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तस्करी के लिए पकड़े गए करोड़ों के कछुए बरामद
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तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 32 कछुए बरामद
कड़ा कोतवाली पुलिस ने अफजलपुर सातों गंगा घाट से पकड़ा
एक गिरफ्तार, फरार चार तस्करों की तलाश में जुटी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
कड़ा (कौशाम्बी)। कड़ा धाम कोतवाली पुलिस ने रविवार सुबह गंगा नदी के अफजलपुर सातों घाट से तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 32 कछुए बरामद किए। इनमें से 14 की मौत हो गई। मौके से एक तस्कर को भी पकड़ा गया। बाकी चार फरार हो गए। उनकी तलाश की जा रही है।
कड़ा कोतवाल बलराम सिंह को रविवार सुबह सूचना मिली कि अफजलपुर सातों गंगा घाट पर तस्करों ने कछुओं को पकड़कर रखा है। खबर मिलते ही फोर्स के साथ दबिश देकर उन्होंने शिवानंद पासवान पुत्र महाराजदीन निवासी सिराथू को गिरफ्तार कर लिया। उसके चार साथी पुलिस को देखते ही नाव से कूदकर फरार हो गए। नाव से करीब 32 कछुए बरामद हुए। बताया जाता है कि बाजार में कछुए की खाल और खासकर खोपड़ी करीब 25 हजार रुपये प्रति किलो बिकती है। । हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई सटीक कीमत नहीं बता पा रहा है। बाद में चोटिल होने और भूख के कारण 14 कछुओं की मौत को गई। जीवित कछुओं को फिलहाल कड़ा कोतवाली के सामने गड्ढा खुदवाकर उसी में रखवाया गया है। उधर, कछुओं की बरामदगी की खबर मिलते ही एसडीएम सिराथू ज्योति मौर्य व सीओ रामवीर सिंह वन विभाग तथा पशु चिकित्सकों की टीम के साथ कड़ा पहुंचे। लिखापढ़ी के बाद कछुओं को वन विभाग के हवाले कर दिया गया है। मामले में गिरफ्तार आरोपी को नामजद करते हुए चार अज्ञात के खिलाफ भी एफआईआर लिखी गई है। पकड़े गए तस्कर को जेल भेज दिया गया है। वह ये नहीं बता सका कि कछुओं को कहां ले जाकर बेचने की तैयारी थी।
48 घंटे की भूख और कटिया की चोट ने ली जान
मंझनपुर। तस्करों के चंगुल से बरामद किए गए 14 कछुओं की जान करीब 24 घंटे की भूख और कटिया की चोट ने ली। मृत जीवों का पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम ने यह दावा किया है।
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कछुओं की बरामदगी के बाद एसडीएम सिराथू ज्योति मौर्य के निर्देश पर वन विभाग के अफसर तथा पशु चिकित्सक मौके पर पहुंच गए थे। चिकित्सकों ने मृत सभी 14 कछुओं का पोस्टमार्टम किया। बाद में बताया कि कछुए करीब 24 घंटे से भूखे थे। उसने शरीर पर कटिया के घाव भी थे। इसी की वजह से जान गई है। जीवित कछुओं का इलाज किया जा रहा है। स्वस्थ्य होने के बाद वन विभाग उन्हें गंगा अथवा यमुना नदी में फिर से बीच धारा में लेजाकर छोड़ेगा। उधर, पीएम रिपोर्ट में भूख की बात सामने आने के बाद साफ हो गया है कि तस्करों ने कछुओं को दो-तीन से पकड़कर रखा था। इसके बाद वह और शिकार करने की कोशिश कर रहे थे।
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गोलगोल जवाब देता रहा शिवानंद
मंझनपुर। पुलिस की पूछताछ में पकड़ा गया तस्कर शिवानंद गोलगोल जवाब देता रहा। उसने ये तक नहीं बताया कि कछुओं को कब कहां से पकड़ा गया। इन्हें कहां, किसके हाथ बेचने की योजना थी। शिवानंद के मुताबिक रविवार सुबह ही वह घाट की तरफ गया था। तभी उसे उसके परिचित तस्कर मिल गए और वह उनके साथ हो लिया। पुलिस का कहना है कि फरार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद बाकी जानकारी मिल सकेगी।
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मछली मारने की आड़ में होती है कछुओं की तस्करी
कड़ा। धाम क्षेत्र के गंगा घाटों पर कछुओं की तस्करी का खेल सालों से चल रहा है। तस्कर मछली मारने की आड़ में कछुओं को पकड़ते हैं। बाद में मोटी कीमत वसूलकर इन्हें बेच देते हैं।
कड़ा इलाके के लोगों ने बताया कि कुबरी, कालेश्वर, अफजलपुर सातों, बाजार आदि घाटों पर सालों से अंजान लोग आते हैं। प्रतिदिन तो नहीं, पर महीने में चार से छह बार इनका आना-जाना होता है। पूछने पर ये लोग मछली मारने की बात कहते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि कछु़ओं को पकड़ते हैं। कछुओं के शिकार का काम सुबह भोर या फिर शाम को सूर्यास्त के बाद किया जाता है। ताकि घाट पर अधिक भीड़ नहीं रहे। ग्रामीणों ने तो यह तक बताया कि इसकी जानकारी कई बार पुलिस को दी गई। पर, पुलिस ने कार्रवाई करना ठीक नहीं समझा। कड़ा कोतवाल ने अभी हफ्ते भर पहले ही पदभार संभाला है। उन्हें खबर मिली तो उन्होंने कार्रवाई कर दी। पूर्व के कोतवालों की तस्करों से क्या सांठगांठ थी ? इस बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा है।
