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घूस के ‘रथ’ पर आरटीओ का ‘सारथी’
आशुतोष मिश्र, अमरउजाला, कानपुर
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:30 PM IST
सार
- 200 लर्निंग लाइसेंस के हर रोज होते हैं ऑनलाइन आवेदन
- अफसरों और दलालों के गठजोड़ ने ऑन लाइन व्यवस्था कर दी फेल
- लाइसेंस बनवाने के लिए मिलने वाली तारीख से पहले ही बन रहे
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विस्तार
अफसरों और दलालों के गठजोड़ ने कानपुर आरटीओ की ऑन लाइन व्यवस्था धड़ाम कर दी है। घूस देने पर दलालों के माध्यम से आरटीओ में मनमाने ढंग से ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की तिथि से पहले ही बनवा दिए जा रहे हैं। इसका रेट तय है। घूस का हिस्सा बाबुओं से लेकर अफसरों तक जाता है।
दरअसल, आरटीओ में पारदर्शिता लाने के लिए डेढ़ माह पहले ही प्रदेश सरकार ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को सारथी नामक सॉफ्टवेयर लाई थी। माना गया था इस ऑन लाइन व्यवस्था से घूसखोरी नहीं होगी। लेकिन अफसरों और दलालों ने सॉफ्टवेयर की एक खामी निकाल भ्रष्टाचार का रास्ता खोज निकाला।
आरटीओ अफसरों का कहना है कि सारथी सॉफ्टवेयर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे देखा जा सके कि कितने लाइसेंस टेस्ट के लिए या फोटो खिंचाने के लिए दी गई तारीख से पहले बन गए। इसी का फायदा उठाया जा रहा है।
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दरअसल, आरटीओ में पारदर्शिता लाने के लिए डेढ़ माह पहले ही प्रदेश सरकार ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को सारथी नामक सॉफ्टवेयर लाई थी। माना गया था इस ऑन लाइन व्यवस्था से घूसखोरी नहीं होगी। लेकिन अफसरों और दलालों ने सॉफ्टवेयर की एक खामी निकाल भ्रष्टाचार का रास्ता खोज निकाला।
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आरटीओ अफसरों का कहना है कि सारथी सॉफ्टवेयर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे देखा जा सके कि कितने लाइसेंस टेस्ट के लिए या फोटो खिंचाने के लिए दी गई तारीख से पहले बन गए। इसी का फायदा उठाया जा रहा है।
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ऑनलाइन ने बढ़ा दी घूस की रकम
लाइसेंस के लिए ऑनलाइन व्यवस्था के बाद घूस के रेट और बढ़ गए हैं। सूत्र बताते हैं कि पहले लर्निंग लाइसेंस पांच सौ रुपये और परमानेंट लाइसेंस 1200 रुपये घूस देने पर बन जाता था। अब लर्निंग लाइसेंस के आठ सौ से लेकर एक हजार रुपये और परमानेंट लाइसेंस दो हजार रुपये तक में बनता है।
हर रोज बढ़ती पेंडेंसी
आरटीओ दफ्तर में हर रोज दो सौ लर्निंग लाइसेंस, दो सौ परमानेंट लाइसेंस और दो सौ रिन्यूवल लाइसेंस के ही ऑन लाइन आवेदन होते हैं। हर रोज पेंडेसी बढ़ती जाती है। इसलिए लोगों को टेस्ट या फोटो खिंचाने के लिए लंबी तारीख मिलती है। लोग लाइसेंस जल्द बनवाना चाहते हैं। इसीलिए ऑन लाइन की पारदर्शी व्यवस्था होने के बाद भी दलालों या आरटीओ दफ्तरों के कर्मचारियों को घूस देने को तैयार हो जाते हैं।
इस तरह ऑन लाइन आवेदन
