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....जाने कहां गुम हो रहे लोग
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 26 Dec 2015 07:26 PM IST
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जिले में आए-दिन लोग गुम हो रहे हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की तादाद अधिक है। पुलिस ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज कर छानबीन करती है, लेकिन अधिकतर मामले फाइलों में दबकर धूल फांक रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से नवंबर तक 133 लोग लापता हुए, जिनमें 95 लोग मिल गए हैं। जबकि 38 लोग अब भी लापता है। इसी तरह वर्ष 2014 में लापता हुए छह बच्चों का पुलिस अब तक सुराग नहीं लगा सकी है। सालों पुराने कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर पल्ला झाड़ लिया, जबकि लापता छात्र का पता नहीं लगा।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जनवरी से नवंबर 2015 तक जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 56 बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र के लड़का-लड़की) लापता हुए, जिनमें 40 का पता लगा लिया गया। जबकि 16 बच्चों का अभी पता नहीं लगा है। इसी तरह अब तक 57 पुरुष लापता हो चुके हैं, जिसमें 42 लौट आए। जबकि 15 पुरुषों का पता नहीं लग सका है। वहीं अब तक 20 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए गए, जिसमें 13 महिलाओं को बरामद करने में पुलिस सफल रही। जबकि सात महिलाओं का पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी है। इस तरह बच्चों, महिलाओं सहित 38 परिवारों के लोग लापता हैं। रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2014 में लापता हुए छह बच्चों का पुलिस अब तक सुराग नहीं लगा पाई है। लापता हुए लोगों की तलाश के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं या फिर लापरवाही बरती जा रही हैै। प्रेम प्रसंग के मामलों में लापता हुए लोगों के मामलों में ही पुलिस को सफलता मिली है, क्योंकि इन मामलों में ज्यादातर नामजद रिपोर्ट होती है। वहीं दूसरे मामलों में लापता हुए लोगों के शव बरामद हुए या फिर उनका अब तक पता नहीं चल सका है।
एएसपी अष्टभुजा प्रताप सिंह ने बताया कि लापता हुए लोगों की तलाश में स्वाट और सर्विलांस टीम की मदद ली जाती है। ज्यादातर मामलों में पुलिस को सफलता मिली है। कुछ गुमशुदगी के मामलों में पुलिस जांच कर रही है, जिनका शीघ्र ही खुलासा कर लिया जाएगा।
छह माह में ऑटो चालक का नहीं लगा सुराग
मोहल्ला मिश्रापुरम निवासी 36 वर्षीय ऑटो चालक अरविंद कुमार शुक्ला पांच जुलाई 2015 को ऑटो समेत लापता हो गया था, जिसका सात जुलाई को सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। कुछ दिनों बाद सीतापुर में लावारिस हालत में ऑटो बरामद हुआ था, लेकिन चालक का अब तक पुलिस पता नहीं लगा सकी है। जबकि परिवार वाले पुलिस और अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं।
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32 साल से लड़ रहे कानूनी लड़ाई
मोहल्ला संकटा देवी निवासी हरद्वारी लाल गुप्ता का 10 वर्षीय पुत्र दिनेश कक्षा छह का छात्र था, जो नौ अप्रैल 1983 को स्कूल से घर नहीं लौटा। परिवार वालों ने काफी खोजबीन की, जिसके बाद सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसके कुछ दिनों बाद हरद्वारी लाल को चिट्ठी भेजकर 20 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई, जिसके बाद उन्होंने नामजद मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डालते हुए दो बार फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। इसके बावजूद हरद्वारी लाल ने हिम्मत न हारते हुए कोर्ट की शरण ली, जहां आज भी वह मुकदमा लड़ रहे हैैं। कोर्ट ने इस मामले में विपक्षियों को तलब किया है।
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पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जनवरी से नवंबर 2015 तक जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 56 बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र के लड़का-लड़की) लापता हुए, जिनमें 40 का पता लगा लिया गया। जबकि 16 बच्चों का अभी पता नहीं लगा है। इसी तरह अब तक 57 पुरुष लापता हो चुके हैं, जिसमें 42 लौट आए। जबकि 15 पुरुषों का पता नहीं लग सका है। वहीं अब तक 20 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए गए, जिसमें 13 महिलाओं को बरामद करने में पुलिस सफल रही। जबकि सात महिलाओं का पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी है। इस तरह बच्चों, महिलाओं सहित 38 परिवारों के लोग लापता हैं। रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2014 में लापता हुए छह बच्चों का पुलिस अब तक सुराग नहीं लगा पाई है। लापता हुए लोगों की तलाश के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं या फिर लापरवाही बरती जा रही हैै। प्रेम प्रसंग के मामलों में लापता हुए लोगों के मामलों में ही पुलिस को सफलता मिली है, क्योंकि इन मामलों में ज्यादातर नामजद रिपोर्ट होती है। वहीं दूसरे मामलों में लापता हुए लोगों के शव बरामद हुए या फिर उनका अब तक पता नहीं चल सका है।
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एएसपी अष्टभुजा प्रताप सिंह ने बताया कि लापता हुए लोगों की तलाश में स्वाट और सर्विलांस टीम की मदद ली जाती है। ज्यादातर मामलों में पुलिस को सफलता मिली है। कुछ गुमशुदगी के मामलों में पुलिस जांच कर रही है, जिनका शीघ्र ही खुलासा कर लिया जाएगा।
छह माह में ऑटो चालक का नहीं लगा सुराग
मोहल्ला मिश्रापुरम निवासी 36 वर्षीय ऑटो चालक अरविंद कुमार शुक्ला पांच जुलाई 2015 को ऑटो समेत लापता हो गया था, जिसका सात जुलाई को सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। कुछ दिनों बाद सीतापुर में लावारिस हालत में ऑटो बरामद हुआ था, लेकिन चालक का अब तक पुलिस पता नहीं लगा सकी है। जबकि परिवार वाले पुलिस और अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं।
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32 साल से लड़ रहे कानूनी लड़ाई
मोहल्ला संकटा देवी निवासी हरद्वारी लाल गुप्ता का 10 वर्षीय पुत्र दिनेश कक्षा छह का छात्र था, जो नौ अप्रैल 1983 को स्कूल से घर नहीं लौटा। परिवार वालों ने काफी खोजबीन की, जिसके बाद सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसके कुछ दिनों बाद हरद्वारी लाल को चिट्ठी भेजकर 20 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई, जिसके बाद उन्होंने नामजद मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डालते हुए दो बार फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। इसके बावजूद हरद्वारी लाल ने हिम्मत न हारते हुए कोर्ट की शरण ली, जहां आज भी वह मुकदमा लड़ रहे हैैं। कोर्ट ने इस मामले में विपक्षियों को तलब किया है।