नेपाल से कुशीनगर आ रहे शव: सैलाब के नौ दिन बीतने पर दूषित पानी से बीमार पड़ रहे लोग, अब हैजा फैलने का भी खतरा
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नेपाल में आई आपदा ने भारत के सीमांत इलाकों में रहने वालों के दिलों की धड़कन तेज कर दी है। एसडीआरएफ और पुलिस वाहनों के हूटर बजते ही ऐसा लगता मानों पानी का प्रवाह और तेज होकर गांव की ओर बढ़ रहा हो। उधर नेपाल से पानी के साथ बहकर आए इंसानों और जानवों के शवों, सीवरेज और अन्य दूषित सामग्री ने पूरे क्षेत्र में दुर्गंध पैदा कर दी है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। कमोबेश ऐसे ही हालात कुशीनगर के सेवराही, दुदही और महाराजगंज के निचलौल व शिकारपुर के भी हैं। लगातार बढ़ रही दुर्गंध ने क्षेत्र के कई लोगों को बीमार कर दिया है। हांलाकि स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में हैजा जैसी खतरनाक बीमारी फैलने की भी आशंका जताई है।
सब्जियां संक्रमित, मछली खाने पर भी लगी है रोक
पूरे क्षेत्र में दूषित पानी आने से खेतों में लगी सब्जियां भी संक्रमित हो गईं हैं। इसको खाने वाले लोग बीमार हो रहे हैं। खड्डा निवासी वधु कुमार बताते हैं कि क्षेत्र में भिंडी की फसल ठीक-ठाक मात्रा में है। खेतों में पानी भरने के कारण भिंडी दूषित हो गई है। ऐसे में जो भी लोग इसे खा रहे हैं उनको पेट में दर्द, उल्टी, डायरिया और बुखार की शिकायत आ रही है। इसे अलावा पिछले दिनों बाढ़ के पानी के साथ मछलियां बहकर आईं थीं। लोगों ने बड़ी संख्या में मछलियां पकड़ीं। उनको खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ गई।
लापता भारतीयों की पहचान के लिए रिश्तेदारों के डीएनए से मिलान
नेपाल में आई भीषण बाढ़ में लापता हुए भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उब उनका मिलान भारत में रहने वाले रिश्तेदारों के डीएनए से होगी। भारत में रहने वाले प्रथम-श्रेणी के जैविक रिश्तेदार (माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन) अब पहचान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए देश भर की मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में अपने डीएनए नमूने दे सकते हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार नमूनों की ऑटोसोमल एसटीआर प्रोफाइलिंग की जाएगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे मिलान के लिए नेपाल पुलिस के ईमेल और समन्वय हेतु भारतीय दूतावास पर भेजा जा सकता है। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर +977 98416160 95 भी जारी किया गया है।
जोखिम पूरे हिमालयी क्षेत्र को... नेपाल ने फिर मांगा जलवायु फंड
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र बदल रहा है, यह नेपाल और वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ी चेतावनी का संकेत है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक घटना है और खतरे की जद में सिर्फ नेपाल ही नहीं पूरा हिमालयी क्षेत्र और निचले इलाके हैं। आपदा का जोखिम हमेशा बना हुआ है। इसलिए, पेरिस समझौते के आधार पर, नेपाल जैसे देश को जलवायु फंड मिलना चाहिए ताकि हम भविष्य के जोखिमों को रोक सकें।
अब तक 1,259 लोगों की गई जान, 5,083 लापता
पॉकेट मनी और नाश्ते के पैसे बचाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे स्कूली बच्चे : मदद छोटी या बड़ी नहीं होता, बल्कि इसके पीछे की भावना मायने रखती है। दूसरों का दुख बांटने के लिए इंसानियत सबसे ऊपर होती है। नेपाल के इन स्कूली बच्चों ने इस कहावत को साबित कर दिखाया है। विभिन्न जिलों के स्कूली बच्चे अपनी छोटी-छोटी बचत और पॉकेट मनी बचाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। यहां तक की गुल्लक के पैसों को भी दान कर दिया है।
नेपाल का पानी बढ़ा रहा बिहार की धड़कन, 8 जिलों में अलर्ट
नेपाल में लगातार बारिश और बाढ़ का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। गंडक नदी के बढ़ते प्रवाह के बीच भारत-नेपाल सीमा के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से बुधवार को करीब 1.83 लाख क्यूसेक (1,83,400 क्यूसेक) पानी छोड़ा गया। इससे बिहार और यूपी के कुशीनगर व आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर और बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है। बिहार में गंडक और कोसी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। बृहस्पतिवार को राज्य की आठ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं और 13 जिलों में बाढ़ का असर बताया गया। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, गंगा कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर थीं।