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Lakhimpur Kheri News: बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगाकर दुधवा के जंगल में छोड़ा
Sun, 31 Aug 2025 12:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:45 AM IST
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बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगाते पशु चिकित्सक,साथ में एफडी व डीएफओ। स्रोत-वन विभाग।
बांकेगंज। गोला वन रेंज के देबीपुर गांव से पकड़ी गई बरौंछा की हमलावर बाघिन को शुक्रवार रात दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया। गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया गया है।
गोला और मैलानी रेंज की सीमा पर पिछले पांच माह से भी ज्यादा समय से बाघिन सक्रिय थी। इस बीच वह एक बालक समेत 100 से अधिक पालतू पशुओं की जान ले चुकी थी। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए गोला रेंज के देबीपुर गांव के पास मंगलवार को पिंजरा लगाया और बकरी बांधी।
शिकार के लालच में वह बुधवार रात दो बजे लगाए गए पिंजरे में कैद हो गई। निगरानी कर रहे वनकर्मियों की सूचना पर पहुंचे साउथ खीरी डिवीजन के डीएफओ संजय बिश्वाल व रेंजर गोला संजीव तिवारी उसे गोला रेंज जंगल ले गए, जहां बफरजोन के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह स्वस्थ मिली।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मिलने के बाद जंगल में स्वछंद विचरण के लिए शुक्रवार को उसे दुधवा ले जाया गया। रात नौ बजे आजादी देने से पहले चिकित्सकों ने उसकी सेहत की जांच की। बेहोश करके उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया।
यह काम पशु चिकित्सकों और दुधवा टाइगर रिजर्व समेत दक्षिण खीरी वन प्रभाग के अधिकारियों की देखरेख में हुआ।
वहीं, बाघिन के साथ पिंजरे में कैद बकरी की मौत हो गई। इस मौके पर डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन, डीएफओ साउथ संजय बिश्वाल, डीडी दुधवा जगदीश आर, ट्रेनी आईएएस मनीषा धार्वे, वार्डेन दुधवा महावीर सिंह, रेंजर गोला संजीव तिवारी, दुधवा रीतेश पटेल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ रोहित रवी आदि मौजूद रहे।
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गोला और मैलानी रेंज की सीमा पर पिछले पांच माह से भी ज्यादा समय से बाघिन सक्रिय थी। इस बीच वह एक बालक समेत 100 से अधिक पालतू पशुओं की जान ले चुकी थी। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए गोला रेंज के देबीपुर गांव के पास मंगलवार को पिंजरा लगाया और बकरी बांधी।
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शिकार के लालच में वह बुधवार रात दो बजे लगाए गए पिंजरे में कैद हो गई। निगरानी कर रहे वनकर्मियों की सूचना पर पहुंचे साउथ खीरी डिवीजन के डीएफओ संजय बिश्वाल व रेंजर गोला संजीव तिवारी उसे गोला रेंज जंगल ले गए, जहां बफरजोन के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह स्वस्थ मिली।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मिलने के बाद जंगल में स्वछंद विचरण के लिए शुक्रवार को उसे दुधवा ले जाया गया। रात नौ बजे आजादी देने से पहले चिकित्सकों ने उसकी सेहत की जांच की। बेहोश करके उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया।
यह काम पशु चिकित्सकों और दुधवा टाइगर रिजर्व समेत दक्षिण खीरी वन प्रभाग के अधिकारियों की देखरेख में हुआ।
वहीं, बाघिन के साथ पिंजरे में कैद बकरी की मौत हो गई। इस मौके पर डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन, डीएफओ साउथ संजय बिश्वाल, डीडी दुधवा जगदीश आर, ट्रेनी आईएएस मनीषा धार्वे, वार्डेन दुधवा महावीर सिंह, रेंजर गोला संजीव तिवारी, दुधवा रीतेश पटेल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ रोहित रवी आदि मौजूद रहे।