फोटो नं-11,12
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कड़ा कोतवाली पुलिस ने अफजलपुर सातों गंगा घाट से पकड़ा
एक गिरफ्तार, फरार चार तस्करों की तलाश में जुटी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
कड़ा (कौशाम्बी)। कड़ा धाम कोतवाली पुलिस ने रविवार सुबह गंगा नदी के अफजलपुर सातों घाट से तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 32 कछुए बरामद किए। इनमें से 14 की मौत हो गई। मौके से एक तस्कर को भी पकड़ा गया। बाकी चार फरार हो गए। उनकी तलाश की जा रही है।
कड़ा कोतवाल बलराम सिंह को रविवार सुबह सूचना मिली कि अफजलपुर सातों गंगा घाट पर तस्करों ने कछुओं को पकड़कर रखा है। खबर मिलते ही फोर्स के साथ दबिश देकर उन्होंने शिवानंद पासवान पुत्र महाराजदीन निवासी सिराथू को गिरफ्तार कर लिया। उसके चार साथी पुलिस को देखते ही नाव से कूदकर फरार हो गए। नाव से करीब 32 कछुए बरामद हुए। बताया जाता है कि बाजार में कछुए की खाल और खासकर खोपड़ी करीब 25 हजार रुपये प्रति किलो बिकती है। । हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई सटीक कीमत नहीं बता पा रहा है। बाद में चोटिल होने और भूख के कारण 14 कछुओं की मौत को गई। जीवित कछुओं को फिलहाल कड़ा कोतवाली के सामने गड्ढा खुदवाकर उसी में रखवाया गया है। उधर, कछुओं की बरामदगी की खबर मिलते ही एसडीएम सिराथू ज्योति मौर्य व सीओ रामवीर सिंह वन विभाग तथा पशु चिकित्सकों की टीम के साथ कड़ा पहुंचे। लिखापढ़ी के बाद कछुओं को वन विभाग के हवाले कर दिया गया है। मामले में गिरफ्तार आरोपी को नामजद करते हुए चार अज्ञात के खिलाफ भी एफआईआर लिखी गई है। पकड़े गए तस्कर को जेल भेज दिया गया है। वह ये नहीं बता सका कि कछुओं को कहां ले जाकर बेचने की तैयारी थी।
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48 घंटे की भूख और कटिया की चोट ने ली जान
मंझनपुर। तस्करों के चंगुल से बरामद किए गए 14 कछुओं की जान करीब 24 घंटे की भूख और कटिया की चोट ने ली। मृत जीवों का पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम ने यह दावा किया है।
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कछुओं की बरामदगी के बाद एसडीएम सिराथू ज्योति मौर्य के निर्देश पर वन विभाग के अफसर तथा पशु चिकित्सक मौके पर पहुंच गए थे। चिकित्सकों ने मृत सभी 14 कछुओं का पोस्टमार्टम किया। बाद में बताया कि कछुए करीब 24 घंटे से भूखे थे। उसने शरीर पर कटिया के घाव भी थे। इसी की वजह से जान गई है। जीवित कछुओं का इलाज किया जा रहा है। स्वस्थ्य होने के बाद वन विभाग उन्हें गंगा अथवा यमुना नदी में फिर से बीच धारा में लेजाकर छोड़ेगा। उधर, पीएम रिपोर्ट में भूख की बात सामने आने के बाद साफ हो गया है कि तस्करों ने कछुओं को दो-तीन से पकड़कर रखा था। इसके बाद वह और शिकार करने की कोशिश कर रहे थे।
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गोलगोल जवाब देता रहा शिवानंद
मंझनपुर। पुलिस की पूछताछ में पकड़ा गया तस्कर शिवानंद गोलगोल जवाब देता रहा। उसने ये तक नहीं बताया कि कछुओं को कब कहां से पकड़ा गया। इन्हें कहां, किसके हाथ बेचने की योजना थी। शिवानंद के मुताबिक रविवार सुबह ही वह घाट की तरफ गया था। तभी उसे उसके परिचित तस्कर मिल गए और वह उनके साथ हो लिया। पुलिस का कहना है कि फरार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद बाकी जानकारी मिल सकेगी।
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मछली मारने की आड़ में होती है कछुओं की तस्करी
कड़ा। धाम क्षेत्र के गंगा घाटों पर कछुओं की तस्करी का खेल सालों से चल रहा है। तस्कर मछली मारने की आड़ में कछुओं को पकड़ते हैं। बाद में मोटी कीमत वसूलकर इन्हें बेच देते हैं।
कड़ा इलाके के लोगों ने बताया कि कुबरी, कालेश्वर, अफजलपुर सातों, बाजार आदि घाटों पर सालों से अंजान लोग आते हैं। प्रतिदिन तो नहीं, पर महीने में चार से छह बार इनका आना-जाना होता है। पूछने पर ये लोग मछली मारने की बात कहते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि कछु़ओं को पकड़ते हैं। कछुओं के शिकार का काम सुबह भोर या फिर शाम को सूर्यास्त के बाद किया जाता है। ताकि घाट पर अधिक भीड़ नहीं रहे। ग्रामीणों ने तो यह तक बताया कि इसकी जानकारी कई बार पुलिस को दी गई। पर, पुलिस ने कार्रवाई करना ठीक नहीं समझा। कड़ा कोतवाल ने अभी हफ्ते भर पहले ही पदभार संभाला है। उन्हें खबर मिली तो उन्होंने कार्रवाई कर दी। पूर्व के कोतवालों की तस्करों से क्या सांठगांठ थी ? इस बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा है।
फोटो नं-11,12