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जिला अस्पताल में सीएमओ ने चेक कराया दवाओं का स्टॉक
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जिला अस्पताल में दवाओं का स्टॉक चेक करते चीफ फार्मासिस्ट।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
मांग के अनुरूप बेहद कम मात्रा में मिली आपूर्ति, आला अफसरों को अवगत कराने के लिए सीएमएस से मांगा पत्र
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में दवाओं की कमी को लेकर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर सीएमओ ने बुधवार को दवाओं की मांग और आपूर्ति का स्टॉक चेक कराया, जिसमें काफी अंतर मिला। मांग के अनुरूप फ्लूड की करीब 20 एवं अन्य दवाओं की 30 से 40 प्रतिशत आपूर्ति मिली। इस पर सीएमओ ने डीजी को मौजूदा हालत से अवगत कराने के लिए सीएमएस से पत्र मांगा है।
दवाओं की कमी को लेकर अमर उजाला ने 16 सितंबर को ‘अस्पताल में दवाएं नहीं, तीमारदार बाहर से खरीदने को मजबूर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसको सीएमओ ने गंभीरता से लिया है। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय औषधि भंडार के चीफ फार्मासिस्ट आशुतोष अवस्थी एवं फार्मासिस्ट परमानंद को जिला अस्पताल भेजकर मांग के अनुरूप आपूर्ति चेक कराई। बताते हैं इसमें काफी अंतर मिला। डायरिया सहित अन्य बीमारियों में अधिकतर प्रयोग होने वाले फ्लूड की आपूर्ति 3000 के सापेक्ष सिर्फ 600 मिली। वह भी एक माह के लिए, जबकि जिला अस्पताल में रोजना 40 से 50 मरीज भर्ती होते हैं।
बता दें कि बारिश के मौसस में मरीजों की बढ़ती संख्या तीमारदारों से लेकर वार्ड स्टाफ के लिए मुसीबत बन गया है। वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए न तो पर्याप्त एंटीबॉयटिक मिल रही हैं और न ही इंजेक्शन और फ्लूड। इस कारण तीमारदार बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
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दवाओं की कमी को लेकर अमर उजाला ने 16 सितंबर को ‘अस्पताल में दवाएं नहीं, तीमारदार बाहर से खरीदने को मजबूर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसको सीएमओ ने गंभीरता से लिया है। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय औषधि भंडार के चीफ फार्मासिस्ट आशुतोष अवस्थी एवं फार्मासिस्ट परमानंद को जिला अस्पताल भेजकर मांग के अनुरूप आपूर्ति चेक कराई। बताते हैं इसमें काफी अंतर मिला। डायरिया सहित अन्य बीमारियों में अधिकतर प्रयोग होने वाले फ्लूड की आपूर्ति 3000 के सापेक्ष सिर्फ 600 मिली। वह भी एक माह के लिए, जबकि जिला अस्पताल में रोजना 40 से 50 मरीज भर्ती होते हैं।
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बता दें कि बारिश के मौसस में मरीजों की बढ़ती संख्या तीमारदारों से लेकर वार्ड स्टाफ के लिए मुसीबत बन गया है। वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए न तो पर्याप्त एंटीबॉयटिक मिल रही हैं और न ही इंजेक्शन और फ्लूड। इस कारण तीमारदार बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
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कुछ इस तरह वार्ड में दी जा रहीं दवाएं
- दवाएं- मांग, आपूर्ति
- डीएनएस-10, दो
- एनएस-10, 00
- आरएल-10,00
- डेक्सा (सांस संबंधी) -20, दो
- पेंटाप (गैस)-सात, एक
- डेरीफाइलिन (खांसी)-20,00
- जेंटा (एंटीबॉयटिक)-10,00
- एसीलॉक (गैस)-10,00
- एविल (एलर्जी)-10,00
- अमीकासिन (एंटीबॉयटिक)-10,00