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दो मासूमों के हत्याभियुक्त सगे भाइयों को उम्रकैद
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 28 Aug 2015 10:59 PM IST
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बीमा एजेंट के दो मासूम बच्चों की निर्ममता से हत्या करने के मामले में एडीजे रामायण शर्मा ने दो सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दोनों पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी वीरेश सिंह तोमर ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम जिंदपुर निवासी रूपेंद्र दीक्षित ने दीप बीमा कंपनी में एजेंट बनने के बाद मैगलगंज के एक व्यक्ति के माध्यम से गांव के ही शैलेंद्र व सर्वेश का 2200 रुपया जमा कराया था। इसके बाद जब बीमा कंपनी भाग गई तो दोनो ने रुपये वापस मांगने शुरू कर दिए, इसी बीच किसी ने शैलेंद्र का गन्ना फूंक दिया तो रंजिश दुश्मनी में बदल गई। आरोप है कि 13 फरवरी 2014 की शाम पांच बजे रूपेंद्र दीक्षित के दो मासूमों मोहित (10) और रोचक (8) खेत पर लगे इंजन को देखने गए हुए थे, तभी रास्ते मे सर्वेश और शैलेंद्र ने उन्हें अगवा कर लिया, गन्ने के खेत में बांके से गर्दन काटकर दोनों की निर्ममता से हत्या कर दी। इधर तमाम खोजबीन के बाद बच्चों का पता नहीं चला तो उसके परिवार वालों ने गुमशुदगी की सूचना पसगवां थाने मे दी। घटना के तीसरे दिन हाथ से लिखे पर्चे के आधार पर बच्चों के शव बरामद हुए तो हत्यारोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांका भी बरामद हुआ। अदालती सुनवाई के दौरान रूपेंद्र दीक्षित, सतीश कुमार, आनंद प्रकाश, लज्जाराम, डॉ.एसके मिश्र, कांस्टेबल महबूब हसन अंसारी, देशराज सिंह, एसआई विश्वनाथ यादव और एसओ आलोक राव ने बयान दर्ज कराये। कोर्ट ने सर्वेश और शैलेंद्र उर्फ लल्ला को दोहरे हत्याकांड के लिए दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि वसूले गए जुर्माना की रकम से 50 हजार की मुआवजा राशि पीड़ित को दे दी जाए।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी वीरेश सिंह तोमर ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम जिंदपुर निवासी रूपेंद्र दीक्षित ने दीप बीमा कंपनी में एजेंट बनने के बाद मैगलगंज के एक व्यक्ति के माध्यम से गांव के ही शैलेंद्र व सर्वेश का 2200 रुपया जमा कराया था। इसके बाद जब बीमा कंपनी भाग गई तो दोनो ने रुपये वापस मांगने शुरू कर दिए, इसी बीच किसी ने शैलेंद्र का गन्ना फूंक दिया तो रंजिश दुश्मनी में बदल गई। आरोप है कि 13 फरवरी 2014 की शाम पांच बजे रूपेंद्र दीक्षित के दो मासूमों मोहित (10) और रोचक (8) खेत पर लगे इंजन को देखने गए हुए थे, तभी रास्ते मे सर्वेश और शैलेंद्र ने उन्हें अगवा कर लिया, गन्ने के खेत में बांके से गर्दन काटकर दोनों की निर्ममता से हत्या कर दी। इधर तमाम खोजबीन के बाद बच्चों का पता नहीं चला तो उसके परिवार वालों ने गुमशुदगी की सूचना पसगवां थाने मे दी। घटना के तीसरे दिन हाथ से लिखे पर्चे के आधार पर बच्चों के शव बरामद हुए तो हत्यारोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांका भी बरामद हुआ। अदालती सुनवाई के दौरान रूपेंद्र दीक्षित, सतीश कुमार, आनंद प्रकाश, लज्जाराम, डॉ.एसके मिश्र, कांस्टेबल महबूब हसन अंसारी, देशराज सिंह, एसआई विश्वनाथ यादव और एसओ आलोक राव ने बयान दर्ज कराये। कोर्ट ने सर्वेश और शैलेंद्र उर्फ लल्ला को दोहरे हत्याकांड के लिए दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि वसूले गए जुर्माना की रकम से 50 हजार की मुआवजा राशि पीड़ित को दे दी जाए।
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