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खुद को बचाइये आप, फसलें बचा रहे बाघ

Sat, 01 Dec 2018 09:59 PM IST
Updated Sat, 01 Dec 2018 09:59 PM IST
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खुद को बचाइये आप, फसलें बचा रहे बाघ

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खुद को बचाइये आप, फसलें बचा रहे बाघ

बांकेगंज। जंगल से सटे इलाके में बाघों की खेतों में आमद से किसान भले ही दहशत में हों लेकिन अधिकांश किसान यह मानते हैं कि बाघ और तेंदुए उनकी फसलों को बचा रहे हैं। जिस समय बाघ और तेंदुए खेतों में होते हैं उस समय न तो शाकाहारी वन्यजीव खेतों की तरफ फटकते हैं, न नीलगाय और छुट्टा पशु। यही नहीं खेतों से फसलों की चोरी का भी डर नहीं रहता।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के अंतर्गत बाघ सुरक्षा माह में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ग्रामीणों को यह बात समझाने की कोशिश कर रहे हैं। जंगल के आसपास जब से गन्ने की खेती में इजाफा हुआ है तबसे जंगल से निकलकर बाघों के आने की घटनाएं भी बढ़ीं हैं। गन्ना काटने के दौरान प्राय: बाघ के हमले में लोग घायल हो जाते हैं। कभी-कभी उन्हें जान से भी हाथ धोना पड़ता है। इससे लोगों में भी गुस्सा बढ़ रहा है, और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। बांकेगंज कस्बा के किसान प्रेम सिंह उर्फ नग्गू का कहना है कि यह कहना गलत है बाघ और तेेंदुए इंसानों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि बाघ और तेंदुओं से किसानों का अच्छा मित्र दूसरा कोई नहीं। जंगल से सटे इलाके में तो बाघ और तेंदुए ही शाकाहारी जीवों से फसल की सुरक्षा करते हैं।
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किसान गोल्डी गोयल का कहना है कि बाघ और तेंदुए न केवल शाकाहारी जीवों से फसल बचाते हैं बल्कि फसल चोरों से भी रक्षा करते हैं। इसी क्रम में किसान विपिन शर्मा का कहना है कि बाघ और तेंदुए कभी अकारण हमला नहीं करते। थोड़ी सी सावधानी बरतें तो फसल की सुरक्षा करने वाले बाघ और तेंदुओं से अपना बचाव किया जा सकता है। बाघ या तेंदुए को यह न लगे कि आप उसको नुकसान पहुंचाएंगे तो वह भी आप को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल कहते हैं कि जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को वन्यजीवों के साथ मित्रवत सामंजस्य बनाना होगा। जंगल से सटे इलाके के किसान गन्ने की फसल के बजाय दूसरी फसलें बोने को प्राथमिकता दें, ताकि बाघ जंगल से बाहर न निकलें। उनका कहना है कि जंगल के किनारे गन्ना न बोने से बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। गन्ना काटने के पहले यदि ग्रामीण समूह बनाकर हांका लगा दें तो खेत में यदि बाघ या तेंदुआ मौजूद भी है तो वहां से हट जाएगा। डीडी का कहना है कि जंगल से सटे इलाके में रहने वाले लोग फसलों की सुरक्षा का दायित्व बाघ और तेंदुओं पर छोड़कर खुद अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत रहें।


वर्जन......
आदिकाल से ही मानव और वन्यजीव के बीच मैत्रीवत सामंजस्य रहा है। हाथी को गणेश के रूप में तो बाघों को मां दुर्गा के वाहन के रूप में पूजा जाता है। जंगल में रहने वाले ऋषि मुनियों के साथ वन्यजीव इस तरह घुल मिलकर रहते थे,कि वे ऋषियों के आश्रम का एक हिस्सा बन जाते थे। यह गौरव की बात है कि खीरी, पीलीभीत और बहराइच जिले वन्यजीवों से भरपूर हैं। इस प्राकृतिक विरासत की रक्षा करना हमारा दायित्व ही नहीं धर्म भी है।
- डॉ. रमेश कुमार पांडेय ,फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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