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मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे ने क्यों ठुकराया पानी और इलाज? आठवें दिन भी अनशन जारी; सरकार को दी चेतावनी
Sat, 05 Sep 2026 04:58 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, जालना
पीटीआई, जालना
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 05 Sep 2026 04:58 PM IST
सार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे का आंदोलन महाराष्ट्र के जालना में आठवें दिन भी जारी है। उन्होंने सरकार पर पहले दिए गए आश्वासनों को लागू नहीं करने का आरोप लगाते हुए पानी और चिकित्सा सुविधा लेने से इनकार कर दिया है। जरांगे का कहना है कि करीब 58 लाख मराठों से जुड़े रिकॉर्ड, हैदराबाद गजट और ग्रामीणों तक आरक्षण की जानकारी पहुंचाने से जुड़े आश्वासन पर काम शुरू नहीं हुआ।
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मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे का आंदोलन शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। उन्होंने आंदोलन और तेज करते हुए पानी पीने और चिकित्सा उपचार लेने से भी इनकार कर दिया। जरांगे का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें दिए गए आश्वासनों को जमीन पर लागू नहीं किया है।
सवाल: जरांगे ने पानी और इलाज लेने से इनकार क्यों किया?
जवाब: जरांगे ने कहा कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को जमीन पर लागू नहीं करती, तब तक वह कुछ भी नहीं लेंगे और किसी तरह का इलाज भी नहीं कराएंगे।
जवाब: जरांगे के अनुसार, महायुति सरकार ने करीब 58 लाख मराठों से जुड़े रिकॉर्ड पर काम शुरू करने का आश्वासन दिया था। इसका उद्देश्य सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में समुदाय को आरक्षण उपलब्ध कराना था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस दिशा में अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
सवाल: हैदराबाद गजट को लेकर जरांगे की क्या शिकायत है?
जवाब: जरांगे ने दावा किया कि हैदराबाद गजट से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण से जुड़ी जानकारी ग्रामीणों तक सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से पहुंचाने का सरकार का आश्वासन भी लागू नहीं हुआ है।
सवाल: सरकार ने आंदोलन खत्म करने के लिए क्या कहा था?
जवाब: सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने पहले कहा था कि जरांगे की मांगों पर फैसला एक-दो दिन में उन्हें बता दिया जाएगा। हालांकि, जरांगे का कहना है कि मांगें लागू होने तक वह आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
सवाल: मुंबई जाने को लेकर जरांगे का क्या रुख है?
जवाब: जरांगे ने अपना रुख दोहराते हुए कहा है कि अगर उनकी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो वह 12 सितंबर को मुंबई जाएंगे। उन्होंने 12 सितंबर तक पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा सरकारी निर्णय (जीआर) जारी करने की मांग की है।
सवाल: कुनबी प्रमाणपत्र से मराठों को क्या लाभ मिलेगा?
जवाब: जरांगे की मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं। इससे समुदाय के सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण का लाभ ले सकेंगे।
सवाल: सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से कब मुलाकात की थी?
जवाब: गुरुवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की थी। इसमें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत, विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड तथा विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य बिगड़ने का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। विखे पाटिल ने कहा था कि सरकार ने करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे हैं और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
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सवाल: जरांगे ने पानी और इलाज लेने से इनकार क्यों किया?
जवाब: जरांगे ने कहा कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को जमीन पर लागू नहीं करती, तब तक वह कुछ भी नहीं लेंगे और किसी तरह का इलाज भी नहीं कराएंगे।
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- अंतरवाली सराटी में प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टरों की टीम ने जरांगे की जांच करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेडिकल जांच कराने से भी इनकार कर दिया। इससे पहले सप्ताह में राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल की अपील के बाद वह पानी और नस के जरिये तरल लेने पर सहमत हुए थे।
- जरांगे ने कहा, "जब तक सरकार हमारी सभी मांगों को जमीन पर लागू नहीं करती, मैं कुछ भी नहीं लूंगा और कोई इलाज भी नहीं कराऊंगा।" मेडिकल टीम ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
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जवाब: जरांगे के अनुसार, महायुति सरकार ने करीब 58 लाख मराठों से जुड़े रिकॉर्ड पर काम शुरू करने का आश्वासन दिया था। इसका उद्देश्य सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में समुदाय को आरक्षण उपलब्ध कराना था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस दिशा में अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
सवाल: हैदराबाद गजट को लेकर जरांगे की क्या शिकायत है?
जवाब: जरांगे ने दावा किया कि हैदराबाद गजट से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण से जुड़ी जानकारी ग्रामीणों तक सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से पहुंचाने का सरकार का आश्वासन भी लागू नहीं हुआ है।
सवाल: सरकार ने आंदोलन खत्म करने के लिए क्या कहा था?
जवाब: सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने पहले कहा था कि जरांगे की मांगों पर फैसला एक-दो दिन में उन्हें बता दिया जाएगा। हालांकि, जरांगे का कहना है कि मांगें लागू होने तक वह आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
सवाल: मुंबई जाने को लेकर जरांगे का क्या रुख है?
जवाब: जरांगे ने अपना रुख दोहराते हुए कहा है कि अगर उनकी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो वह 12 सितंबर को मुंबई जाएंगे। उन्होंने 12 सितंबर तक पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा सरकारी निर्णय (जीआर) जारी करने की मांग की है।
सवाल: कुनबी प्रमाणपत्र से मराठों को क्या लाभ मिलेगा?
जवाब: जरांगे की मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं। इससे समुदाय के सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण का लाभ ले सकेंगे।
सवाल: सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से कब मुलाकात की थी?
जवाब: गुरुवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की थी। इसमें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत, विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड तथा विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य बिगड़ने का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। विखे पाटिल ने कहा था कि सरकार ने करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे हैं और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।