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न्यायिक अभिरक्षा में बंदी की अस्पताल में मौत
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:29 PM IST
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जमानत के लिए लगती रहीं तारीख पर तारीख
पोस्टमार्टम में वीडियोग्राफी की व्यवस्था करने में पुलिस को छूटे पसीने
दहेज एक्ट के मामले में एक आरोपी की न्यायिक अभिरक्षा में गुरुवार की रात इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। मामला बंदी की मौत से जुड़ा होने के कारण शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने पंचनामा भरा, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। तीन डॉक्टरों के पैनल ने देरशाम पोस्टमार्टम किया, क्योंकि वीडियोग्राफर का इंतजाम करने में पुलिस हीला-हवाली करती रही। यही नहीं पीड़ित परिवार वालों पर ही वीडियोग्राफर बुलाने का दबाव बनाने में जुटी रही।
मैगलगंज के मोहल्ला धर्माखेड़ा निवासी 55 वर्षीय दिनेश चंद्र गुप्ता वर्ष 2015 में हुई बहू की मौत के मामले में नामजद आरोपी था, उसे कैंसर था। हालत बिगड़ने पर दिनेश चंद्र को परिवार वालों ने 16 जून को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया था। इस दौरान दिनेश चंद्र की जमानत के लिए परिवार वालों ने कोर्ट में अर्जी लगाई, क्योंकि जेल प्रशासन ने गंभीर हालत को देखते हुए निरुद्ध करने के बजाय अस्पताल में ही इलाज कराने की सलाह दी। उधर, परिवार वाले दिनेश की जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी लगाते रहे, लेकिन वहां तारीख पर तारीख लगती रहीं। इधर, इलाज के दौरान गुरुवार की रात को पुलिस कस्टडी में दिनेश चंद्र की जिला अस्पताल में मौत हो गई। हालांकि कुछ दिन पूर्व ही सीजेएम ने जिला अस्पताल जाकर बंदी दिनेश चंद्र की हालत का जायजा लिया था और डॉक्टर से रिपोर्ट भी तलब की। जमानत के लिए शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सारी कवायद बेकार साबित हुई और उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया, जहां वीडियोग्राफर की व्यवस्था न होने से देरशाम को पोस्टमार्टम हो पाया।
कोर्ट से वारंट जारी हो चुका था, जिससे जिला अस्पताल में इलाज करा रहे अभियुक्त दिनेश चंद्र को पुलिस कस्टडी में लिया गया। इसके बाद न्यायिक अभिरक्षा में अभियुक्त का इलाज चल रहा था। तीन डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और वीडियोग्राफी भी हुई है।
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-मिथिलेश दीक्षित, सीओ मितौली
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पोस्टमार्टम में वीडियोग्राफी की व्यवस्था करने में पुलिस को छूटे पसीने
दहेज एक्ट के मामले में एक आरोपी की न्यायिक अभिरक्षा में गुरुवार की रात इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। मामला बंदी की मौत से जुड़ा होने के कारण शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने पंचनामा भरा, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। तीन डॉक्टरों के पैनल ने देरशाम पोस्टमार्टम किया, क्योंकि वीडियोग्राफर का इंतजाम करने में पुलिस हीला-हवाली करती रही। यही नहीं पीड़ित परिवार वालों पर ही वीडियोग्राफर बुलाने का दबाव बनाने में जुटी रही।
मैगलगंज के मोहल्ला धर्माखेड़ा निवासी 55 वर्षीय दिनेश चंद्र गुप्ता वर्ष 2015 में हुई बहू की मौत के मामले में नामजद आरोपी था, उसे कैंसर था। हालत बिगड़ने पर दिनेश चंद्र को परिवार वालों ने 16 जून को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया था। इस दौरान दिनेश चंद्र की जमानत के लिए परिवार वालों ने कोर्ट में अर्जी लगाई, क्योंकि जेल प्रशासन ने गंभीर हालत को देखते हुए निरुद्ध करने के बजाय अस्पताल में ही इलाज कराने की सलाह दी। उधर, परिवार वाले दिनेश की जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी लगाते रहे, लेकिन वहां तारीख पर तारीख लगती रहीं। इधर, इलाज के दौरान गुरुवार की रात को पुलिस कस्टडी में दिनेश चंद्र की जिला अस्पताल में मौत हो गई। हालांकि कुछ दिन पूर्व ही सीजेएम ने जिला अस्पताल जाकर बंदी दिनेश चंद्र की हालत का जायजा लिया था और डॉक्टर से रिपोर्ट भी तलब की। जमानत के लिए शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सारी कवायद बेकार साबित हुई और उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया, जहां वीडियोग्राफर की व्यवस्था न होने से देरशाम को पोस्टमार्टम हो पाया।
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कोर्ट से वारंट जारी हो चुका था, जिससे जिला अस्पताल में इलाज करा रहे अभियुक्त दिनेश चंद्र को पुलिस कस्टडी में लिया गया। इसके बाद न्यायिक अभिरक्षा में अभियुक्त का इलाज चल रहा था। तीन डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और वीडियोग्राफी भी हुई है।
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-मिथिलेश दीक्षित, सीओ मितौली