दवा कारोबारी हत्याकांड: क्लोजर रिपोर्ट से अपने दाग धोएगी पुलिस, भाई को देख रो पड़ी शालू, बोली- यह कैसे हो गया?
Kanpur Murder Case: दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में वारदात के बाद 20 दिनों तक बेगुनाह शालू को जेल में रखने के बाद अब पुलिस अपनी गलती सुधारने में जुटी है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ प्रमुख बिंदुओं के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट तैयार की गई है, जिससे शालू की रिहाई का रास्ता साफ होगा।
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कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में 20 दिनों तक उनकी बेगुनाह बहू शालू को सलाखों के पीछे रखने वाली पुलिस अब अपनी गलतियां सुधारने में लगी है। शालू की रिहाई कराने के लिए शुक्रवार को विवेचक समेत अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने अपने कार्यालय में बैठक की। आठ बिंदुओं पर क्लोजर रिपोर्ट तैयार की गई।
इसके आधार पर शालू की रिहाई का रास्ता साफ हो सकेगा। हालांकि, क्लोजर रिपोर्ट की भी सबसे अहम कड़ी हत्यारोपी विशाल ही है जिसने पहले शालू और अब सुब्रत का नाम लिया। अब सवाल उठ रहा है कि विशाल कल अगर तीसरे का नाम ले लेगा तब पुलिस क्या करेगी। क्या सुब्रत के लिए भी पुलिस शालू की तरह ही क्लोजर रिपोर्ट तैयार करेगी।
सुब्रत को भी क्लीनचिट नहीं दी थी
बता दें कि पांच सितंबर को दवा कारोबारी की हत्या की गई थी। वारदात के 14 घंटे बाद ही पकड़े गए आरोपी नौकर विशाल ने जैसे ही शालू का नाम लिया पुलिस ने उनके खिलाफ साक्ष्यों का पुलिंदा तैयार कर गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया था। इसके बाद जब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा, तो पुलिस ने दोबारा जांच शुरू की। हालांकि, सुब्रत को भी क्लीनचिट नहीं दी थी।
शालू बेगुनाह और सुब्रत गुनहगार निकला
20 दिनों में करीब पांच बार सुब्रत को थाने बुलाकर पूछताछ की गई लेकिन एक बार भी उसका कबूलनाम तो दूर पुलिस उसके खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य तक नहीं जुटा सकी। बुधवार को पीसीआर के दौरान बंद कमरों में आरोपियों और सुब्रत से हुई कुछ ही घंटों में पूछताछ में पूरा घटनाक्रम बदल गया। हत्या की साजिश करने वाली शालू बेगुनाह और सुब्रत गुनहगार बन गया।
बड़ी लापरवाही पर भी, किसी पर कार्रवाई नहीं
एक बेगुनाह महिला को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाला विवेचक कौन था। उसने 24 घंटे में ऐसी कौन सी विवेचना कर दी जिससे शालू अपने ससुर की हत्या की साजिशकर्ता बन गई। अब अगर पुलिस अपनी गलतियां ही सुधार रही है तो क्या इतनी बड़ी लापरवाही पर मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई उचित नहीं है। इससे तो यही संदेश जाएगा पहले जो पकड़ जाए उसे जेल भेजो और बाद में जांच करते रहो।
शालू को जेल भेजने के प्रमुख बिंदु
- विशाल बोला था कि विनीत को मरवाने के लिए शालू ने ही छह लाख की सुपारी दी थी।
- विशाल के मुताबिक फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी भाभी ने गुमटी से बनवाई थी।
- गार्ड के मुताबिक शालू ने ही शुभम नाम के व्यक्ति को अपार्टमेंट में एंट्री कराने के लिए कहा था।
- विनीत शालू पर बंदिशें लगाते थे इसलिए शालू ने उसे मरवा दिया था।
शालू को जेल निकलवाने के प्रमुख बिंदु
- रिमांड में विशाल बोला, भाभी ने नहीं भइया ने मरवाया था विनीत को।
- फ्लैट में प्रवेश करने के लिए डुप्लीकेट नहीं बल्कि सुब्रत की ओर से दी गई असली चाबी का प्रयोग किया गया था।
- सुब्रत ने ही शालू को मैसेज कर विशाल का नाम गेट पर शुभम लिखवाने के लिए कहा था।
- सुब्रत पर 40 लाख का कर्ज था और वह पिता की अय्याशी से आजिज था, इसलिए उसने हत्या कराई।
भाई से बोली शालू, यह सब कैसे हो गया
रिमांड से लौटने के बाद शालू को इन 20 दिनों में जो हुआ उस पर यकीन नहीं हो रहा है। शुक्रवार को उससे मिलने जब उसके भाई धीरज अरोरा पहुंचे तो वह उन्हें देखकर फफक पड़ी। उसकी जुबान से यही निकला कि भाई यह सब कैसे हो गया, कुछ समझ में नहीं आ रहा। इसके बाद आंसू पोछते हुए शालू ने अपने बेटे जय की खैरियत पूछी। कहा कि भाई मुझे उससे मिलना है। कब तक उसके पास पहुंचूंगी।