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कहीं सुनियोजित साजिश के तहत तो नहीं हुई हत्या
Updated Sun, 22 Oct 2017 10:19 PM IST
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अचेत हुई पत्नी।
- फोटो : अमर उजाला
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तिकुनियां । काफी सीधे-साधे और मृदुल स्वभाव के बलराम किशोर श्रीवास्तव की हत्या के पीछे किसी बड़ी सुनियोजित साजिश की आशंका की बू आ रही है। पुलिस भी इससे इंकार नहीं कर रही है। करवा चौथ की रात भी बदमाशों ने घर के बाहर एक चारपाई पर सो रहे बलराम किशोर और उनके बहनोई से नाम पूछा था, लेकिन दोनों ने अपने नाम गलत बताए थे। इस पर हत्यारे लौट गए थे। इससे साफ है कि हत्यारे बलराम किशोर को पहचानते नहीं थे। यदि पहचानते होते तो उसी दिन उनकी हत्या कर सकते थे। तब से दो बार हत्यारे देखे गए, लेकिन किसी से कोई रंजिश न होने के कारण बलराम किशोर और उनके परिवार के लोग बेफ्रिक रहे।
गांव मझरा पूरब निवासी बलराम किशोर श्रीवास्तव काफी संपन्न किसान हैं, उनकी पत्नी कंचन श्रीवास्तव एएनएम और एक बेटा राघवेंद्र जिला महिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है, जबकि बड़े भाई राधेश्याम श्रीवास्तव ग्राम पंचायत के तीन बार प्रधान रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। दोनों भाइयों का स्वभाव भी काफी मृदुल था। ग्रामीण बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति बलराम किशोर को गाली देता तो वह हंसकर टाल जाते थे। शायद यही वजह है कि बलराम किशोर की हत्या से पूरे गांव के लोग स्तब्ध हैं। लोग हत्यारों को कोस रहे हैं। मृतक के पुत्र राघवेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि करवा चौथ की रात पिता अपने बहनोई थाना सिंगाही के गांव उमरा निवासी सुशील श्रीवास्तव के साथ घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे। रात करीब 12 बजे दो अज्ञात बदमाश चारपाई के पास पहुंचे। दोनों के हाथ में तमंचे थे। बदमाशों ने पिता का नाम लेकर पूछा कि तुम बलराम किशोर हो तो उन्होंने इंकार कर दूसरा नाम बताया। उनके बहनोई से जब पूछा तो उन्होंने भी अपना गलत नाम बताया। इस पर दोनों बदमाश लौटकर जाने लगे। कुछ दूर बदमाशों के जाने पर पिता जब बदमाशों के पीछे चले तो उन्होंने कहा कि तुमसे कोई मतलब नहीं है तुम जाकर सो जाओ। यह बात पिता ने घर आकर बताई। इस पर परिवार के लोग बदमाश होने की आशंका पर रात भर छत पर बैठे रहे। इसके बाद तीन दिन पहले एक बार फिर दो बदमाश घर के आहते में दिखे, लेकिन पिता ने टोका टॉकी करने से मना कर दिया। इसकी सूचना भी पुलिस को नहीं देने दी। शनिवार की रात भी दो ही हत्यारे थे। दोनों पिता के बगल से दादा कहकर निकले थे। पिता ने घर आकर वही दो बदमाश देखे जाने की बात भी घर में बताई, लेकिन किसी को घर से बाहर न जाने की बात कहकर खुद दोबारा बाहर चले गए। इससे साफ है कि बदमाश बलराम किशोर को पहचानते नहीं थे और पखवाड़े भर की रेकी करने के बाद बदमाशों ने किसी सुनियोजित साजिश के तहत उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
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पूर्व प्रधान की चल रही है रंजिश
मृतक बलराम किशोर श्रीवास्तव के बड़े भाई पूर्व प्रधान राधेश्याम श्रीवास्तव ने बताया कि उनके छोटे भाई से किसी से भी कोई रंजिश नहीं है, लेकिन उनकी खुद की रंजिश स्कूल पर अवैध कब्जा करने को लेकर गांव के ही एक व्यक्ति से चल रही है। उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले गांव के ही एक व्यक्ति ने स्कूल की जमीन पर कब्जा कर लिया था। यह जमीन आज भी आरोपी के कब्जे में हैं। उन्होंने इसका विरोध किया था। इस पर आरोपी ने अपने भाइयों और पुत्रों के साथ मिलकर उनकी (पूर्व प्रधान) की पिटाई कर दी थी। जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और उसका अदालत में मामला विचाराधीन है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसी रंजिश के चलते उसके भाई की हत्या की गई हो सकती है।
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बलराम करते थे प्रवचन
