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अस्पतालों में 24 घंटे डॉक्टर, जरूरी दवाएं रखने का निर्देश
Updated Wed, 05 Sep 2018 12:54 AM IST
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नेवादा/पश्चिमशरीरा। मध्य प्रदेश की बेतवा नदी से यमुना व कानपुर बैराज से गंगा में मंगलवार को भी लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके चलते दोआबा में दोनों नदियां उफान पर हैं। 24 घंटे के दौरान करीब 1.40 मीटर जलस्तर बढ़ गया है। लगातार हो रही जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए कछारी इलाके करीब छह गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उपजिलाधिकारियों ने संभावित इन गांवों का दौरा किया। साथ मातहतों को राहत व बचाव के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।
पहाड़ों के साथ ही मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर नदियों में साफ दिख रहा है। मध्यप्रदेश की बेतवा नदी में बाढ़ के कारण यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके निरंजन ने बताया कि मंगलवार सुबह आठ बजे नैनी में यमुना का जलस्तर करीब 1.40 मीटर बढने से जलस्तर 80.94 मीटर हो गया है। खतरे के निशान 84.73 मीटर से दूरी तक पहुंची यमुना का पानी कौशाम्बी में कभी भी तबाही मचा सकता है। यहां तराई में बसे पिपरहटा, मल्हीपुर, केवट का पुरवा, ढेरहा, निगहा, मवई, मल्हीपुर, जमुनापुर, दलेलागंज, तिवारी का पुरवा आदि गांवों बाढ़ के मुहाने पर हैं। इन गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल यमुना के पानी से जलमगभन भी हो गई है। एसडीएम चायल अनिल चतुर्वेदी ने सोमवार को संभावित बाढ़ को देखते हुए पिपरहटा और नंदा का पुरवा गांव का दौरा कर स्थिति का आंकलन किया। एसडीएम ने तराई क्षेत्र में संचालित अस्पतालों में 24 घंटे डॉक्टर और दवाओं की उपलब्धता का निर्देश दिया।
जीवन रक्षक दवाओं के साथ सर्पदंश से बचाव के इंजेक्शन को भी हर वक्त स्टोर में रखने के लिए कहा। उन्होंने बाढ़ चौकियों में तैनात कर्मचारियों, नाविकों, गोताखोरों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया। ताकि बाढ़ आने पर राहत व बचाव कार्यों में देरी न हो। इसी तरह से गंगा में भी मंगलवार सुबह आठ बजे तक कानपुर बैराज से करीब 4,33,487 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से जलस्तर 81.28 मीटर पहुंच गया। 24 घंटे के दौरान गंगा में भी तकरीबन 69 सेमी पानी बढ़ने से तरसौरा, हिसामपुर परसखी, कंथुआ आदि गांव बाढ़ के मुहाने पर आ गए हैं। कड़ा में कुबरी घाट अकबरपुर, असदपुर, जहांगीराबाद आदि घाटों की पक्की सीढ़ियां डूब गई हैं। एसडीएम ज्योति मौर्या ने भी तराई के गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया।
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पहाड़ों के साथ ही मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर नदियों में साफ दिख रहा है। मध्यप्रदेश की बेतवा नदी में बाढ़ के कारण यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके निरंजन ने बताया कि मंगलवार सुबह आठ बजे नैनी में यमुना का जलस्तर करीब 1.40 मीटर बढने से जलस्तर 80.94 मीटर हो गया है। खतरे के निशान 84.73 मीटर से दूरी तक पहुंची यमुना का पानी कौशाम्बी में कभी भी तबाही मचा सकता है। यहां तराई में बसे पिपरहटा, मल्हीपुर, केवट का पुरवा, ढेरहा, निगहा, मवई, मल्हीपुर, जमुनापुर, दलेलागंज, तिवारी का पुरवा आदि गांवों बाढ़ के मुहाने पर हैं। इन गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल यमुना के पानी से जलमगभन भी हो गई है। एसडीएम चायल अनिल चतुर्वेदी ने सोमवार को संभावित बाढ़ को देखते हुए पिपरहटा और नंदा का पुरवा गांव का दौरा कर स्थिति का आंकलन किया। एसडीएम ने तराई क्षेत्र में संचालित अस्पतालों में 24 घंटे डॉक्टर और दवाओं की उपलब्धता का निर्देश दिया।
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जीवन रक्षक दवाओं के साथ सर्पदंश से बचाव के इंजेक्शन को भी हर वक्त स्टोर में रखने के लिए कहा। उन्होंने बाढ़ चौकियों में तैनात कर्मचारियों, नाविकों, गोताखोरों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया। ताकि बाढ़ आने पर राहत व बचाव कार्यों में देरी न हो। इसी तरह से गंगा में भी मंगलवार सुबह आठ बजे तक कानपुर बैराज से करीब 4,33,487 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से जलस्तर 81.28 मीटर पहुंच गया। 24 घंटे के दौरान गंगा में भी तकरीबन 69 सेमी पानी बढ़ने से तरसौरा, हिसामपुर परसखी, कंथुआ आदि गांव बाढ़ के मुहाने पर आ गए हैं। कड़ा में कुबरी घाट अकबरपुर, असदपुर, जहांगीराबाद आदि घाटों की पक्की सीढ़ियां डूब गई हैं। एसडीएम ज्योति मौर्या ने भी तराई के गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया।
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