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सहेज कर रखी जाएंगी अटल जी की यादें, यहां 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस' बनाने के लिए 5 करोड़ बजट आवंटित

Tue, 28 Aug 2018 08:38 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 28 Aug 2018 08:38 AM IST
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This College Of Kanpur Will Be Made As Center Of Excellence
डीएवी कॉलेज जहां अटल बिहारी वाजपेई जी ने की पढ़ाई
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित डीएवी कॉलेज को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए 5 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।

 
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पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी
कानपुर के डीएवी कॉलेज से अटल जी ने पढ़ाई की है। वह 1945 में कानपुर के डीएवी कॉलेज में राजनीति शास्त्र से एमए करने आ गए। डीएवी कॉलेज के माहौल ने उन्हें राजनीति में दिलचस्पी रखने को मजबूर कर दिया। 
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अटल बिहारी वाजपेयी
अटल जी डीएवी कॉलेज के गांधी ब्लॉक में कमरा-नं.104 में रोजाना बैठकें करते थे। राजनीतिक मुद्दों पर बहस छिड़ती और वह खुलकर वह अपनी बातें रखते। अटल जी जब कॉलेज में भाषण देते तो बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकजुट हो जाते। अटल जी कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों को छू लेते थे। डीएवी कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के गुरु रहे डॉ. मदन मोहन पांडेय के पुत्र डॉ. केके पांडेय बताते हैं कि उनके पिता अक्सर घर में अटल जी की चर्चा किया करते थे।
 
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अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : amar ujala
वह बताते थे कि अटल जी उनसे भी देश और दुनिया की राजनीति पर लंबी चर्चा किया करते थे। उनसे राजनीतिक दांव-पेंच सीखते थे। अटल जी जब पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने तबभी उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. मदन मोहन पांडेय का जिक्र किया। उन्होंने डॉ. पांडेय और राजनीति शास्त्र के तत्कालीन विभागाध्यक्ष रहे डॉ. शांति नंदन को अपना राजनीतिक गुरु बताया था।   

 
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अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
गंगा किनारे सजती थी कविताओं की महफिल 
कानपुर में पढ़ाई के दौरान अटल जी कविताओं के लिए काफी प्रचलित हो गए। गर्मी के दिनों में अक्सर शाम को गंगा किनारे उनकी महफिल सजती जिसमें उनके दोस्त शामिल होते थे। सभी आजादी से जुड़े मुद्दों पर कविताएं कहते, गीत कहते और फिर वहीं व्यायाम करते थे। दोस्तों के साथ गंगा स्नान करने के बाद वापस छात्रावास जाते थे। डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित श्रीवास्तव बताते हैं कि पुराने शिक्षकों के अनुसार अपनी कविताओं में भी अटल जी राजनीतिक तंज किया करते थे जिसे काफी सराहना मिलती थी।  

डॉ. केके पांडेय बताते हैं कि उनके पिता एक स्कूल खोलना चाहते थे। सबकुछ बन चुका था बस मान्यता मिलने की देरी थी लेकिन बगैर किसी कारण शिक्षा विभाग उन्हें मान्यता नहीं दे रहा था। पिता जी कई बार तत्कालीन शिक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर अपनी बातें रख चुके थे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उस दौरान उन्होंने मुझसे कहा कि चलो अटल से मिलकर देखते हैं... शायद कुछ हो जाए। मुझे लेकर वह प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। वहां हम लोगों को मिलने नहीं दिया जा रहा था।
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