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Lakhimpur Kheri News: बूंद-बूंद बचाने का दावा, धार-धार बहता पानी
Mon, 15 Jun 2026 12:54 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:54 AM IST
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विद्युत अधीक्षण अभियंता कार्यालय लखीमपुर में इस पाइप के माध्यम से बर्बाद होता है पानी। संवाद
लखीमपुर खीरी। जल संरक्षण को लेकर सरकारी स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। बूंद-बूंद पानी बचाने के संदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन जिले में वर्षा जल संरक्षण की जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई।
जिले में 70 से अधिक सरकारी भवनों की पड़ताल में सामने आया कि बड़ी संख्या में भवनों में या तो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं ही नहीं। जहां हैं भी, वहां रखरखाव के अभाव में उनकी उपयोगिता प्रभावित हो रही है। पड़ताल में 21 भवनों में वर्षा जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं मिली, जबकि 32 भवनों में सिस्टम तो लगे मिले, लेकिन उनकी सफाई नहीं कराई गई थी।
केवल 17 भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही स्थिति में और संचालित मिले। नियमों के अनुसार, सरकारी और निजी भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य है, ताकि बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बेहतर बनाया जा सके। इसके बावजूद कई विभाग इस व्यवस्था को लेकर गंभीर नजर नहीं आए।
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विकास भवन में दो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मिले, जो क्रियाशील पाए गए। यहां साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक मिली। बेसिक शिक्षा विभाग में सिस्टम तो मौजूद हैं, लेकिन सफाई का अभाव दिखा। डीआईओएस कार्यालय और रोडवेज बस स्टाफ भवन में निर्माण कार्य चलने के कारण सिस्टम उपयोगी नहीं मिले।
कलक्ट्रेट परिसर में तीन सिस्टम स्थापित हैं, लेकिन उनकी नियमित सफाई नहीं हुई। पाइपों में गंदगी भरी मिली। इस संबंध में नाजिर शमीम ने बताया कि पिछले वर्ष सफाई कराई गई थी और जल्द ही दोबारा सफाई कराई जाएगी।
गोला ब्लॉक में तीनों वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम संचालित मिले। जेई मनीष गिरि ने बताया कि सभी सिस्टम काम कर रहे हैं। गोला तहसील परिसर में भी व्यवस्था ठीक मिली। बेहजम ब्लॉक में सिस्टम मौजूद मिला, लेकिन सफाई का अभाव दिखाई दिया। बीडीओ शरद सिंह ने जल्द सफाई कराने की बात कही। धौरहरा नगर पंचायत कार्यालय में व्यवस्था ठीक मिली, लेकिन कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पाइपों में मिट्टी और कचरा भरा मिला। सीएचसी मोहम्मदी और बांकेगंज ब्लॉक में सिस्टम सही हालत में पाए गए।
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नालियों में बह जाता है पानी
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की नियमित सफाई और रखरखाव न होने से बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालियों में बह जाता है। इससे भूजल स्तर बढ़ाने का उद्देश्य प्रभावित होता है। बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन कई विभागों ने अब तक सिस्टम की सफाई और मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में वर्षा जल संरक्षण की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
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इन भवनों में नहीं मिली कोई व्यवस्था
पड़ताल के दौरान शहर के विद्युत अधीक्षण अभियंता कार्यालय, जिला पंचायत, उपायुक्त उद्योग कार्यालय, राजकीय पुस्तकालय, प्रतिरक्षण कार्यालय, टीबी अस्पताल, डायलिसिस सेंटर और सीएमओ कार्यालय में वर्षा जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं मिली। ग्रामीण क्षेत्र में पसगवां सीएचसी, पसगवां ब्लॉक, निघासन के रकेहटी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, खमरिया सीएचसी, मितौली सीएचसी, मितौली ब्लॉक कार्यालय और बेहजम सीएचसी समेत कई भवनों में भी वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं पाए गए। यहां हर साल बड़ी मात्रा में बारिश का पानी बिना संरक्षण के बह जाता है।
नियमों के मुताबिक किसी भी नए भवन के निर्माण का नक्शा तभी स्वीकृत होता है, जब वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने का प्रपत्र जमा किया जाए। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर बनाए रखना और जल संकट को कम करना है, लेकिन पड़ताल में कई नए भवन भी बिना वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के मिले।
-- -- -- -- -- -- -- -- रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जवाबदेही संबंधित कार्यदायी संस्था की है। जब भी कोई नया भवन बनता है, उसमें यह अनिवार्य रूप से बनाया जाना है, तभी उसकी एनओसी जारी होती है।
