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प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान तो ग्रामीणों ने खुद बनाना शुरू किया बंधा
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:28 PM IST
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प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान तो ग्रामीणों ने खुद बनाना शुरू किया बंधा
पलियाकलां। मलिनियां में कई साल पहले ग्रामीणों के सहयोग से सुहेली नदी का कटान रोकने के उद्देश्य से बंधे का निर्माण किया गया था। यह बंधा लगभग कई गांवों में बाढ़ का पानी जाने से रोकता है। बीते दिनों शारदा तथा सुहेली नदी बढ़ने के बाद बाढ़ से बंधा कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। जिस पर एसडीएम सुनन्दू सुधाकरन मौके पर पहुंचे और नाव पर बैठकर बंधे का जायजा लिया। लेखपाल को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं हुई। विवश होकर ग्रामीणों ने खुद ही बंधे से रिस रहे पानी को बंद करने का निर्णय लिया और फावड़ा आदि लेकर मिट्टी खोदकर बंधे को पाटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि यह बंधा लगभग तीन किलोमीटर का है। करीब दस जगह से पानी का रिसाव हो रहा है। यही नहीं बंधे के कटने पर बल्लीपुर से मझगईं सहित लगभग दो दर्जन गांव चपेट में आते हैं। आरोप है कि बंधे की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है। कोई सहायता भी नहीं की जा रही है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रिंकू सिंह ने बताया कि उनकी तरफ से गोताखोर तो लगाए गए हैं, लेकिन प्रशासन अगर उनके भुगतान के साथ ही उनकी संख्या बढ़ा दे तो जल्द ही बंधे का निर्माण हो जाएगा।
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प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान तो ग्रामीणों ने खुद बनाना शुरू किया बंधा
पलियाकलां। मलिनियां में कई साल पहले ग्रामीणों के सहयोग से सुहेली नदी का कटान रोकने के उद्देश्य से बंधे का निर्माण किया गया था। यह बंधा लगभग कई गांवों में बाढ़ का पानी जाने से रोकता है। बीते दिनों शारदा तथा सुहेली नदी बढ़ने के बाद बाढ़ से बंधा कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। जिस पर एसडीएम सुनन्दू सुधाकरन मौके पर पहुंचे और नाव पर बैठकर बंधे का जायजा लिया। लेखपाल को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं हुई। विवश होकर ग्रामीणों ने खुद ही बंधे से रिस रहे पानी को बंद करने का निर्णय लिया और फावड़ा आदि लेकर मिट्टी खोदकर बंधे को पाटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि यह बंधा लगभग तीन किलोमीटर का है। करीब दस जगह से पानी का रिसाव हो रहा है। यही नहीं बंधे के कटने पर बल्लीपुर से मझगईं सहित लगभग दो दर्जन गांव चपेट में आते हैं। आरोप है कि बंधे की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है। कोई सहायता भी नहीं की जा रही है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रिंकू सिंह ने बताया कि उनकी तरफ से गोताखोर तो लगाए गए हैं, लेकिन प्रशासन अगर उनके भुगतान के साथ ही उनकी संख्या बढ़ा दे तो जल्द ही बंधे का निर्माण हो जाएगा।