लाइसेंस के लिए parivahan.gov.in पर आवेदन करना होता है। साइट खुलने के बाद लाइसेंस सर्विसेज पर जाना होगा। इसके बाद लाइसेंस का विकल्प खोलना होगा। इसमें लर्निंग लाइसेंस, परमानेंट लाइसेंस, रिन्यूवल का विकल्प आएगा। इसके बाद फॉर्म भरना होगा। संबंधित दस्तावेज, फोटो, डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करना होगा। फिर लर्निंग लाइसें की 150 रुपये और टेस्ट फीस 50 रुपये डिपोजिट करनी होगी। परमानेंट लाइसेंस के लिए 350 रुपये फीस देनी होती है।
लाइसेंस के लिए ऑनलाइन व्यवस्था के बाद घूस के रेट और बढ़ गए हैं। सूत्र बताते हैं कि पहले लर्निंग लाइसेंस पांच सौ रुपये और परमानेंट लाइसेंस 1200 रुपये घूस देने पर बन जाता था। अब लर्निंग लाइसेंस के आठ सौ से लेकर एक हजार रुपये और परमानेंट लाइसेंस दो हजार रुपये तक में बनता है।
हर रोज बढ़ती पेंडेंसी
आरटीओ दफ्तर में हर रोज दो सौ लर्निंग लाइसेंस, दो सौ परमानेंट लाइसेंस और दो सौ रिन्यूवल लाइसेंस के ही ऑन लाइन आवेदन होते हैं। हर रोज पेंडेसी बढ़ती जाती है। इसलिए लोगों को टेस्ट या फोटो खिंचाने के लिए लंबी तारीख मिलती है। लोग लाइसेंस जल्द बनवाना चाहते हैं। इसीलिए ऑन लाइन की पारदर्शी व्यवस्था होने के बाद भी दलालों या आरटीओ दफ्तरों के कर्मचारियों को घूस देने को तैयार हो जाते हैं।
इस तरह ऑन लाइन आवेदन
लाइसेंस के लिए parivahan.gov.in पर आवेदन करना होता है। साइट खुलने के बाद लाइसेंस सर्विसेज पर जाना होगा। इसके बाद लाइसेंस का विकल्प खोलना होगा। इसमें लर्निंग लाइसेंस, परमानेंट लाइसेंस, रिन्यूवल का विकल्प आएगा। इसके बाद फॉर्म भरना होगा। संबंधित दस्तावेज, फोटो, डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करना होगा। फिर लर्निंग लाइसें की 150 रुपये और टेस्ट फीस 50 रुपये डिपोजिट करनी होगी। परमानेंट लाइसेंस के लिए 350 रुपये फीस देनी होती है।
डेमो पिक
मेरी जानकारी में नहीं है कि दी गई टेस्ट की तारीख से पहले भी लाइसेंस जारी हो रहे हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है। यह काम एआरटीओ प्रशासन देखते हैं। वह अभी छुट्टी पर हैं। उनके आने के बाद इस बारे में रिपोर्ट मांगी जाएगी। देखा जाएगा कि तय तारीख से पहले लाइसेंस कैसे बन रहे हैं और क्यों बनाए जा रहे हैं।
- संजय सिंह, आरटीओ
केस
राजीव सिंह सेंगर ने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्हें एप्लीकेशन नंबर 1347776818 मिला। टेस्ट के लिए ऑनलाइन पांच जुलाई की तारीख मिली थी। राजीव सिंह का लाइसेंस टेस्ट के लिए दी गई तारीख से 17 दिन पहले ही बन गया। बाबुओं और दलालों का गठजोड़ ही है कि उनकी परीक्षा 18 जून को ही ले ली गई। वह परीक्षा में पास भी हो गए। इसके बाद उनका लाइसेंस बन गया।
- संजय सिंह, आरटीओ
केस
राजीव सिंह सेंगर ने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्हें एप्लीकेशन नंबर 1347776818 मिला। टेस्ट के लिए ऑनलाइन पांच जुलाई की तारीख मिली थी। राजीव सिंह का लाइसेंस टेस्ट के लिए दी गई तारीख से 17 दिन पहले ही बन गया। बाबुओं और दलालों का गठजोड़ ही है कि उनकी परीक्षा 18 जून को ही ले ली गई। वह परीक्षा में पास भी हो गए। इसके बाद उनका लाइसेंस बन गया।