फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Dudhwa is not only rich in natural beauty but also in biodiversity.

Lakhimpur Kheri News: प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं जैव विविधता से भी समृद्ध है दुधवा

Fri, 03 Oct 2025 11:14 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Oct 2025 11:14 PM IST
विज्ञापन
Dudhwa is not only rich in natural beauty but also in biodiversity.
दुधवा में घोषले के अंदर बैठे प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग।
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में एक से सात अक्टूबर तक मनाए जा रहे वन्य प्राणी सप्ताह की इन दिनों धूम है। वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण पर आधारित कार्यक्रमों के जरिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है। डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि इस बार के कार्यक्रम की थीम ‘मानव-वन्यजीव की साथ-साथ मौजूदगी, मिशन लाइफ और प्लास्टिक को कहें न’ है।
विज्ञापन


दुधवा टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य से जितना समृद्ध है, इससे ज्यादा जैव विविधता के लिहाज से मालामाल है। 150 से अधिक बाघों को सहेजने वाले दुधवा में कई ऐसी दुर्लभ प्रजातियों के जीव-जन्तु मौजूद हैं, जो बिरले ही मिलते हैं। बंगाल फ्लोरिकन पक्षी इनमें से एक है, जो दुनिया भर में बहुत कम संख्या में बचे हैं। अपने पुरखों की धरती पर फिर से बसाए गए एक सींग वाले गैंडों का पुनर्वासन यहां की एक बड़ी खासियत है। दुधवा का जंगल रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है।
विज्ञापन


एफडी डॉ. एच राजामोहन बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थिति दुधवा टाइगर रिजर्व 2200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पूरे टाइगर रिजर्व को तीन प्रभागों में बांटा गया है। इसमें दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वन्यजीव विहार, कतर्निया घाट वन्यजीव विहार और बफरजोन शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीटीआर में 66 फीसदी वुडलैंड, 21 फीसदी ग्रासलैंड और 13 फीसदी वेटलैंड हैं, जो वन्यजीवों के प्राकृतवास, भोजन और पानी के लिए आदर्श पारिस्थिकी है। यही कारण है कि दुधवा में सर्वाधिक प्रजातियों के वन्यजीव हैं। दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना एक फरवरी 1977 को हुई। सन 1987-88 में किशनपुर और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार को भी दुधवा में शामिल किया गया। इसे दुधवा टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इस बीच सन 1984 में दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई, जो पूरी तरह सफल रही है।




दुधवा टाइगर रिजर्व की यह है खासियत

- पांच प्रजातियों के हिरन : बारासिंगा, पाढ़ा, चीतल, काकड़ और सांभर मिलते हैं।

- बाघों के अलावा यहां तेंदुआ, फिशिंग कैट, जंगली हाथी, उड़न गिलहरी, भालू, मगरमच्छ जैसे दुर्लभ वन्यजीव मिलते हैं।

- दुर्लभ प्रजाति का पक्षी बंगाल फ्लोरिकन भी सिर्फ दुधवा में फल-फूल रहा है।

- दुधवा में ही बसी थारू जनजाति की अनूठी संस्कृति भी सैलानियों का आकर्षण।



दुधवा की जैव विविधता

डीटीआर में 75 प्रजातियों के वृक्ष, 21 प्रजातियों की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल और लताओं के अलावा 179 प्रकार के जलीय पौधे मिलते हैं। इसी तरह यहां 51 प्रजातियां स्तनपायी, 15 प्रजातियों के एंफीबियन और 125 प्रजाति के रेप्टाइल हैं। इसके अलावा यहां 450 प्रजातियों के पक्षी विचरण करते हैं। गैंडों को संरक्षित करने वाला देश का पहला टाइगर रिजर्व है दुधवा।

दुधवा में घोषले के अंदर बैठे प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग।

दुधवा में घोषले के अंदर बैठे प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed