फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   बहुत कठिन है कठिना नदी की राह

बहुत कठिन है कठिना नदी की राह

Sat, 18 May 2019 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2019 01:52 AM IST
विज्ञापन
बहुत कठिन है कठिना नदी की राह
ममरी (लखीमपुर खीरी)। आंवला और बेंत के जंगल की पहचान वाले मोहम्मदी-महेशपुर के जंगलों से होकर निकली कठिना नदी के सामने आज अपने वजूद बचाने का संकट है। कभी तेज और निर्मल धारा से बहने वाली यह नदी जिले के भूगोल का खास हिस्सा थी। आज आलम यह है कि नदी कई स्थानों पर सूख गई है। इससे जहां जंगल पशु पक्षियों के सामने पानी पीने का संकट है। वहीं इलाके में सिंचाई की समस्या भी बढ़ रही है। इससे नदी का अस्तित्व भी खतरे में है।
विज्ञापन

कठिना नदी का उद्गम पूर्व में शाहजहांपुर और वर्तमान में पीलीभीत जिले की मोतीझील से हुआ है। गांव मातिन महदेवी के करीब स्थित इसे भोगनई झील भी कहते हैं। पीलीभीत और शाहजहांपुर की सीमा से लखीमपुर के मैलानी के जंगल होकर खुटार मार्ग क्रास कर महुरेना, सहजनियां, गंगापुर, सुंदरपुर, देवीपुर, महेशपुर और मोहम्मदी मार्ग क्रास करती हुई आंवला बीट के जंगल से होकर 70 किलोमीटर दूर टेढ़ेनाथ शिव मंदिर के पास से निकली है। बाद में मितौली इलाके से होती हुई सीतापुर जिले में मिश्रिख ब्लॉक के बख्तौली गांव में गोमती नदी में जाकर यह मिल जाती है। कुल मिलाकर कठिना नदी अपने उद्गम से गोमती नदी में विलय होने तक 145 किलोमीटर का सफर तय करती है। नदी के किनारे बसे गांव सुंदरपुर निवासी 75 वर्षीय रामविलास कहते हैं कि नदी की जलधारा पिछले वर्ष भी सहजनियां गांव तक सूख गई थी, लेकिन इस बार धारा घमहाघाट के आगे तक सूखी है। ताल तलैया और नदी सूखने से खेतों में विचरण करने वाले वन्य जीव, छुट्टा पशु, पक्षी पानी की तलाश में किसानों के ट्यूबवेलों पर भटक रहे हैं। कई बोरिंगों से पानी निकलना बंद हो गया है, जिससे किसान परेशान हैं। सुंदरपुर के ही रामस्वरूप का कहना है कि नदी कब से बह रही है। यह बताना मुश्किल है, लेकिन नदी का कठिना नाम इस लिए पड़ा, क्योंकि इसका प्रवाह काठ के जंगलों से है। पहले यह नदी बारहों मास बहती थी। इसलिए इसे सदानीरा कहा जाता है। किंतु अब कई स्थानों पर नदी सूखने लगी है। यही हाल रहा तो नदी का अस्तित्व समापन हो जाएगा। उधर, इस बाबत सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार का कहना है कि कठिना नदी का सिंचाई में उपयोग न होने और इसका बाढ़ पर प्रभाव न होने के कारण सिंचाई विभाग की ओर से इसकी सफाई आदि की कोई योजना नहीं है।
विज्ञापन


अनेक ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी है कठिना
कठिना नदी का ऐतिहासिक महत्व 1857 से जोड़ा जाता है, जो मितौली के राजा लोने सिंह और अवध की रानी बेगम हजरत महल द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत से शुरू होता है। नदी के उस पार से लछमिनिया तोप लगाकर राजा ने अंग्रेजों की सेना को कई दिन रोके रखा था। नदी के किनारे जंगलों के कारण क्रांतिकारी यहां डेरा डालते थे और मोटी लकड़ी पर तैरकर उस पार सुरक्षित पहुंच जाते थे। जनश्रुतियों के अनुसार पांडवों के धनुर्विद्या के गुरू द्रोणाचार्य इस नदी के संगम स्थल पर बख्तौली के करीब आश्रम बनाकर तपस्या की थी, जो कुतुबनगर के दक्षिण-पश्चिम आज भी द्रोणाघाट (दोनवा) के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस तरह नदी अनेक एतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही है। यह राजा महाराजाओं और अंग्रेज अफसरों की शिकारगाह भी रहे है। कठिना नदी के आसपास का जंगल। मोहम्मदी गोला रोड पर कठिना नदी पर ब्रिटिश काल के बना पुल आज भी यूरोपियन वास्तुकला की याद ताजा करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ओम के आकार में बहती है नदी
गोला गोकर्णनाथ। प्राचीन काल से सदानीरा कही जाने वाली कठिना नदी मोहम्मदी मार्ग पर अंग्रेज शासनकाल में बनवाए गए पुल के आगे जाकर ओम के आकार में बहती है। इसलिए इस नदी का धार्मिक महत्व है। कठिना नदी गोमती में और गोमती अंतत: गंगा नदी में विलीन हो जाती है।



कठिना को सूखने से बचाना होगा
मोहम्मदी-महेशपुर जंगल से होकर बहने वाली कठिना नदी जंगली जंतुओं और पक्षियों के लिए जीवनदायिनी है। इसमें बेंत के भी जंगल हैं, जो जलस्तर को गिराते हैं। चूंकि यह नदी इलाके में जलस्तर को बचाने में भी सहायक है। ऐसे में इस नदी का सूखना अत्यंत चिंतनीय है। परियोजना बनाकर उसे सूखने से बचाना होगा। क्योंकि जंगल की यह लाइफ लाइन सूखी तो परिणाम घातक होंगे।
मुकेश रायजादा, पर्यावरण विशेषज्ञ
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed