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राज्य कर्मियों का मांगों के निदान को लेकर प्रदर्शन
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:21 PM IST
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राज्य कर्मियों का मांगों के निदान को लेकर प्रदर्शन
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को नसीरूद्दीन मौजी मैदान में इकठ्ठा हुए राज्य कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना देकर मुख्यमंत्री को संबोधित 18 सूत्रीय मांग पत्र सदर एसडीएम को सौंपा।
इस दौरान राज्य कर्मचारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष महंत सिंह ने कहा कि प्रांतीय नेतृत्व शासन में बैठे अधिकारियों से मिलकर कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण की मांग करता रहा है, लेकिन अभी तक अधिकारियों ने मांगों पर संज्ञान तक नहीं लिया। इससे कर्मचारियों और प्रांतीय नेतृत्व पदाधिकारियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए प्रांतीय नेतृत्व द्वारा एक दिवसीय धरने का निर्णय लिया गया। मंत्री परमानंद ने कहा कि यदि हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो दस सितंबर को प्रांतीय नेतृत्व द्वारा अगले बड़े आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान डॉ. एके कनौजिया, अवधेश बाजपेई, रामराखन मिश्रा, रजनी मसीह, अवधेश वर्मा, डॉ. सज्ज्न गौड़, डॉ. सरिता गुप्ता, राजेश श्रीवास्तव, आरके पांडे आदि मौजूद रहे।
ये हैं मांगे
- छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को दूर कर सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए।
- केंद्रीय कर्मचारियों की भांति समस्त भत्तों में समानता मिले।
- डिप्लोमा इंजीनियर की भांति राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के 4600 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल को इग्नोर करते हुए 4800 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल वेतनमान दिया जाए।
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- सीधी भर्ती की अधिकतम आयु 40 वर्ष को देखते हुए 8,16 व 24 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य किया जाए।
- रिटायर होने पर 300 दिन के अवकाश नकदीकरण को बढ़ाकर 600 दिन किया जाए।
- परिवहन निगम के कर्मचारियों की लंबित मांगों का निराकरण हो।
- परिवहन निगम का बस का बेड़ा बढ़ाकर 15000 किया जाए।
- 50 वर्ष के आयु वालों का जबरन रिटायरमेंट बंद किया जाए।
- राज्य कर्मचारियों की अधिवर्षता 62 वर्ष की जाए।
- मान्यता प्राप्त सेवा संगठनों के अध्यक्ष व मंत्री को परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा दी जाए।
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इस दौरान राज्य कर्मचारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष महंत सिंह ने कहा कि प्रांतीय नेतृत्व शासन में बैठे अधिकारियों से मिलकर कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण की मांग करता रहा है, लेकिन अभी तक अधिकारियों ने मांगों पर संज्ञान तक नहीं लिया। इससे कर्मचारियों और प्रांतीय नेतृत्व पदाधिकारियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए प्रांतीय नेतृत्व द्वारा एक दिवसीय धरने का निर्णय लिया गया। मंत्री परमानंद ने कहा कि यदि हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो दस सितंबर को प्रांतीय नेतृत्व द्वारा अगले बड़े आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान डॉ. एके कनौजिया, अवधेश बाजपेई, रामराखन मिश्रा, रजनी मसीह, अवधेश वर्मा, डॉ. सज्ज्न गौड़, डॉ. सरिता गुप्ता, राजेश श्रीवास्तव, आरके पांडे आदि मौजूद रहे।
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ये हैं मांगे
- छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को दूर कर सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए।
- केंद्रीय कर्मचारियों की भांति समस्त भत्तों में समानता मिले।
- डिप्लोमा इंजीनियर की भांति राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के 4600 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल को इग्नोर करते हुए 4800 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल वेतनमान दिया जाए।
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- सीधी भर्ती की अधिकतम आयु 40 वर्ष को देखते हुए 8,16 व 24 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य किया जाए।
- रिटायर होने पर 300 दिन के अवकाश नकदीकरण को बढ़ाकर 600 दिन किया जाए।
- परिवहन निगम के कर्मचारियों की लंबित मांगों का निराकरण हो।
- परिवहन निगम का बस का बेड़ा बढ़ाकर 15000 किया जाए।
- 50 वर्ष के आयु वालों का जबरन रिटायरमेंट बंद किया जाए।
- राज्य कर्मचारियों की अधिवर्षता 62 वर्ष की जाए।
- मान्यता प्राप्त सेवा संगठनों के अध्यक्ष व मंत्री को परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा दी जाए।