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ब्राडगेज नहीं होगी मैलानी बहराइच मीटर गेज, ईको टूरिज्म के आएगी काम
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:15 AM IST
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ब्राडगेज नहीं होगी मैलानी-बहराइच मीटर गेज
क्रासर.....
ईको टूरिज्म के आएगी काम, वन विभाग के प्रस्ताव पर रेलवे ने लगाई मुहर
इस रूट पर अक्सर ट्रेन की चपेट में आकर मौत का शिकार होते हैं वन्यजीव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मैलानी-बहराइच रेल प्रखंड पर करीब 205 किलोमीटर लंबी मीटरगेज (छोटी लाइन) रेलवे लाइन अब ब्राडगेज में नहीं बदली जाएगी। इस रेल लाइन को ईको टूरिज्म के लिए विकसित किया जाएगा। वन विभाग के प्रस्ताव को हरी झंडी देते हुए रेलवे बोर्ड ने इस रूट को ब्राडगेज में परिवर्तित करने का निर्णय टाल दिया है। इस रूट पर ईको ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है।
प्रदेश के इकलौते दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों से होकर मैलानी बहराइच के बीच ट्रेनों का संचालन होता रहा है। हरे भरे जंगलों के बीच से ट्रेन के गुजरने से यात्रियों को जहां जंगल का प्राकृतिक नजारा देखने का मिलता है। वहीं जंगली जानवरों के भी दीदार हो जाते हैं, लेकिन यह रेलवे लाइन वन जीवों के लिए खतरे की लकीर बन चुकी है। दुधवा नेशनल पार्क और कर्तनिया घाट की स्थापना होने के बाद से इस रूट पर सौ से अधिक दुर्लभ वन्य जीव ट्रेनों की चपेट में आकर मौत का शिकार हो चुके हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व इस लाइन को हटाने की मांग लंबे अरसे से करता आ रहा है। इस मामले में उच्च न्यायालय में भी एक याचिका लंबित है।
इस दौरान रेलवे ने भी इस रूट को ब्राडगेज करने का निर्णय लिया था, लेकिन वन विभाग ने जंगल की खूबसूरती को बचाने और ईको टूरिज्म विकसित करने के लिए रेलवे बोर्ड से इसे ब्राडगेज न करने का अनुरोध किया था। इस पर रेलवे बोर्ड ने वन विभाग के प्रस्ताव पर ब्राडगेज न करने का निर्णय लेकर रूट को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए अन्य वैकल्पिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
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आकर्षित होंगे पर्यटक
कर्तनिया घाट और दुधवा नेशनल पार्क जंगलों के बीचों बींच से निकली रेललाइन पर ईको ट्रेन चलने से यहां आने वाले सैलानी जंगल के बड़े हिस्से में प्राकृतिक नजारे और वन्य जीवों को देख सकेंगे। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
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30 किलोमीटर प्रतिघंटा से भी कम रफ्तार में चलेगीं ट्रेनें
ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होने पर इस रूट पर ट्रेनें 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कम पर ही चलेंगी। ट्रेनों का संचालन मुख्य रूप से पर्यटकों के लिए होगा। इसके विकसित होते ही इस रूट के स्टेशनों को भी विकसित किया जाएगा।
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शिकारियों पर भी लग सकेगी लगाम
ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होने पर इस रूट पर पर्यटकों की आवाजाही भी खासी रहेगी और दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को भी जंगल की निगरानी करने में आसानी होगी। इससे शिकारियों की घुसपैठ पर अंकुश लगेगा। इसी के साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी सुरक्षित रहेगा।
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वर्जन
बहराइच-मैलानी रेल प्रखंड ब्राडगेज में परिवर्तित नहीं होगा। पर्यटकों के लिए रेलवे इस रूट पर ईको ट्रेन लगाएगी। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए जंगल को बाईपास कर ब्राडगेज रेलवे लाइन विछाई जाएगी।
संजय यादव, पीआरओ गोरखपुर
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क्रासर.....
ईको टूरिज्म के आएगी काम, वन विभाग के प्रस्ताव पर रेलवे ने लगाई मुहर
इस रूट पर अक्सर ट्रेन की चपेट में आकर मौत का शिकार होते हैं वन्यजीव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मैलानी-बहराइच रेल प्रखंड पर करीब 205 किलोमीटर लंबी मीटरगेज (छोटी लाइन) रेलवे लाइन अब ब्राडगेज में नहीं बदली जाएगी। इस रेल लाइन को ईको टूरिज्म के लिए विकसित किया जाएगा। वन विभाग के प्रस्ताव को हरी झंडी देते हुए रेलवे बोर्ड ने इस रूट को ब्राडगेज में परिवर्तित करने का निर्णय टाल दिया है। इस रूट पर ईको ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है।
प्रदेश के इकलौते दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों से होकर मैलानी बहराइच के बीच ट्रेनों का संचालन होता रहा है। हरे भरे जंगलों के बीच से ट्रेन के गुजरने से यात्रियों को जहां जंगल का प्राकृतिक नजारा देखने का मिलता है। वहीं जंगली जानवरों के भी दीदार हो जाते हैं, लेकिन यह रेलवे लाइन वन जीवों के लिए खतरे की लकीर बन चुकी है। दुधवा नेशनल पार्क और कर्तनिया घाट की स्थापना होने के बाद से इस रूट पर सौ से अधिक दुर्लभ वन्य जीव ट्रेनों की चपेट में आकर मौत का शिकार हो चुके हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व इस लाइन को हटाने की मांग लंबे अरसे से करता आ रहा है। इस मामले में उच्च न्यायालय में भी एक याचिका लंबित है।
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इस दौरान रेलवे ने भी इस रूट को ब्राडगेज करने का निर्णय लिया था, लेकिन वन विभाग ने जंगल की खूबसूरती को बचाने और ईको टूरिज्म विकसित करने के लिए रेलवे बोर्ड से इसे ब्राडगेज न करने का अनुरोध किया था। इस पर रेलवे बोर्ड ने वन विभाग के प्रस्ताव पर ब्राडगेज न करने का निर्णय लेकर रूट को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए अन्य वैकल्पिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
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आकर्षित होंगे पर्यटक
कर्तनिया घाट और दुधवा नेशनल पार्क जंगलों के बीचों बींच से निकली रेललाइन पर ईको ट्रेन चलने से यहां आने वाले सैलानी जंगल के बड़े हिस्से में प्राकृतिक नजारे और वन्य जीवों को देख सकेंगे। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
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30 किलोमीटर प्रतिघंटा से भी कम रफ्तार में चलेगीं ट्रेनें
ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होने पर इस रूट पर ट्रेनें 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कम पर ही चलेंगी। ट्रेनों का संचालन मुख्य रूप से पर्यटकों के लिए होगा। इसके विकसित होते ही इस रूट के स्टेशनों को भी विकसित किया जाएगा।
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शिकारियों पर भी लग सकेगी लगाम
ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होने पर इस रूट पर पर्यटकों की आवाजाही भी खासी रहेगी और दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को भी जंगल की निगरानी करने में आसानी होगी। इससे शिकारियों की घुसपैठ पर अंकुश लगेगा। इसी के साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी सुरक्षित रहेगा।
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वर्जन
बहराइच-मैलानी रेल प्रखंड ब्राडगेज में परिवर्तित नहीं होगा। पर्यटकों के लिए रेलवे इस रूट पर ईको ट्रेन लगाएगी। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए जंगल को बाईपास कर ब्राडगेज रेलवे लाइन विछाई जाएगी।
संजय यादव, पीआरओ गोरखपुर