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Kanpur News: 75 फीसदी हाजिरी पूरी नहीं होने पर छात्रों को मिड सेमेस्टर की परीक्षा देने से रोका
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय।
- फोटो : संवाद
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में 75 फीसदी उपस्थिति नहीं पूरी करने वाले छात्रों की परेशानी मिड सेमेस्टर की परीक्षा में बढ़ गई है। ऐसे छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
कृषि, लॉ सहित अन्य विभाग के सोमवार को करीब 4400 और मंगलवार को करीब 3400 छात्रों को केंद्र से लौटाया गया। इससे छात्रों में नाराजगी है। हालांकि विवि प्रशासन का कहना है कि सत्र की शुरुआत से ही छात्रों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है फिर भी उन्होंने लापरवाही बरती है।
विवि में मिड सेमेस्टर की परीक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कैंपस में संचालित कोर्स में जिन छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी से कम हैं उनको परीक्षा में नहीं शामिल करने के आदेश हैं। ऐसे छात्रों की सूची केंद्र में पहले ही दे दी गई है ताकि उनको परीक्षा देने से रोका जा सके।
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सोमवार को परीक्षा केंद्र पर पहुंचने पर जब कई छात्रों को प्रवेश से रोक दिया गया तो वह हतप्रभ रह गए। कुछ छात्रों ने इसे भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि कई बार बीमारी, पारिवारिक कारण या अन्य बाधाओं की वजह से नियमित उपस्थिति संभव नहीं हो पाती है। इससे पहले भी काफी छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया।
हालांकि विवि प्रशासन का तर्क है कि यह नियम नया नहीं है। विश्वविद्यालय अधिनियम और यूजीसी के निर्देशों के अनुसार परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। अब तक इसमें ढील बरती जाती थी।
शैक्षणिक अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब कड़ाई से इसका पालन शुरू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमित उपस्थिति से छात्रों का अकादमिक स्तर सुधरेगा और उनकी विषय की समझ भी मजबूत होगी।
वहीं, प्रभावित छात्रों ने विवि प्रशासन से वैकल्पिक समाधान निकालने की मांग की है। कृषि और लॉ संकाय के छात्र ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह आंदोलन भी कर सकते हैं। जबकि विवि प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था आगामी मुख्य परीक्षाओं में भी लागू होगी।
ऐसे में यदि छात्र उपस्थिति को लेकर लापरवाह रहे तो वह सीधे अंतिम परीक्षाओं से वंचित हो सकते हैं। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यह नियम शुरू से छात्रों को पता है। कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। अगर छात्र आगे अपनी उपस्थिति दुरुस्त करते हैं तो एक बार दोबारा विचार किया जा सकता है।
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कृषि, लॉ सहित अन्य विभाग के सोमवार को करीब 4400 और मंगलवार को करीब 3400 छात्रों को केंद्र से लौटाया गया। इससे छात्रों में नाराजगी है। हालांकि विवि प्रशासन का कहना है कि सत्र की शुरुआत से ही छात्रों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है फिर भी उन्होंने लापरवाही बरती है।
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विवि में मिड सेमेस्टर की परीक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कैंपस में संचालित कोर्स में जिन छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी से कम हैं उनको परीक्षा में नहीं शामिल करने के आदेश हैं। ऐसे छात्रों की सूची केंद्र में पहले ही दे दी गई है ताकि उनको परीक्षा देने से रोका जा सके।
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सोमवार को परीक्षा केंद्र पर पहुंचने पर जब कई छात्रों को प्रवेश से रोक दिया गया तो वह हतप्रभ रह गए। कुछ छात्रों ने इसे भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि कई बार बीमारी, पारिवारिक कारण या अन्य बाधाओं की वजह से नियमित उपस्थिति संभव नहीं हो पाती है। इससे पहले भी काफी छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया।
हालांकि विवि प्रशासन का तर्क है कि यह नियम नया नहीं है। विश्वविद्यालय अधिनियम और यूजीसी के निर्देशों के अनुसार परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। अब तक इसमें ढील बरती जाती थी।
शैक्षणिक अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब कड़ाई से इसका पालन शुरू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमित उपस्थिति से छात्रों का अकादमिक स्तर सुधरेगा और उनकी विषय की समझ भी मजबूत होगी।
वहीं, प्रभावित छात्रों ने विवि प्रशासन से वैकल्पिक समाधान निकालने की मांग की है। कृषि और लॉ संकाय के छात्र ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह आंदोलन भी कर सकते हैं। जबकि विवि प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था आगामी मुख्य परीक्षाओं में भी लागू होगी।
ऐसे में यदि छात्र उपस्थिति को लेकर लापरवाह रहे तो वह सीधे अंतिम परीक्षाओं से वंचित हो सकते हैं। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यह नियम शुरू से छात्रों को पता है। कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। अगर छात्र आगे अपनी उपस्थिति दुरुस्त करते हैं तो एक बार दोबारा विचार किया जा सकता है।