-श्याम सुंदर, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
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वर्षा जल संरक्षण को लेकर सभी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है। अगर कहीं व्यवस्था नहीं है तो संबंधितों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही तत्काल व्यवस्था कराई जाएगी।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ
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जिले में 70 से अधिक सरकारी भवनों की पड़ताल में सामने आया कि बड़ी संख्या में भवनों में या तो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं ही नहीं। जहां हैं भी, वहां रखरखाव के अभाव में उनकी उपयोगिता प्रभावित हो रही है। पड़ताल में 21 भवनों में वर्षा जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं मिली, जबकि 32 भवनों में सिस्टम तो लगे मिले, लेकिन उनकी सफाई नहीं कराई गई थी।
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केवल 17 भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही स्थिति में और संचालित मिले। नियमों के अनुसार, सरकारी और निजी भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य है, ताकि बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बेहतर बनाया जा सके। इसके बावजूद कई विभाग इस व्यवस्था को लेकर गंभीर नजर नहीं आए।
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विकास भवन में दो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मिले, जो क्रियाशील पाए गए। यहां साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक मिली। बेसिक शिक्षा विभाग में सिस्टम तो मौजूद हैं, लेकिन सफाई का अभाव दिखा। डीआईओएस कार्यालय और रोडवेज बस स्टाफ भवन में निर्माण कार्य चलने के कारण सिस्टम उपयोगी नहीं मिले।
कलक्ट्रेट परिसर में तीन सिस्टम स्थापित हैं, लेकिन उनकी नियमित सफाई नहीं हुई। पाइपों में गंदगी भरी मिली। इस संबंध में नाजिर शमीम ने बताया कि पिछले वर्ष सफाई कराई गई थी और जल्द ही दोबारा सफाई कराई जाएगी।
गोला ब्लॉक में तीनों वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम संचालित मिले। जेई मनीष गिरि ने बताया कि सभी सिस्टम काम कर रहे हैं। गोला तहसील परिसर में भी व्यवस्था ठीक मिली। बेहजम ब्लॉक में सिस्टम मौजूद मिला, लेकिन सफाई का अभाव दिखाई दिया। बीडीओ शरद सिंह ने जल्द सफाई कराने की बात कही। धौरहरा नगर पंचायत कार्यालय में व्यवस्था ठीक मिली, लेकिन कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पाइपों में मिट्टी और कचरा भरा मिला। सीएचसी मोहम्मदी और बांकेगंज ब्लॉक में सिस्टम सही हालत में पाए गए।
नालियों में बह जाता है पानी
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की नियमित सफाई और रखरखाव न होने से बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालियों में बह जाता है। इससे भूजल स्तर बढ़ाने का उद्देश्य प्रभावित होता है। बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन कई विभागों ने अब तक सिस्टम की सफाई और मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में वर्षा जल संरक्षण की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
इन भवनों में नहीं मिली कोई व्यवस्था
पड़ताल के दौरान शहर के विद्युत अधीक्षण अभियंता कार्यालय, जिला पंचायत, उपायुक्त उद्योग कार्यालय, राजकीय पुस्तकालय, प्रतिरक्षण कार्यालय, टीबी अस्पताल, डायलिसिस सेंटर और सीएमओ कार्यालय में वर्षा जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं मिली। ग्रामीण क्षेत्र में पसगवां सीएचसी, पसगवां ब्लॉक, निघासन के रकेहटी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, खमरिया सीएचसी, मितौली सीएचसी, मितौली ब्लॉक कार्यालय और बेहजम सीएचसी समेत कई भवनों में भी वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं पाए गए। यहां हर साल बड़ी मात्रा में बारिश का पानी बिना संरक्षण के बह जाता है।
नियमों के मुताबिक किसी भी नए भवन के निर्माण का नक्शा तभी स्वीकृत होता है, जब वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने का प्रपत्र जमा किया जाए। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर बनाए रखना और जल संकट को कम करना है, लेकिन पड़ताल में कई नए भवन भी बिना वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के मिले।
-श्याम सुंदर, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
वर्षा जल संरक्षण को लेकर सभी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है। अगर कहीं व्यवस्था नहीं है तो संबंधितों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही तत्काल व्यवस्था कराई जाएगी।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ

विद्युत अधीक्षण अभियंता कार्यालय लखीमपुर में इस पाइप के माध्यम से बर्बाद होता है पानी। संवाद

विद्युत अधीक्षण अभियंता कार्यालय लखीमपुर में इस पाइप के माध्यम से बर्बाद होता है पानी। संवाद