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बेरहम लपटों से दो घरों की गृहस्थी राख
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2016 11:53 PM IST
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संदिग्ध परिस्थितियों में मंगलवार की दोपहर सरसवां गांव के दो घरों में आग लग गई। इससे खाद्यान्न, बर्तन, कपड़े, बिस्तर समेत गृहस्थी का सारा सामान राख हो गया। घर से उठती लपटें देख जुटे ग्रामीण और पहुंचे दमकलकर्मियों ने घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। आग से करीब दो लाख रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
सरसवां गांव का बाबूलाल सरोज सोमवार को टेंवा गांव अपने रिश्तेदार के यहां शादी में शामिल होने आया था। जबकि पत्नी और बच्चे घर में ताला लगाकर जजौली गांव ननिहाल गए हुए थे। मंगलवार को दिन में करीब 2 बजे अचानक उसके बंद मकान में आग लग गई। घर से उठती लपटें और धुएं का गुबार देख गांव में हड़कंप मच गया। चीखते-चिल्लाते ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मकान बंद देख लोगों ने बाहर से आग बुझाने की कोशिश शुरू की। हालांकि चिलचिलाती धूप और चल रही हवाओं के कारण ग्रामीण आग नहीं बुझा पा रहे थे। उधर, बेकाबू होती लपटें देख घबराए ग्रामीणों ने इसकी जानकारी फायर स्टेशन को दी। गांव पहुंचे दमकलकर्मी और ग्रामीण जब तक आग बुझा पाते। बेकाबू लपटें बाबूलाल का पूरा घर राख करके पड़ोसी सीताराम के मकान को भी अपनी चपेट में ले चुकी थीं। करीब दो घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। पर, तब तक बाबूलाल के घर के अलावा भीतर रखा खाद्यान्न, कपड़े, बर्तन, बिस्तर समेत पूरी गृहस्थी राख हो चुकी थी। वहीं सीताराम को भी घर में आग लगने से हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। घर में आग लगने की सूचना लगते ही बाबूलाल भागकर गांव पहुंचा। घर, गृहस्थी राख में तब्दील देख उसके होश उड़ गए।
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सरसवां गांव का बाबूलाल सरोज सोमवार को टेंवा गांव अपने रिश्तेदार के यहां शादी में शामिल होने आया था। जबकि पत्नी और बच्चे घर में ताला लगाकर जजौली गांव ननिहाल गए हुए थे। मंगलवार को दिन में करीब 2 बजे अचानक उसके बंद मकान में आग लग गई। घर से उठती लपटें और धुएं का गुबार देख गांव में हड़कंप मच गया। चीखते-चिल्लाते ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मकान बंद देख लोगों ने बाहर से आग बुझाने की कोशिश शुरू की। हालांकि चिलचिलाती धूप और चल रही हवाओं के कारण ग्रामीण आग नहीं बुझा पा रहे थे। उधर, बेकाबू होती लपटें देख घबराए ग्रामीणों ने इसकी जानकारी फायर स्टेशन को दी। गांव पहुंचे दमकलकर्मी और ग्रामीण जब तक आग बुझा पाते। बेकाबू लपटें बाबूलाल का पूरा घर राख करके पड़ोसी सीताराम के मकान को भी अपनी चपेट में ले चुकी थीं। करीब दो घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। पर, तब तक बाबूलाल के घर के अलावा भीतर रखा खाद्यान्न, कपड़े, बर्तन, बिस्तर समेत पूरी गृहस्थी राख हो चुकी थी। वहीं सीताराम को भी घर में आग लगने से हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। घर में आग लगने की सूचना लगते ही बाबूलाल भागकर गांव पहुंचा। घर, गृहस्थी राख में तब्दील देख उसके होश उड़ गए।
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