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Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व में ग्राउंड आर्किड के पौधे को मिला विशिष्ट दर्जा
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दुधवा टाइगर रिजर्व में उगा दुर्लब प्रजाति का ग्राउंड आर्किड पौधा
लखीमपुर खीरी। करीब सौ साल से भी ज्यादा समय के बाद चार साल पहले तराई के जंगल में मिले दुर्लभ प्रजाति के पौधे ग्राउंड आर्किड के पौधे को दुधवा टाइगर रिजर्व में विशेष दर्जा दिया गया है। इसका खास रखरखाव और संरक्षण किया जा रहा है। इसके चलते इस दुर्लभ वनस्पति का विस्तार हो रहा है। इस दुर्लभ पौधे पर अध्ययन का सिलसिला जारी है। इसके विस्तार से डीटीआर प्रशासन के अधिकारी खुश हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व की टीम ने करीब चार साल पहले दुधवा के आरआरए-1 ग्रासलैंड में दुर्लभ प्रजाति का पौधा ग्राउंड आर्किड खोजा था। उस समय वनस्पति विशेषज्ञों ने बताया था कि करीब 121 साल बाद दुधवा के जंगल में आर्किड के पौधों पर फूल खिला हुआ देखा गया है। इसके साथ ही इस दुर्लभ प्रजाति के पौधे में फल भी आ रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि इसका विशेष तौर पर संरक्षण और इस पर अध्ययन किया जा रहा है। इस दुर्लभ वनस्पति का वानस्पतिक नाम यूलोफिया ऑब्ट्यूसा है। यह पौध पहाड़ी क्षेत्रों उत्तराखंड, सिक्किम, दार्जलिंग या गुवाहाटी की पहाड़ियों पर मिलता है। तराई में दुर्लभ होने के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व ने इसे विशिष्ट वनस्पति का दर्जा दिया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्य हिस्सों में भी इस दुर्लभ प्रजाति के पौधों साथ साथ अन्य दुर्लभ वनस्पतियों की खोज भी की जा रही हैै।
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वनस्पति विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राउंड के पौधे को करीब 121 साल पहले यानी साल 1902 में देखा गया था, जिसके बाद साल 2019 में इसके दर्शन हुए हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए यह एक शुभ संकेत है। इस दुर्लभ प्रजाति के पौधे के मिलने के बाद डीटीआर के अधिकारियों ने ढाका विश्वविद्यालय (बांग्लादेश) के वनस्पति शास्त्री मोहम्मद शरीफ हुसैन सौरभ ने बताया था कि इस दुर्लभ प्रजाति का रिकॉर्ड पिछले 100 साल से अधिक समय से देखने को नहीं मिला है। 1914 में इस पौधे को बांग्लादेश में आखिरी बार देखा गया था।
दुधवा के लिए बेहद खास है ग्राउंड आर्किड का पौधा
दुधवा टाइगर रिजर्व में न केवल दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीवों का संरक्षण और अध्ययन हो रहा है, बल्कि दुर्लभ वनस्पतियों का भी संरक्षण और संवर्धन हो रहा है। दुधवा में ग्रांउड आर्किड का पौधा मिलने के बाद इसे विशिष्ट दर्जा दिया गया है। इसके पौधों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके परिणाम स्वरूप ग्राउंड आर्किड प्रजाति की वनस्पति का क्षेत्र विस्तार हो रहा है। इसमें फूल और फल भी आ रहे हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की टीम ने करीब चार साल पहले दुधवा के आरआरए-1 ग्रासलैंड में दुर्लभ प्रजाति का पौधा ग्राउंड आर्किड खोजा था। उस समय वनस्पति विशेषज्ञों ने बताया था कि करीब 121 साल बाद दुधवा के जंगल में आर्किड के पौधों पर फूल खिला हुआ देखा गया है। इसके साथ ही इस दुर्लभ प्रजाति के पौधे में फल भी आ रहे हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि इसका विशेष तौर पर संरक्षण और इस पर अध्ययन किया जा रहा है। इस दुर्लभ वनस्पति का वानस्पतिक नाम यूलोफिया ऑब्ट्यूसा है। यह पौध पहाड़ी क्षेत्रों उत्तराखंड, सिक्किम, दार्जलिंग या गुवाहाटी की पहाड़ियों पर मिलता है। तराई में दुर्लभ होने के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व ने इसे विशिष्ट वनस्पति का दर्जा दिया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्य हिस्सों में भी इस दुर्लभ प्रजाति के पौधों साथ साथ अन्य दुर्लभ वनस्पतियों की खोज भी की जा रही हैै।
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वनस्पति विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राउंड के पौधे को करीब 121 साल पहले यानी साल 1902 में देखा गया था, जिसके बाद साल 2019 में इसके दर्शन हुए हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए यह एक शुभ संकेत है। इस दुर्लभ प्रजाति के पौधे के मिलने के बाद डीटीआर के अधिकारियों ने ढाका विश्वविद्यालय (बांग्लादेश) के वनस्पति शास्त्री मोहम्मद शरीफ हुसैन सौरभ ने बताया था कि इस दुर्लभ प्रजाति का रिकॉर्ड पिछले 100 साल से अधिक समय से देखने को नहीं मिला है। 1914 में इस पौधे को बांग्लादेश में आखिरी बार देखा गया था।
दुधवा के लिए बेहद खास है ग्राउंड आर्किड का पौधा
दुधवा टाइगर रिजर्व में न केवल दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीवों का संरक्षण और अध्ययन हो रहा है, बल्कि दुर्लभ वनस्पतियों का भी संरक्षण और संवर्धन हो रहा है। दुधवा में ग्रांउड आर्किड का पौधा मिलने के बाद इसे विशिष्ट दर्जा दिया गया है। इसके पौधों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके परिणाम स्वरूप ग्राउंड आर्किड प्रजाति की वनस्पति का क्षेत्र विस्तार हो रहा है। इसमें फूल और फल भी आ रहे हैं।