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उर्सला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से वेंटिलेटर ठप, मरीज परेशान
Sat, 13 Apr 2019 10:57 PM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 13 Apr 2019 10:57 PM IST
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उर्सला हॉस्पिटल कानपुर
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उर्सला हॉस्पिटल के आईसीयू में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से वेंटिलेटर ठप हुए हैं। वेंटिलेटर न मिलने से दो मरीजों की जान जा चुकी है। आईसीयू में लगे छह वेंटिलेटर की मरम्मत के लिए कभी शासन को प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। शासन ने साइरिक्स कंपनी को अस्पतालों के उपकरण खराब होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी दे रखी है। जब सारे वेंटिलेटर ठप हो गए तो दो वेंटिलेटर को कंपनी को मरम्मत के लिए दिया गया है। अस्पताल अगर पहले यह व्यवस्था करता तो यह स्थिति ही न आती। अस्पताल प्रबंधन और कंपनी के बीच तालमेल नहीं रहा।
शनिवार को अधिकारियों ने आईसीयू की स्थिति देखी। उर्सला आईसीयू में छह वेंटिलेटर लगे हैं। ये अलग-अलग कंपनियों के हैं। इनकी मरम्मत की जिम्मेदारी साइरिक्स कंपनी की है। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर जिस कंपनी का होता है, उसे उसी कंपनी के पास मरम्मत के लिए भेजा जाता है। वेंटिलेटर जब तक चलता रहता है तो कंपनी जल्दी से रिपेयर के लिए राजी हो जाती है, बंद हो जाने पर ना-नुकुर करती है।
आईसीयू के मामले में भी यही हुआ। जब तक वेंटिलेटर चलते रहे, अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जब बंद हो गए तो कंपनी वाले नखरे दिखाने लगे और एक के बाद दूसरा वेंटिलेटर खराब होता गया। स्थिति बिगड़ने पर साइरिक्स कंपनी वाले दो कंप्यूटर मरम्मत के लिए ले गए हैं और बाकी कबाड़ की स्थिति में स्टोर में रखे हैं।
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शनिवार को अधिकारियों ने आईसीयू की स्थिति देखी। उर्सला आईसीयू में छह वेंटिलेटर लगे हैं। ये अलग-अलग कंपनियों के हैं। इनकी मरम्मत की जिम्मेदारी साइरिक्स कंपनी की है। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर जिस कंपनी का होता है, उसे उसी कंपनी के पास मरम्मत के लिए भेजा जाता है। वेंटिलेटर जब तक चलता रहता है तो कंपनी जल्दी से रिपेयर के लिए राजी हो जाती है, बंद हो जाने पर ना-नुकुर करती है।
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आईसीयू के मामले में भी यही हुआ। जब तक वेंटिलेटर चलते रहे, अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जब बंद हो गए तो कंपनी वाले नखरे दिखाने लगे और एक के बाद दूसरा वेंटिलेटर खराब होता गया। स्थिति बिगड़ने पर साइरिक्स कंपनी वाले दो कंप्यूटर मरम्मत के लिए ले गए हैं और बाकी कबाड़ की स्थिति में स्टोर में रखे हैं।
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आईसीयू में नहीं भर्ती किया गया कोई मरीज
अधिकारियों ने शनिवार को गोपनीय स्तर पर निरीक्षण किया तो सही स्थिति पता चली। अधिकारियों ने बताया कि साइरिक्स कंपनी वेंटिलेटर की मरम्मत संबंधी बिल शासन को देती है, वहां से भुगतान हो जाता है। उर्सला के प्रबंधक डॉ. फैसल नफीस ने बताया कि दो वेंटिलेटर मरम्मत के लिए भेजे गए हैं। इसमें लिमिटेशन है, कंपनी कुछ ही खराब पार्ट्स को बनवाती है। निदेशक डॉ. उमाकांत का कहना है कि साइरिक्स के पास पूरे प्रदेश के अस्पतालों के उपकरण ठीक करवाने का ठेका है।
उर्सला के आईसीयू में शनिवार को कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया। इस समय वहां आठ मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है। गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। आईसीयू के बगल हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में एक रोगी भर्ती है। वह डायबिटीज रोगी है। ब्लड शुगर अनियंत्रित होने की वजह से उन्हें यूनिट में भर्ती किया गया।
उर्सला के आईसीयू में शनिवार को कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया। इस समय वहां आठ मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है। गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। आईसीयू के बगल हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में एक रोगी भर्ती है। वह डायबिटीज रोगी है। ब्लड शुगर अनियंत्रित होने की वजह से उन्हें यूनिट में भर्ती किया गया।