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पति को दस, सास को सात साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 02 Oct 2016 12:09 AM IST
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दहेज के लिए विवाहिता की हत्या का मामला
दहेज की मांग के चलते विवाहिता को मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे थर्ड की अदालत में पति और सास दोषसिद्ध हुए हैं। एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने पति को दस वर्ष के और सास को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया कि थाना और ग्राम ईसानगर के रहने वाले उत्तम मिश्र ने अपनी बहन हेमलता उर्फ पप्पी की शादी वर्ष 1996 में ईसानगर थाना क्षेत्र के ही गांव संडौरा कलां निवासी अजय कुमार के साथ की थी। आरोप है कि शादी में मिले दान-उपहार से ससुरालीजन संतुष्ट नहीं थे, दहेज में टीवी, टेपरिकार्डर और पलंग की मांग के चलते विवाहिता को परेशान करते थे। इसी बीच पांच जुलाई 1998 को हेमलता की लाश फांसी से झूलती पाई गई। मृतका के भाई उत्तम ने इस मामले में पति अजय, जेठ कौशल, और उसकी पत्नी जेठानी, देवर अनिल और सास मधुरानी को नामजद किया था, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद पति अजय और सास मधुरानी के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की थी। अदालती सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने उत्तम, मिथलेश, संतोष कुमार, नायब तहसीलदार गुलाब चंद्र, डॉ.वीके चोपड़ा, सीओ राम अभिलाष त्रिपाठी की गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद पति अजय को दस वर्ष के कठोर करावास की सजा सुनाई है तथा सास मधुरानी की बीमारी और बुढ़ापा देखते हुए उसे सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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दहेज की मांग के चलते विवाहिता को मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे थर्ड की अदालत में पति और सास दोषसिद्ध हुए हैं। एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने पति को दस वर्ष के और सास को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया कि थाना और ग्राम ईसानगर के रहने वाले उत्तम मिश्र ने अपनी बहन हेमलता उर्फ पप्पी की शादी वर्ष 1996 में ईसानगर थाना क्षेत्र के ही गांव संडौरा कलां निवासी अजय कुमार के साथ की थी। आरोप है कि शादी में मिले दान-उपहार से ससुरालीजन संतुष्ट नहीं थे, दहेज में टीवी, टेपरिकार्डर और पलंग की मांग के चलते विवाहिता को परेशान करते थे। इसी बीच पांच जुलाई 1998 को हेमलता की लाश फांसी से झूलती पाई गई। मृतका के भाई उत्तम ने इस मामले में पति अजय, जेठ कौशल, और उसकी पत्नी जेठानी, देवर अनिल और सास मधुरानी को नामजद किया था, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद पति अजय और सास मधुरानी के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की थी। अदालती सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने उत्तम, मिथलेश, संतोष कुमार, नायब तहसीलदार गुलाब चंद्र, डॉ.वीके चोपड़ा, सीओ राम अभिलाष त्रिपाठी की गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद पति अजय को दस वर्ष के कठोर करावास की सजा सुनाई है तथा सास मधुरानी की बीमारी और बुढ़ापा देखते हुए उसे सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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