गैंडों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। वार्डेन अणनाथ बराल ने बताया कि बुधवार सुबह पार्क के धोवा वन पोस्ट से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर माड़ी क्षेत्र के रेवाखोला के पास दस वर्षीय मादा गैंडा का शव पड़ा देखा गया। उसके सींग व नाखून सुरक्षित हैं। आशंका है कि गैंडा खेत में घुस गया होगा, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहा। फसलों के नुकसान को देखते हुए ग्रामीणों ने गैंडा को मार डाला। मृत गैंडा के पेट में लोहे की राड के घुसने के निशान मिले हैं। गैंडा के पेट में चोट लगने से मौत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। फिलहाल गैंडा का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पिछले साल अगस्त से अब तक 37 गैंडों की मौत हो चुकी है। मगर पार्क प्रशासन गैंडों की मौत रोकने में नाकाम है।
नेपाल से दुधवा तक फैला है वन्यजीव अंग तस्करों का नेटवर्क
नेपाल में वन्यजीव अंग तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है। दरअसल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल से वन्यजीवों का शिकार करके उनके अंग नेपाल के रास्ते चीन, जापान, कोरिया आदि देशों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जाते हैं। कई बार वन्यजीव अंग तस्करों के पकड़े जाने पर पूछताछ में इसका खुलासा हो चुका है। इसका भी खुलासा हुआ था कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अंग तस्करों के तार दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उत्तराखंड जंगल के आसपास बसे लोगों से जुड़े हैं, जो वन्यजीवों का शिकार करके उनके कीमती अंग तस्करों तक पहुंचाते हैं। ऐसे कई मामले पहले पकड़े भी जा चुके हैं।
दुधवा के गैंडों को कड़ी सुरक्षा में रखा जा रहा है। इससे यहां किसी भी तरह गैंडों के शिकार या अन्य किसी अन्य कारण से मारे जाने की आशंका नहीं है। फिर भी नेपाल में वन्यजीव अंग तस्करों की सक्रियता को देखते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है।
संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में अब तक कभी गैंडा शिकार की कोई घटना नहीं हुई है। न ही गैंडों के अंग तस्करी का कोई मामला सामने आया है। दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन परियोजना दो फेज में चल रही है। इसमें पहले फेज में 42 और दूसरे में चार वयस्क और दो शिशु यानी कुल छह गैंडे हैं। दोनों फेज में गैंडों की निगरानी हाथियों और ड्रोन के जरिये की जा रही है।
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उन्होंने बताया कि वन्यजीव अंग तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए वर्ष 2011-12 में गैंडों के सींग की प्रतिकृति लकड़ी से बनाकर एक स्थान पर रखी गई थी। फिर उस स्थान पर गैंडों के सींग बिक्री के लिए रखे होने के बारे में प्रचारित किया गया था। तब गैंडों के सींग के लालच में फंसाकर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अंग तस्करों का गिरोह पकड़ा गया था, जिसका बड़ा होने नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
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नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में गैंडा का शव मिला
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल के प्रमुख चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में बुधवार सुबह 10 वर्षीय मादा गैंडा का शव पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि धान की फसल खाने से गुस्साए ग्रामीणों ने गैंडा को पीटकर मौत के घाट उतार दिया। गैंडा की मौत का पता लगने के बाद पार्क प्रशासन में खलबली मची है।
नेपाल के सबसे बड़े चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में गैंडों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। वार्डेन अणनाथ बराल ने बताया कि बुधवार सुबह पार्क के धोवा वन पोस्ट से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर माड़ी क्षेत्र के रेवाखोला के पास दस वर्षीय मादा गैंडा का शव पड़ा देखा गया। उसके सींग व नाखून सुरक्षित हैं। आशंका है कि गैंडा खेत में घुस गया होगा, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहा। फसलों के नुकसान को देखते हुए ग्रामीणों ने गैंडा को मार डाला। मृत गैंडा के पेट में लोहे की राड के घुसने के निशान मिले हैं। गैंडा के पेट में चोट लगने से मौत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। फिलहाल गैंडा का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पिछले साल अगस्त से अब तक 37 गैंडों की मौत हो चुकी है। मगर पार्क प्रशासन गैंडों की मौत रोकने में नाकाम है।
नेपाल से दुधवा तक फैला है वन्यजीव अंग तस्करों का नेटवर्क
नेपाल में वन्यजीव अंग तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है। दरअसल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल से वन्यजीवों का शिकार करके उनके अंग नेपाल के रास्ते चीन, जापान, कोरिया आदि देशों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जाते हैं। कई बार वन्यजीव अंग तस्करों के पकड़े जाने पर पूछताछ में इसका खुलासा हो चुका है। इसका भी खुलासा हुआ था कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अंग तस्करों के तार दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उत्तराखंड जंगल के आसपास बसे लोगों से जुड़े हैं, जो वन्यजीवों का शिकार करके उनके कीमती अंग तस्करों तक पहुंचाते हैं। ऐसे कई मामले पहले पकड़े भी जा चुके हैं।
दुधवा के गैंडों को कड़ी सुरक्षा में रखा जा रहा है। इससे यहां किसी भी तरह गैंडों के शिकार या अन्य किसी अन्य कारण से मारे जाने की आशंका नहीं है। फिर भी नेपाल में वन्यजीव अंग तस्करों की सक्रियता को देखते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है।
संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व