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10 हजार से अधिक पेड़ कटने के बाद होगा हाईवे का चौड़ीकरण
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लखीमपुर खीरी। पीलीभीत-बस्ती नेशनल हाईवे पर शहर समेत कसबों में डिवाइडर के साथ फोरलेन बनेगी। इससे शहर और कसबों में करीब 16 मीटर चौड़ी सड़क बनेगी, जबकि आबादी के बाहर वाले क्षेत्र में यह सड़क अब दस मीटर चौड़ी हो जाएगी। जिले में करीब 120 किलोमीटर की इस सड़क पर करीब 213 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें 10 हजार 226 पेड़ कटेंगे। वहीं पेड़ कटान और पेड़ लगाने से लेकर उन्हें बचाने तक पर आने वाला करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान भी वन विभाग के खाते में लोनिवि को करना होगा।
पीलीभीत-बस्ती नेशनल हाइवे की शुरुआत शाहजहांपुर के खुटार बार्डर से होती है, जो बहराइच जिले के सिसैया कसबे तक का मार्ग करीब 120 किलोमीटर लंबा है। यह सड़क खुटार और सिसैया बार्डर तक बन चुकी है, लेकिन लखीमपुर जिले में वन विभाग की एनओसी न मिलने के कारण इसका निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा था। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पांच मार्च की बैठक में महज इसलिए एनओसी नहीं दी थी, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि इस दूरी में काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या कितनी है। इस पर कितना व्यय होगा और पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगाने की क्या व्यवस्था की जाएगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (नेशनल हाइवे डिवीजन) गिरिजेश कुमार के अनुुसार इस बार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सभी सवालों को तैयार कर लिया गया था। बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस रास्ते में 10 हजार 226 पेड़ कटेंगे। इन पेड़ों को काटने और इनके स्थान पर नई पौध लगाने और उनके संरक्षण पर करीब दो करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसे लोक निर्माण विभाग वन महकमे में जमा करेगा। इसी शर्त पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एनओसी दी है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी, दिल्ली की कंपनी को मिला है ठेका
एनएच डिवीजन के सहायक अभियंता श्रीराम राय ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में विभाग स्तर से सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली की कंपनी एसएनपी एंड बालाजी इंटरप्राइजेज के नाम जिले में इस सड़क को बनाने का टेंडर हुआ है। वन विभाग को पैसा आदि जमा होने और कार्य कराने का आदेश मिलते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। उनका कहना है कि इस कार्य में एक से डेढ़ महीने का समय लगेगा।
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जानलेवा हैं नेशनल हाईवे पर बने गड्ढे
इंडो नेपाल बॉर्डर को जोड़ने वाली असम रोड की हालत पिछले तीन सालों से जर्जर है। इस पर बहराइच बार्डर पर लखीमपुर जिले के कसबा सिसैया से लेकर लखीमपुर तक और फिर गोला तक इतने बड़े बड़े गहरे गड्ढे हैं कि अनेक हादसे हो चुके हैं। दो साल में करीब सौ से अधिक जानें जा चुकी हैं। लखीमपुर से फरधान के बीच 15 किलोमीटर के रास्ते में गड्ढों के कारण वाहन 15 से 20 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन चलते हैं। सड़क पर इतने बड़े- बड़े गड्ढे बन गए हैं कि लोगों का निकलना मुश्किल है। अब लोगों को उम्मीद बंधी है कि सड़क बनने से इस मार्ग पर यात्रा सुगम हो जाएगी।
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पीलीभीत-बस्ती नेशनल हाइवे की शुरुआत शाहजहांपुर के खुटार बार्डर से होती है, जो बहराइच जिले के सिसैया कसबे तक का मार्ग करीब 120 किलोमीटर लंबा है। यह सड़क खुटार और सिसैया बार्डर तक बन चुकी है, लेकिन लखीमपुर जिले में वन विभाग की एनओसी न मिलने के कारण इसका निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा था। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पांच मार्च की बैठक में महज इसलिए एनओसी नहीं दी थी, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि इस दूरी में काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या कितनी है। इस पर कितना व्यय होगा और पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगाने की क्या व्यवस्था की जाएगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (नेशनल हाइवे डिवीजन) गिरिजेश कुमार के अनुुसार इस बार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सभी सवालों को तैयार कर लिया गया था। बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस रास्ते में 10 हजार 226 पेड़ कटेंगे। इन पेड़ों को काटने और इनके स्थान पर नई पौध लगाने और उनके संरक्षण पर करीब दो करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसे लोक निर्माण विभाग वन महकमे में जमा करेगा। इसी शर्त पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एनओसी दी है।
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टेंडर प्रक्रिया पूरी, दिल्ली की कंपनी को मिला है ठेका
एनएच डिवीजन के सहायक अभियंता श्रीराम राय ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में विभाग स्तर से सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली की कंपनी एसएनपी एंड बालाजी इंटरप्राइजेज के नाम जिले में इस सड़क को बनाने का टेंडर हुआ है। वन विभाग को पैसा आदि जमा होने और कार्य कराने का आदेश मिलते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। उनका कहना है कि इस कार्य में एक से डेढ़ महीने का समय लगेगा।
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जानलेवा हैं नेशनल हाईवे पर बने गड्ढे
इंडो नेपाल बॉर्डर को जोड़ने वाली असम रोड की हालत पिछले तीन सालों से जर्जर है। इस पर बहराइच बार्डर पर लखीमपुर जिले के कसबा सिसैया से लेकर लखीमपुर तक और फिर गोला तक इतने बड़े बड़े गहरे गड्ढे हैं कि अनेक हादसे हो चुके हैं। दो साल में करीब सौ से अधिक जानें जा चुकी हैं। लखीमपुर से फरधान के बीच 15 किलोमीटर के रास्ते में गड्ढों के कारण वाहन 15 से 20 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन चलते हैं। सड़क पर इतने बड़े- बड़े गड्ढे बन गए हैं कि लोगों का निकलना मुश्किल है। अब लोगों को उम्मीद बंधी है कि सड़क बनने से इस मार्ग पर यात्रा सुगम हो जाएगी।