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अंगूठा चूसने और पेंसिल चबाने से टेढ़े हो जाते हैं दांत, शरीर के दूसरे अंगों को घेरने लगते हैं रोग
Wed, 15 May 2019 05:34 PM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 15 May 2019 05:34 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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आज वर्ल्ड आर्थोडोंटिक हेल्थ डे है। बच्चों के दांतों के टेढ़े-मेढ़े होने की समस्या से सिर्फ वे ही परेशान नहीं रहते बल्कि पूरा घर चिंतित होता है। अगर दांत टेढ़े रहे तो आगे चलकर पायरिया समेत दांतों और शरीर के दूसरे अंगों के बहुत से रोग घेर सकते हैं। इस संबंध में इंडियन डेंटल एसोसिएशन और इंडियन आर्थोडोंटिक सोसाइटी ने कई शोध और सैंपल सर्वे भी किए हैं।
कानपुर के सीनियर आर्थोडोंटिक और इंडियन डेंटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एके मेहरोत्रा का कहना है कि समय रहते विभिन्न अत्याधुनिक विधियों से दांतों को ठीक किया जा सकता है। लोगों में यह भ्रम है कि दूध के दांत टूटने के बाद चावल के दांत निकलने पर इलाज कराएंगे।
उनका कहना है कि दांत टेढ़े नजर आने पर अभिभावकों को तुरंत इलाज शुरू करा देना चाहिए। अब तार बांधने की भी जरूरत नहीं पड़ती, प्लास्टिक के एलानर लगा कर इन्हें ठीक किया जा सकता है।
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कानपुर के सीनियर आर्थोडोंटिक और इंडियन डेंटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एके मेहरोत्रा का कहना है कि समय रहते विभिन्न अत्याधुनिक विधियों से दांतों को ठीक किया जा सकता है। लोगों में यह भ्रम है कि दूध के दांत टूटने के बाद चावल के दांत निकलने पर इलाज कराएंगे।
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उनका कहना है कि दांत टेढ़े नजर आने पर अभिभावकों को तुरंत इलाज शुरू करा देना चाहिए। अब तार बांधने की भी जरूरत नहीं पड़ती, प्लास्टिक के एलानर लगा कर इन्हें ठीक किया जा सकता है।
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यह ध्यान रखें
- बच्चा मुंह खोलकर सोए तो उपचार कराएं।
- बच्चे में दांत जबान से ढेलने की आदत हो तो मना करें।
- बच्चे को चुसनी की आदत न डालें।
- पेसिंल, होंठ चबाने की आदत न पड़ने दें।
- मां-बाप के दांत टेढ़े हैं तो बच्चों को लेकर सावधानी बरतें।
- फास्ट फूड की आदत से बच्चों को बचाएं, सादा खाना चबा कर खाएं।
- बच्चा मुंह खोलकर सोए तो उपचार कराएं।
- बच्चे में दांत जबान से ढेलने की आदत हो तो मना करें।
- बच्चे को चुसनी की आदत न डालें।
- पेसिंल, होंठ चबाने की आदत न पड़ने दें।
- मां-बाप के दांत टेढ़े हैं तो बच्चों को लेकर सावधानी बरतें।
- फास्ट फूड की आदत से बच्चों को बचाएं, सादा खाना चबा कर खाएं।
तो इसलिए मनाया जाता वर्ल्ड आर्थोडोंटिक हेल्थ डे
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ आर्थोडोंटिस्ट्स एसोसिएशन (डब्ल्युएफओ) के निर्देश पर 15 मई, 2017 को पहला वर्ल्ड आर्थोडोंटिक हेल्थ डे मनाया गया। इसका उद्देश्य लोगों को दांतों की सेहत और सुंदरता बनाए रखने के संबंध में जागरूक करना है। आर्थोडोंटिक उन दंत रोग विशेषज्ञों को कहा जाता है जो दांतों की सुंदरता और सेहत के विशेषज्ञ होते हैं।
केस-1
कानपुर में स्वरूपनगर के रहने वाले छह साल के रोहन के आगे के तीन दांत बाहर निकल आए हैं। उसे दोस्त चिढ़ाते हैं तो घर आकर रोता है। उसने चुसनी खूब चूसी और अब अंगूठा चूसने की आदत है। उसे आर्थोडोंटिक को दिखाया गया तो पता चला कि चुसनी और अंगूठा चूसने से उसके दांत बाहर निकले हैं। साथ ही दांतों में कीड़े की समस्या हो गई है। दाढ़ों के ऊपरी हिस्से में कालापन भी आ गया है। उसके दांत दुरुस्त करने के लिए एलाइनर लगाया गया है।
केस-2
कानपुर में हर्षनगर की रहने वाली 12 साल की रागिनी के आगे के दांत बाहर निकले हैं। साथ ही नीचे और ऊपर की दाढ़ें आपस में फंसी हैं। साइड के दोनों तरफ का एक-एक दांत तिरछा हो गया है। रागिनी को मम्मी-पापा के साथ पार्टियों या रिश्तेदारों के यहां जाने में शर्म आती है। उसकी मां देवयानी का कहना है कि बेटी अक्सर दांतों को लेकर रोया करती है। रागिनी बचपन से मुंह खोलकर सोती है। साथ ही उसे फास्ट फूड, चॉकलेट की आदत है। आर्थोडोंटिक कहते हैं कि इससे जबड़ा संकरा हो गया जिससे दांत एक-दूसरे पर चढ़ गए।
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ आर्थोडोंटिस्ट्स एसोसिएशन (डब्ल्युएफओ) के निर्देश पर 15 मई, 2017 को पहला वर्ल्ड आर्थोडोंटिक हेल्थ डे मनाया गया। इसका उद्देश्य लोगों को दांतों की सेहत और सुंदरता बनाए रखने के संबंध में जागरूक करना है। आर्थोडोंटिक उन दंत रोग विशेषज्ञों को कहा जाता है जो दांतों की सुंदरता और सेहत के विशेषज्ञ होते हैं।
केस-1
कानपुर में स्वरूपनगर के रहने वाले छह साल के रोहन के आगे के तीन दांत बाहर निकल आए हैं। उसे दोस्त चिढ़ाते हैं तो घर आकर रोता है। उसने चुसनी खूब चूसी और अब अंगूठा चूसने की आदत है। उसे आर्थोडोंटिक को दिखाया गया तो पता चला कि चुसनी और अंगूठा चूसने से उसके दांत बाहर निकले हैं। साथ ही दांतों में कीड़े की समस्या हो गई है। दाढ़ों के ऊपरी हिस्से में कालापन भी आ गया है। उसके दांत दुरुस्त करने के लिए एलाइनर लगाया गया है।
केस-2
कानपुर में हर्षनगर की रहने वाली 12 साल की रागिनी के आगे के दांत बाहर निकले हैं। साथ ही नीचे और ऊपर की दाढ़ें आपस में फंसी हैं। साइड के दोनों तरफ का एक-एक दांत तिरछा हो गया है। रागिनी को मम्मी-पापा के साथ पार्टियों या रिश्तेदारों के यहां जाने में शर्म आती है। उसकी मां देवयानी का कहना है कि बेटी अक्सर दांतों को लेकर रोया करती है। रागिनी बचपन से मुंह खोलकर सोती है। साथ ही उसे फास्ट फूड, चॉकलेट की आदत है। आर्थोडोंटिक कहते हैं कि इससे जबड़ा संकरा हो गया जिससे दांत एक-दूसरे पर चढ़ गए।