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दिवाकर की दिलेरी से औरों का बढ़ा हौसला

Thu, 03 Aug 2017 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो खमरिया (खीरी)।
अमर उजाला ब्यूरो खमरिया (खीरी)। Updated Thu, 03 Aug 2017 11:04 PM IST
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 Diwakar ki dariyi hai more
दिलेरी - फोटो : अमर उजाला
लूट और चोरी की वारदातों से थर्राए जिले में दिखी बहादुरी
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जाली वाला दरवाजा बंद कर कमरे में लेटे थे
पत्नी और दो बेटे लखनऊ में रहते हैं
छोटे भाई का परिवार दूसरी मंजिल पर था

 
 लगभग रोज चोरी और लूट की वारदातों से थर्राने वाले इस जिले में दिवाकर त्रिवेदी ने दिलेरी दिखाई तो लुटेरे पस्त हो गए और भागने को मजबूर हो गए। पुलिस मुखिया डॉ एस. चन्नप्पा ने भी उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। वहीं इलाके में लोगों के हौसले बुलंद नजर आए और लोग दिवाकर त्रिवेदी की बहादुर से खुश दिखे।
खमरिया निवासी दिवाकर त्रिवेदी किसान हैं। उनकी पत्नी और दो बेटे लखनऊ में रहते हैं। वह यहां रहकर खेती बाड़ी संभालते हैं। कसबे के मेन रोड पर घनी आबादी के बीच उनका विशाल मकान है। मकान के नीचे के हिस्से में उनका सामान रखा है, जबकि दूसरी मंजिल पर छोटे भाई संवर्त त्रिवेदी का परिवार रहता है। गृहस्वामी दिवाकर त्रिवेदी का अनुमान है कि बदमाश बुधवार की रात करीब दो बजे के बाद आए होंगे, क्योंकि इससे पहले वह उठे और पानी पीकर सो गए थे। बदमाश मेन गेट समेत दो कमरों का ताला तोड़कर घुसे और दो दरवाजे उखाड़ दिए। इसके बाद उन्होंने दो कमरों में खंगाला शुरू किया और पीतल के बर्तन, छाता आदि सामान बांधकर बाहर तक पहुंचा दिया। इसी बीच करीब पौन चार बजे दिवाकर त्रिवेदी की आंख खुली। वह जारी वाला दरवाजा बंदकर सो रहे थे। उठते ही जाली में से बल्ब की रोशनी में दो बदमाश दिखाई दिए, जिनके हाथों में बंदूकें थीं। बताते हैं कि यह देख उन्होंने दबे पांव अपनी लाइसेंसी बंदूक उठाई और जाली वाले दरवाजे तक निशाना लगाते हुए गई। तभी एक बदमाश ने उन्हें देख लिया और वह भी उसी ओर आने लगा, जिस पर उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे फायर कर दिया। जाली को तोड़ते हुए गोली उसके पेट में जा लगी, जिससे वह चीखकर गिरा और उसके दूसरे साथी ने फायर कर दिया और उन्होंने जोर जोर से चीखना शुरू किया, तभी दूसरी मंजिल से भाई संवर्त ने अपनी राइफल से दो फायर कर दिए। इससे हड़बड़ाए बदमाशों ने घायल साथी को उठाकर भाग निकले। बदमाश कोई भी सामान नहीं ले जा सके।
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24 साल पहले भी हो चुकी है ऐसी वारदात
24 साल पहले 19 मार्च 1994 को इलाके में आतंक का पर्याय बने बदमाशों ने दिवाकर त्रिवेदी के इसी घर में धावा बोल दिया था। तब उनके छोटे भी संवर्त त्रिवेदी ने इसी बंदूक से मोर्चा लेकर बदमाश नीलू को ढेर कर दिया था। तब डीएम और एसपी ने उनकी दिलेरी के लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया था।
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...तो चार पहिया वाहन से भागे बदमाश
एएसपी घनश्याम चौरसिया ने बताया कि मौके पर बिखरे खून से बदमाश के गंभीर घायल होने का अंदाजा लग रहा है। काफी दूर तक खून के निशानों का पीछा करने पर यह बात साफ हो गई कि बदमाश गृहस्वामी के मकान के पीछे बने खेत से होकर भागे। खेत के दूसरी और चार पहिए के वाहन के निशान थे, जिससे साफ है कि बदमाश चार पहिया वाहन से फरार हुए। फिलहाल सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही बदमाश पकड़े जाएंगे।
 
पुलिस सक्रिय होती तो बच सकती थी वारदात
खमरिया। बीते शनिवार को परसिया रोड पर संतोषी माता मंदिर के निकट भी आधा दर्जन सशस्त्र बदमाशों ने गृहस्वामी वीर पाल को कब्जे में लेकर लूटपाट की थी। तब चौकी प्रभारी ने पीड़ित का पुराना आपराधिक इतिहास बताकर घटना दर्ज तक नहीं की थी। इसके अलावा भी लोगों ने बदमाशों के गिरोह की देखे जाने की सूचनाएं मिलती रही हैं, लेकिन पुलिस ने गश्त व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं की। इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि गृहस्वामी और उसके पड़ोसी के फोन बाद भी पुलिस 45 मिनट बाद घटनास्थल तक पहुंच पाई, जबकि पुलिस चौकी घटनास्थल से महज तीन किलोमीटर दूर है। यदि पुलिस तत्पर होती है तो 10 से 15 मिनट में पहुंच सकती थी। वहीं यदि गश्त व्यवस्था दुरुस्त होती तो शायद ये घटना नहीं होती।

 
एसपी बोले, सम्मानित होंगे दिवाकर
एसपी डॉ एस. चन्नप्पा ने बताया कि बदमाश चोरी की नीयत से ही घुसे थे। वजह है कि बदमाशों ने पहले कमरों को खंगला। फिर पीतल के बर्तन और कुछ अन्य कीमती सामान बांधा और घर के बाहर निकालना शुरू किया। गनीमत रही कि गृहस्वामी की आंख खुल गई और उन्होंने गोली चला दी वरना बदमाश चोरी कर भाग निकलते। उन्होंने कहा कि दिवाकर त्रिवेदी और उनके भाई संवर्त त्रिवेदी को सम्मानित किया जाएगा। 
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