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पैसेंजर ट्रेनों का सहारा, एक्सप्रेस ट्रेनों का इंतजार
Wed, 06 Mar 2019 11:36 PM IST
राकेश पांडेय
kushhinagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Wed, 06 Mar 2019 11:36 PM IST
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पडरौना रेलवे स्टेशन।
- फोटो : amar ujala
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पडरौना। कप्तानगंज-थावे रेलखंड पर यात्रियों की दुश्वारियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आमान परिवर्तन के आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी इस रूट पर एक एक्सप्रेस ट्रेन को छोड़ पैसेंजर ट्रेनों का ही संचालन किया जाता है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत अन्य बड़े महानगरों को जाने के लिए यात्रियों को गोरखपुर जंक्शन जाना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
16 दिसंबर 2011 को कप्तानगंज-थावे रेलखंड को मीटरगेज से ब्रॉडगेज में तब्दील कर दिया गया। बड़ी रेल लाइन बनने के बाद इस रूट पर चलने वाले यात्रियों में यह उम्मीद जगी कि अब उन्हें लंबी दूरी की यात्रा करने में काफी आसानी होगी, लेकिन उनकी इस उम्मीद पर पानी फिर गया। आठ वर्ष बीतने के बाद भी इस रेलखंड पर चार फेरों के लिए पैसेंजर व सप्ताह में तीन दिन के लिए एकमात्र लखनऊ-छपरा एक्सप्रेस ट्रेन का ही संचालन किया जाता है। लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन कराने को लेकर यहां के राजनैतिक दलों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार रेलवे के जीएम को पत्र भी सौंपा। न तो इस रूट पर रेलवे के अधिकारियों की नजर पड़ी और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की। ऐसे में बड़े महानगरों को जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने बताया कि कप्तानगंज-थावे रेलखंड पर विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है। कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
यात्रियों ने बयां की पीड़ा
सतीश मद्धेशिया का कहना है कि कप्तानगंज-थावे रेलखंड पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन न होने से काफी परेशानी होती है। बड़े महानगरों में जाने के लिए गोरखपुर या बिहार के सीवान से ट्रेन में बैठना पड़ता है। वासुकी गुप्ता का कहना है कि व्यवसाय के दृष्टिकोण से यह रेलखंड काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इस पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन न होने से दिक्कतें होती हैं। इससे समय और अधिक किराया देकर उन्हें गोरखपुर जाना पड़ता है। राजेश वर्मा का कहना है कि बड़ी रेल लाइन बनने के बाद काफी उम्मीदें थीं कि यहां से बड़े शहरों को जाने के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। रेलवे के अधिकारियों को इस रूट पर ध्यान देना चाहिए। बबलू शाही का कहना है कि अगर इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाता, तो रेलवे को भी आय में वृद्धि होती और यात्रियों को भी गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होती।
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16 दिसंबर 2011 को कप्तानगंज-थावे रेलखंड को मीटरगेज से ब्रॉडगेज में तब्दील कर दिया गया। बड़ी रेल लाइन बनने के बाद इस रूट पर चलने वाले यात्रियों में यह उम्मीद जगी कि अब उन्हें लंबी दूरी की यात्रा करने में काफी आसानी होगी, लेकिन उनकी इस उम्मीद पर पानी फिर गया। आठ वर्ष बीतने के बाद भी इस रेलखंड पर चार फेरों के लिए पैसेंजर व सप्ताह में तीन दिन के लिए एकमात्र लखनऊ-छपरा एक्सप्रेस ट्रेन का ही संचालन किया जाता है। लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन कराने को लेकर यहां के राजनैतिक दलों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार रेलवे के जीएम को पत्र भी सौंपा। न तो इस रूट पर रेलवे के अधिकारियों की नजर पड़ी और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की। ऐसे में बड़े महानगरों को जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने बताया कि कप्तानगंज-थावे रेलखंड पर विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है। कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
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यात्रियों ने बयां की पीड़ा
सतीश मद्धेशिया का कहना है कि कप्तानगंज-थावे रेलखंड पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन न होने से काफी परेशानी होती है। बड़े महानगरों में जाने के लिए गोरखपुर या बिहार के सीवान से ट्रेन में बैठना पड़ता है। वासुकी गुप्ता का कहना है कि व्यवसाय के दृष्टिकोण से यह रेलखंड काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इस पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन न होने से दिक्कतें होती हैं। इससे समय और अधिक किराया देकर उन्हें गोरखपुर जाना पड़ता है। राजेश वर्मा का कहना है कि बड़ी रेल लाइन बनने के बाद काफी उम्मीदें थीं कि यहां से बड़े शहरों को जाने के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। रेलवे के अधिकारियों को इस रूट पर ध्यान देना चाहिए। बबलू शाही का कहना है कि अगर इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाता, तो रेलवे को भी आय में वृद्धि होती और यात्रियों को भी गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होती।
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