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पालनाघर में संवरेगी लावारिस बच्चों की जिंदगी

Tue, 10 Dec 2019 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 01:16 AM IST
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dm palanaghar
लखीमपुर खीरी। फेंके जाने वाले बच्चे अब लावारिस की तरह इधर-उधर नहीं भटकेंगे। बल्कि उनकी भी एक खिलखिलाती जिंदगी होगी। ऐसे बच्चों को सहारा देने के लिए पालना घर बनेंगे। जी हां, गिरते लिंगानुपात को लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और पीसीपीएनडीटी (लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम) अधिनियम के तहत अभिमुखीकरण कार्यशाला हुई, जिसमें नवजात बच्चों को फेंके जाने का मामला प्रमुखता से छाया रहा। इसके लिए पालनाघर बनाने और बच्चा फेंके नहीं हमें दे की मुहिम चलाने पर सहमति जताई गई। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या कम होने के कारणों पर चर्चा की गई। अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टरों और संचालकों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम का पालन हर हाल में करने के निर्देश दिए गए।
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कलक्ट्रेट सभागार में डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों को संस्कार देने की आवश्यकता है। शिक्षा का बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों की सोच को बदलना होगा। जिस घर में बेटियां होती हैं, उस घर में अनुशासन होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम को भी प्रभावी बनाना होगा। यदि बच्चों को सही शिक्षा एवं संस्कार दिए जाए तो इस एक्ट की कोई आवश्यकता नहीं होगी। एसपी पूनम ने कहा कि लिंग से संबंधित भ्रांतियों को अभी समाज से पूरी तरह दूर नहीं किया जा सका है। इस विषय में और अधिक जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट और गायनोलॉजिस्ट को सचेत करते हुए कहा कि भ्रूण की लिंग जांच जैसा दुष्कृत्य कतई न करें, जिससे उनके विरुद्ध सजा देने की आवश्यकता पड़े। सीडीओ अरविंद सिंह ने कहा कि कुछ दिनों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में घटित होने वाली घटनाओं के विषय में पीसीपीएनडीटी एक्ट की महत्ता और अधिक बढ़ गई है।
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एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सभी धाराओं और उनमें होने वाली कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। एसीएमओ डॉ. रवींद्र शर्मा ने बताया कि गर्भधारण पर पहले और बाद में इस एक्ट के तहत प्रतिबंध और किन परिस्थितियों जैसे आनुवांशिक असामानताएं, मेटाबोलिक डिस्आर्डर, सेक्स लिंग डिस्आर्डर में डायग्नोस्टिक तकनीक का बच्चे की जांच करने में प्रयोग किए जाने की जानकारी दी। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने कन्या सुमंगला योजना की प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के आवेदन के बारे में बताया। चिकित्सालय और प्राइवेट अस्पताल के बाहर शिशु पालना लगाने के लिए कहा, जिस पर बेटी फेंके नहीं हमें दें स्लोगन लगी नोटिस लगाएं।
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