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Lakhimpur Kheri News: बनबसा बैराज से छोड़ा गया 80 हजार क्यूसेक से अधिक पानी
Sat, 26 Sep 2026 11:33 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 26 Sep 2026 11:33 PM IST
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झंडीगांव में दीपशंकर मिश्र के घर के अंदर और बाहर भरा पानी। स्रोत: ग्रामीण
निघासन। पिछले 48 घंटे से हो रही लगातार बारिश के बीच शनिवार को बनबसा बैराज से 80 हजार क्यूसेक से अधिक पानी शारदा नदी में छोड़ा गया। इससे शारदा, मोहाना और नेपाली कर्णाली नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने 72 घंटे तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश और तेज हवा से गन्ना, धान और केले की फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। खेतों में पानी भरने और फसलों के गिरने की आशंका है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जलस्तर अभी स्थिर नहीं है और लगातार बढ़ रहा है। बैराज से छोड़ा गया पानी अगले 10 से 12 घंटे में जिले के पलिया, निघासन और धौरहरा समेत मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।
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एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत राजस्व टीम को अलर्ट कर दिया गया है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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मौसम विभाग ने 72 घंटे तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश और तेज हवा से गन्ना, धान और केले की फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। खेतों में पानी भरने और फसलों के गिरने की आशंका है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जलस्तर अभी स्थिर नहीं है और लगातार बढ़ रहा है। बैराज से छोड़ा गया पानी अगले 10 से 12 घंटे में जिले के पलिया, निघासन और धौरहरा समेत मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।
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एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत राजस्व टीम को अलर्ट कर दिया गया है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।