कुछ वर्षों से बलराम किशोर श्रीवास्तव राधा स्वामी सत्संग से जुड़े थे। वह प्रत्येक रविवार को ढखेरवा सत्संग स्थल पर जाकर प्रवचन देते थे। सैकड़ों सत्संग प्रेमियों की भीड़ रहती थी। लोगों को सदा सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले संत बलराम किशोर की हत्या करने वालो के आखिर मनसूबे क्या थे? ये लोगो की समझ से परे है। हत्या के बाद से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। हरेक कोई उनकी हत्या से दुखी है।
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गांव मझरा पूरब निवासी बलराम किशोर श्रीवास्तव काफी संपन्न किसान हैं, उनकी पत्नी कंचन श्रीवास्तव एएनएम और एक बेटा राघवेंद्र जिला महिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है, जबकि बड़े भाई राधेश्याम श्रीवास्तव ग्राम पंचायत के तीन बार प्रधान रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। दोनों भाइयों का स्वभाव भी काफी मृदुल था। ग्रामीण बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति बलराम किशोर को गाली देता तो वह हंसकर टाल जाते थे। शायद यही वजह है कि बलराम किशोर की हत्या से पूरे गांव के लोग स्तब्ध हैं। लोग हत्यारों को कोस रहे हैं। मृतक के पुत्र राघवेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि करवा चौथ की रात पिता अपने बहनोई थाना सिंगाही के गांव उमरा निवासी सुशील श्रीवास्तव के साथ घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे। रात करीब 12 बजे दो अज्ञात बदमाश चारपाई के पास पहुंचे। दोनों के हाथ में तमंचे थे। बदमाशों ने पिता का नाम लेकर पूछा कि तुम बलराम किशोर हो तो उन्होंने इंकार कर दूसरा नाम बताया। उनके बहनोई से जब पूछा तो उन्होंने भी अपना गलत नाम बताया। इस पर दोनों बदमाश लौटकर जाने लगे। कुछ दूर बदमाशों के जाने पर पिता जब बदमाशों के पीछे चले तो उन्होंने कहा कि तुमसे कोई मतलब नहीं है तुम जाकर सो जाओ। यह बात पिता ने घर आकर बताई। इस पर परिवार के लोग बदमाश होने की आशंका पर रात भर छत पर बैठे रहे। इसके बाद तीन दिन पहले एक बार फिर दो बदमाश घर के आहते में दिखे, लेकिन पिता ने टोका टॉकी करने से मना कर दिया। इसकी सूचना भी पुलिस को नहीं देने दी। शनिवार की रात भी दो ही हत्यारे थे। दोनों पिता के बगल से दादा कहकर निकले थे। पिता ने घर आकर वही दो बदमाश देखे जाने की बात भी घर में बताई, लेकिन किसी को घर से बाहर न जाने की बात कहकर खुद दोबारा बाहर चले गए। इससे साफ है कि बदमाश बलराम किशोर को पहचानते नहीं थे और पखवाड़े भर की रेकी करने के बाद बदमाशों ने किसी सुनियोजित साजिश के तहत उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
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पूर्व प्रधान की चल रही है रंजिश
मृतक बलराम किशोर श्रीवास्तव के बड़े भाई पूर्व प्रधान राधेश्याम श्रीवास्तव ने बताया कि उनके छोटे भाई से किसी से भी कोई रंजिश नहीं है, लेकिन उनकी खुद की रंजिश स्कूल पर अवैध कब्जा करने को लेकर गांव के ही एक व्यक्ति से चल रही है। उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले गांव के ही एक व्यक्ति ने स्कूल की जमीन पर कब्जा कर लिया था। यह जमीन आज भी आरोपी के कब्जे में हैं। उन्होंने इसका विरोध किया था। इस पर आरोपी ने अपने भाइयों और पुत्रों के साथ मिलकर उनकी (पूर्व प्रधान) की पिटाई कर दी थी। जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और उसका अदालत में मामला विचाराधीन है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसी रंजिश के चलते उसके भाई की हत्या की गई हो सकती है।
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बलराम करते थे प्रवचन
कुछ वर्षों से बलराम किशोर श्रीवास्तव राधा स्वामी सत्संग से जुड़े थे। वह प्रत्येक रविवार को ढखेरवा सत्संग स्थल पर जाकर प्रवचन देते थे। सैकड़ों सत्संग प्रेमियों की भीड़ रहती थी। लोगों को सदा सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले संत बलराम किशोर की हत्या करने वालो के आखिर मनसूबे क्या थे? ये लोगो की समझ से परे है। हत्या के बाद से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। हरेक कोई उनकी हत्या से दुखी है।