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गांवों को ओडीएफ बनाने के दावे फेल, वीडीओ को नोटिस
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लखीमपुर खीरी। गांवों को ओडीएफ करने की मुहिम जिस रफ्तार से चलाई गई, उसी रफ्तार से गड़बड़ी की परते उधड़ने लगी हैं। ताजा मामला निघासन ब्लॉक के ग्राम पंचायत सिंगहा कला का सामने आया है, जहां शौचालय आधे-अधूरे बने हैं। मानकों को दरकिनार करते हुए दर्जनों शौचालयों में दो के बजाय एक गड्ढा बनाया गया, तो सैकड़ों शौचालयों में चैंबर ही नहीं बने हैं। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने ग्राम विकास अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा है। साथ ही अधूरे शौचालयों के चलते 30,27,450 रुपये की वसूली वेतन से करने की चेतावनी दी है।
निघासन ब्लाक की ग्राम पंचायत सिंगहा कला का डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने 18 फरवरी 2019 को निरीक्षण किया था, जिसमें अधिकांश शौचालयों में कमियां मिलीं। इसके बाद डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत के निर्देशन में खंड प्रेरक, डीआरजी सदस्यों की टीम गठित करके स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए सभी शौचालयों का सत्यापन कराया। टीम ने डीपीआरओ को आख्या भेजी है, जिसमें सैकड़ों शौचालय आधे-अधूरे बना होना बताया गया है। डीपीआरओ ने बताया कि 107 शौचालयों में सीट नहीं लगाई गई। 283 शौचालयों में रूरल पैन का प्रयोग नहीं किया गया है। सात शौचालय पुराने बने थे, जिनकी रंगाई-पुताई करके धनराशि खर्च कर दी गई। 138 शौचालयों में पिट कवर नहीं पाए गए हैं। इसी तरह शौचालयों में पानी की टंकी, चैंबर, टाइल्स नहीं लगाए गए और 761 शौचालयों में एलजीडी कोडिंग नहीं हुई है। 431 शौचालयों में एक ही गड्ढा बना है, जबकि नियमानुसार दो बनाने चाहिए। छह शौचालयों का निर्माण प्रारंभ नहीं कराया गया, जबकि धनराशि निकाली जा चुकी है। डीपीआरओ ने अधोमानक और मानकविहीन शौचालयों के निर्माण के लिए ग्राम विकास अधिकारी अनिल वर्मा को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया है। उधर, ग्राम विकास अधिकारी अनिल वर्मा ने बताया है कि धन का दुरुपयोग नहीं किया गया है। शौचालय बनाने के लिए पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में दिया गया था। लाभार्थियों को शौचालय पूर्ण कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वच्छताग्राही और खंड प्रेरक की भूमिका सवालों में
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत इस बार शौचालय का उपयोग करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम चलाई जा रही है, जिसके स्वच्छाग्राहियों, खंड प्रेरक, ब्लाक रिसोर्स पर्सन (बीआरजी) और जिला रिसोर्स पर्सन (डीआरजी) की नियुक्तियां की गई हैं। शासनादेश के मुताबिक शौचालय बनवाने के लिए सीधे लाभार्थियों के खाते में 12 हजार रुपये दिए गए, लेकिन जागरूकता के अभाव में लाभार्थियों के शौचालय अधोमानक ही रह गए। सारा ठीकरा ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के सिर फूट पर फूट रहा है, जबकि स्वच्छताग्रही, खंड प्रेरक आदि की भूमिका सवालों के घेरे में हैं।
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अधोमानक शौचालयों में मिली कमियों के आधार पर करीब 30 लाख रुपये का दुरुपयोग पाया गया है। सचिव को नोटिस देकर तीन दिन में साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न होने पर धनराशि की वसूली भू-राजस्व की भांति सचिव के वेतन से की जाएगी।
- चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
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निघासन ब्लाक की ग्राम पंचायत सिंगहा कला का डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने 18 फरवरी 2019 को निरीक्षण किया था, जिसमें अधिकांश शौचालयों में कमियां मिलीं। इसके बाद डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत के निर्देशन में खंड प्रेरक, डीआरजी सदस्यों की टीम गठित करके स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए सभी शौचालयों का सत्यापन कराया। टीम ने डीपीआरओ को आख्या भेजी है, जिसमें सैकड़ों शौचालय आधे-अधूरे बना होना बताया गया है। डीपीआरओ ने बताया कि 107 शौचालयों में सीट नहीं लगाई गई। 283 शौचालयों में रूरल पैन का प्रयोग नहीं किया गया है। सात शौचालय पुराने बने थे, जिनकी रंगाई-पुताई करके धनराशि खर्च कर दी गई। 138 शौचालयों में पिट कवर नहीं पाए गए हैं। इसी तरह शौचालयों में पानी की टंकी, चैंबर, टाइल्स नहीं लगाए गए और 761 शौचालयों में एलजीडी कोडिंग नहीं हुई है। 431 शौचालयों में एक ही गड्ढा बना है, जबकि नियमानुसार दो बनाने चाहिए। छह शौचालयों का निर्माण प्रारंभ नहीं कराया गया, जबकि धनराशि निकाली जा चुकी है। डीपीआरओ ने अधोमानक और मानकविहीन शौचालयों के निर्माण के लिए ग्राम विकास अधिकारी अनिल वर्मा को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया है। उधर, ग्राम विकास अधिकारी अनिल वर्मा ने बताया है कि धन का दुरुपयोग नहीं किया गया है। शौचालय बनाने के लिए पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में दिया गया था। लाभार्थियों को शौचालय पूर्ण कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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स्वच्छताग्राही और खंड प्रेरक की भूमिका सवालों में
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत इस बार शौचालय का उपयोग करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम चलाई जा रही है, जिसके स्वच्छाग्राहियों, खंड प्रेरक, ब्लाक रिसोर्स पर्सन (बीआरजी) और जिला रिसोर्स पर्सन (डीआरजी) की नियुक्तियां की गई हैं। शासनादेश के मुताबिक शौचालय बनवाने के लिए सीधे लाभार्थियों के खाते में 12 हजार रुपये दिए गए, लेकिन जागरूकता के अभाव में लाभार्थियों के शौचालय अधोमानक ही रह गए। सारा ठीकरा ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के सिर फूट पर फूट रहा है, जबकि स्वच्छताग्रही, खंड प्रेरक आदि की भूमिका सवालों के घेरे में हैं।
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अधोमानक शौचालयों में मिली कमियों के आधार पर करीब 30 लाख रुपये का दुरुपयोग पाया गया है। सचिव को नोटिस देकर तीन दिन में साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न होने पर धनराशि की वसूली भू-राजस्व की भांति सचिव के वेतन से की जाएगी।
- चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