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Kanpur News: पुराने दिव्यांग प्रमाणपत्र किए जा रहे खारिज, नए के लिए भटक रहे

Tue, 07 Oct 2025 02:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Oct 2025 02:38 AM IST
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Old disability certificates are being rejected, people are wandering around for new ones.
कानपुर। सीएमओ कार्यालय में दिव्यांगों का परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है लेकिन पूर्व में परीक्षण करा चुके दिव्यांगाें का मैन्युअल प्रमाणपत्र निरस्त कर नया आवेदन लिया जा रहा है। ऐसे में दोबारा परीक्षण के दिव्यांगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सोमवार को डॉक्टर ने 20 से ज्यादा दिव्यांगों को दोबारा जांच के लिए लिखा।
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सुबह 10 बजे से आयोजित दिव्यांग बोर्ड में हड्डी, आई सर्जन, मानसिक रोग और ईएनटी के डॉक्टर बैठते हैं। दोपहर 12:30 बजे हड्डी और ईएनटी डॉक्टर दिव्यांगता की जांच कर रहे थे। वहीं दोपहर एक बजे आई सर्जन पहुंचे। इस दौरान फर्रुखाबाद से जांच कराने आए दिनेश चंद्र ने बताया कि नौ बजे वह बोर्ड में पहुंच गए थे। दोपहर 12 बजे तक आई सर्जन के न आने पर वह वापस चले गए। बोर्ड में पहुंची दिव्यांग श्रद्धा पटेल का 2010 में मैन्युअल दिव्यांग प्रमाणपत्र बना था। इसके बाद भी बोर्ड के कर्मचारी ने दोबारा जांच कराने के लिए नया आवेदन करा दिया। डॉक्टर ने एक्सरे के लिए पर्चे में लिख दिया।
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इसी तरह नवाबगंज निवासी मनोज वर्मा, पत्नी विजय लक्ष्मी और बेटी रश्मी मूकबधिर हैं। तीनों का करीब 20 साल पहले मैन्युअल प्रमाणपत्र सीएमओ की ओर से जारी किया था। तीनों ने यूडीआईडी (ऑनलाइन प्रमाण पत्र) जारी करने के लिए आवेदन किया था लेकिन सीएमओ कार्यालय से इसे खारिज कर दिया गया। इस वजह से इन्हें दिव्यांगता का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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गैर जनपदों में जारी हो रही यूडीआईडी
दिव्यांग संगठन के नेता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि कानपुर देहात, औरैया, इटावा सहित अन्य जिलों में मैन्युअल प्रमाणपत्र को ऑनलाइन करके यूडीआईडी जारी किया जा रहा है। तीन साल पहले तक कानपुर में भी ऐसा हो रहा था। अब इसे बंद कर दिया गया है।

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मैन्युअल दिव्यांग प्रमाणपत्र वालों के पत्रों को खारिज कर नया बनाया जा रहा है ताकि नए सिरे से दिव्यांगता का परीक्षण हो सके। पुराने प्रमाणपत्रों के आधार पर यूडीआईडी जारी करने का नियम नहीं है। - डॉ. रमित रस्तोगी, नोडल अधिकारी दिव्यांग बोर्ड
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